Explainer: चीन को पीछे छोड़ दुनिया की नंबर-1 आर्थिक ताकत बनेगा भारत! जानिए 2060 तक कैसे बदल जाएगी वैश्विक तस्वीर

Written By: Tanuja Joshi Updated by: Tanuja Joshi
Updated Date:June 7, 2026 3:13 PM IST

ग्लोबल जस्टिस रिपोर्ट के अनुसार आने वाले दशकों में भारत की आर्थिक ताकत तेजी से बढ़ सकती है. अनुमान है कि 2060 के आसपास भारत वैश्विक जीडीपी हिस्सेदारी के मामले में चीन को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बन सकता है.

  • भारत 2060 तक वैश्विक जीडीपी हिस्सेदारी के मामले में चीन को पीछे छोड़ सकता है.
  • चीन की घटती आबादी और धीमी पड़ती आर्थिक वृद्धि को उसके भविष्य की चुनौती माना जा रहा है.
  • भारत की युवा आबादी, बढ़ता उपभोक्ता बाजार और तेज आर्थिक विकास उसे लंबी अवधि में बड़ा लाभ दे सकते हैं.
  • शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और रोजगार सृजन पर लगातार निवेश भारत की आर्थिक ताकत को और मजबूत करेगा.
  • परचेजिंग पावर पैरिटी (PPP) के आधार पर भारत पहले से ही दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है.

India Economy: वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर जारी एक नई रिपोर्ट ने भारत के भविष्य को लेकर बड़ी उम्मीदें जगाई हैं. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आने वाले दशकों में भारत आर्थिक मोर्चे पर ऐसी छलांग लगा सकता है, जिससे वह चीन को पीछे छोड़कर दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बन जाए. ये अनुमान परचेजिंग पावर पैरिटी (PPP) के आधार पर लगाया गया है, जो किसी देश की वास्तविक खरीद क्षमता और आर्थिक ताकत को दर्शाता है.

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वर्तमान समय में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता है. मजबूत घरेलू बाजार, युवा आबादी, बढ़ता डिजिटल इकोसिस्टम और इंफ्रास्ट्रक्चर पर तेजी से हो रहे निवेश ने भारत को वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना दिया है. यही कारण है कि कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक भूमिका को और मजबूत होते देख रही हैं.

अर्थव्यवस्था लगातार विस्तार करेगी

हाल ही में जारी एक ग्लोबल जस्टिस रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक जीडीपी में हिस्सेदारी के मामले में भारत वर्ष 2060 के आसपास चीन को पीछे छोड़ सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि 21वीं सदी के दूसरे भाग में चीन की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ सकती है, जबकि भारत की अर्थव्यवस्था लगातार विस्तार करती रहेगी. यही बदलाव वैश्विक आर्थिक संतुलन को नई दिशा दे सकता है.

रिपोर्ट के अनुसार, चीन फिलहाल वैश्विक अर्थव्यवस्था में बेहद मजबूत स्थिति रखता है. पीपीपी के आधार पर उसकी हिस्सेदारी दुनिया में सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की सबसे बड़ी चुनौती उसकी घटती आबादी बन सकती है. पिछले कुछ दशकों में चीन की जन्म दर लगातार कम हुई है, जिसका असर आने वाले वर्षों में श्रम शक्ति और उपभोक्ता बाजार पर पड़ सकता है.

दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी

दूसरी तरफ भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी में से एक है. बड़ी कार्यशील जनसंख्या, बढ़ती खपत और तेजी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्था भारत को लंबी अवधि में फायदा पहुंचा सकती है. अगर रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास के क्षेत्रों में लगातार सुधार जारी रहता है, तो भारत की विकास गति और तेज हो सकती है.

हालांकि, रिपोर्ट ने भारत के सामने मौजूद चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया है. आर्थिक असमानता, शिक्षा की गुणवत्ता, स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच और उत्पादकता बढ़ाना ऐसे क्षेत्र हैं जहां अभी काफी काम करने की जरूरत है. विशेषज्ञों का मानना है कि केवल बड़ी आबादी होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस आबादी को कुशल और उत्पादक बनाना भी उतना ही जरूरी है.

चीन ने पिछले कई दशकों में शिक्षा, तकनीक और स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश किया है, जिसका लाभ उसे आर्थिक विकास के रूप में मिला. भारत को भी वैश्विक आर्थिक नेतृत्व हासिल करने के लिए मानव संसाधन विकास पर लगातार निवेश बढ़ाना होगा.

अगर भारत आने वाले सालों में आर्थिक सुधारों की गति बनाए रखता है, विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करता है और रोजगार सृजन पर ध्यान देता है, तो 2060 तक दुनिया की आर्थिक शक्ति का केंद्र एशिया में और अधिक मजबूत हो सकता है. ऐसे में भारत केवल एक बड़ी अर्थव्यवस्था ही नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक नेतृत्व की भूमिका में भी नजर आ सकता है.

रिपोर्ट के अनुसार भारत कब चीन को पीछे छोड़ सकता है?

रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि साल 2060 के आसपास भारत वैश्विक जीडीपी हिस्सेदारी के मामले में चीन को पीछे छोड़ सकता है.

चीन की आर्थिक रफ्तार धीमी पड़ने का प्रमुख कारण क्या बताया गया है?

चीन की घटती आबादी और कम होती जन्म दर को उसकी भविष्य की आर्थिक वृद्धि के लिए बड़ी चुनौती माना गया है.

भारत को आर्थिक बढ़त दिलाने वाले प्रमुख कारक कौन-से हैं?

युवा आबादी, बढ़ता घरेलू बाजार, डिजिटल विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और तेज आर्थिक वृद्धि भारत की सबसे बड़ी ताकत माने जा रहे हैं.

PPP (Purchasing Power Parity) क्या होता है?

PPP एक ऐसा पैमाना है जो यह बताता है कि किसी देश की मुद्रा से वास्तविक रूप से कितनी वस्तुएं और सेवाएं खरीदी जा सकती हैं.

भारत को आर्थिक महाशक्ति बनने के लिए किन क्षेत्रों पर ध्यान देना होगा?

शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, रोजगार सृजन और उत्पादकता बढ़ाने जैसे क्षेत्रों में लगातार सुधार भारत की आर्थिक प्रगति के लिए जरूरी होंगे.

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