नई दिल्ली: भारत ने सैन्य बलों के आधुनिकीकरण और क्षेत्र में प्रतिद्वंद्वियों के प्रति उनकी लड़ाकू क्षमता बढ़ाने के लिए अगले पांच से सात साल में 130 अरब डॉलर खर्च करने का खाका तैयार किया है. इस बारे में एक आधिकारिक दस्तावेज से जानकारी मिली है और सैन्य सूत्रों ने बताया है. विभिन्न सैन्य सूत्रों ने कहा कि सरकार का लक्ष्य क्षमता बढ़ाने में निवेश करना है, ताकि सैन्य बल चीन या पाकिस्तान से किसी भी मुमकिन खतरे से असरदार तरीके से निपट सकें.

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि योजना के तहत विभिन्न हथियारों, मिसाइलों, वायु रक्षा प्रणाली, लड़ाकू विमानों, पनडुब्बी और युद्धपोत, ड्रोन, निगरानी उपकरण की खरीदारी और कृत्रिम बुद्धिमता के व्यापक इस्तेमाल के लिए संरचना विकसित किए जाने हैं.

पिछले 10-15 साल में जीडीपी की तुलना में भारत का खर्च अपेक्षाकृत स्थिर रहा है, लेकिन इसी अवधि में चीन ने रक्षा बजट में जबरदस्त बढोतरी की है. आधिकारिक दस्तावेज में कहा गया, सरकार सभी सशस्त्र बलों के लिए अगले पांच-सात वर्षों में बेड़े के आधुनिकीकरण पर 130 अरब डॉलर खर्च करेगी.

पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने थल सेना, वायु सेना और नौसेना के बीच समन्वय बढ़ाने के लिए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) पद बनाने के लंबित प्रस्ताव को मंजूरी देने की घोषणा की थी. सूत्रों ने बताया कि तीनों बलों में आधुनिकीकरण अभियान को लागू करने में सीडीएस महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेंगे.

सूत्रों ने बताया कि बाह्य अंतरिक्ष में भारत को सैन्य ताकत के रूप में स्थापित करना योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू होगा.
उन्होंने कहा कि फिलहाल सरकार की प्राथमिकता भारतीय सेना के लिए 2600 इनफैन्ट्री कॉम्बैट वाहनों, 1700 फ्यूचर रेडी कॉम्बैट वाहनों और वायु सेना के लिए 110 बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमानों की आपूर्ति का रास्ता तैयार करने सहित लंबित प्रस्तावों को लेकर है. एक सूत्र ने बताया कि इनफैन्ट्री का आधुनिकीकरण महत्वपूर्ण विषय है.

सूत्रों ने बताया कि सरकार इससे वाकिफ है कि चीन अपनी वायु और नौसैन्य क्षमता में इजाफा कर रहा है. भारतीय वायु सेना और भारतीय नौसेना की क्षमता प्रतिद्वंद्वियों की तरह मजबूत करने का लक्ष्य है. संचालन क्षमता बढाने के लिए नौसेना अगले तीन-चार वर्षों में 200 जहाजों, 500 विमानों और 24 अटैक पनडुब्बी हासिल करने की योजना को पहले ही अंतिम रूप दे चुकी है. वर्तमान में नौसेना के पास 132 जहाज, 220 विमान और 15 पनडुब्बी हैं. सूत्रों ने बताया कि सरकार वायु सेना की संपूर्ण लड़ाकू क्षमता में महत्वपूर्ण बढ़ोत्‍तरी को लेकर भी प्रतिबद्ध है और विस्तृत योजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है.