चेन्नई। भारत द्वारा दक्षिण एशिया संचार उपग्रह जीसैट-9 के प्रक्षेपण के लिए तैयार है. इससे क्षेत्र में देशों के बीच संपर्क को बढ़ावा मिलेगा. इस भूस्थिर संचार उपग्रह का निर्माण भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने किया है. इसका प्रक्षेपण यहां से करीब 135 किलोमीटर दूर श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया जाएगा.

जीसैट-9 को भारत की ओर से उसके दक्षिण एशियाई पड़ोसी देशों के लिए उपहार माना जा रहा है. इस उपग्रह को इसरो का रॉकेट जीएसएलवी एफ 09 लेकर जाएगा. इसरो के अध्यक्ष ए एस किरण कुमार ने कहा कि शुक्रवार शाम चार बजकर 57 मिनट पर इसका प्रक्षेपण होगा. सभी गतिविधियां सुचारू रूप से चल रही हैं.

जीसैट को लेकर जाने वाले जीएसएलवी-एफ09 का प्रक्षेपण यहां से करीब 135 किलोमीटर दूर श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लांचिंग पैड से होगा. इसरो ने कहा कि जीएसएलवी.एफ09 (जीसैट-9) मिशन के ऑपरेशन का 28 घंटे का काउंटडाउन गुरुवार दोपहर 12 बजकर 57 मिनट पर शुरू हुआ.

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भारत की स्पेस डिप्लोमैसी

भारत की स्पेस डिप्लोमैसी के तहत इस सैटेलाइट को सार्क सैटेलाइट का नाम दिया गया था, लेकिन पाकिस्तान ने इसका हिस्सा बनने से इंकार कर दिया था. इसे अंतरिक्ष में चीन को भारत के जवाब के रूप में देखा जा रहा है. अपनी 11वीं उड़ान के ज़रिए जीएसएलवी रॉकेट एक खास उपग्रह साउथ एशिया सैटलाइट को अंतरिक्ष में अपनी कक्षा में स्थापित करेगा. यह एक संचार उपग्रह है, जो नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, भारत, मालदीव, श्रीलंका और अफगानिस्तान को दूरसंचार की सुविधाएं मुहैया कराएगा.

पाक ने किया खुद को अलग

पाकिस्तान ने यह कहते हुए इससे बाहर रहने का फैसला किया कि उसका अपना अंतरिक्ष कार्यक्रम है. इस उपग्रह की लागत करीब 235 करोड़ रुपये है और इसका उद्देश्य दक्षिण एशिया क्षेत्र के देशों को संचार और आपदा सहयोग मुहैया कराना है. इसका मिशन जीवनकाल 12 साल का है.

मई 2014 में सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसरो के वैज्ञानिकों से दक्षेस उपग्रह बनाने के लिए कहा था वह पड़ोसी देशों को भारत की ओर से उपहार होगा. पिछले रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में मोदी ने घोषणा की थी कि दक्षिण एशिया उपग्रह अपने पड़ोसी देशों को भारत की ओर से ‘‘कीमती उपहार’’ होगा.

मोदी ने कहा था कि पांच मई को भारत दक्षिण एशिया उपग्रह का प्रक्षेपण करेगा. इस परियोजना में भाग लेने वाले देशों की विकासात्मक जररतों को पूरा करने में इस उपग्रह के फायदे लंबा रास्ता तय करेंगे. भविष्य के प्रक्षेपणों के बारे में पूछे जाने पर कुमार ने कहा कि इसरो जीएसएलवी एमके 3 के बाद पीएसएलवी का प्रक्षेपण करेगा. उन्होंने कहा कि इसरो अगले साल की शुरूआत में चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण करेगा.