नई दिल्लीः कश्मीर मामल में भारत ने चीन पर कड़ा ऐतराज जताया है. भार ने दुनिया भर के देशों से कहा है कि कश्मीर पर भारत सरकार द्वारा लिया गया निर्णय एक आंतरिक मामला है और इस पर किसी दूसरे देश के दखल की जरूरत नहीं है. दरअसल चीन के विदेश मंत्री बांग यी ने यूएन में कश्मीर का मुद्दा उठाते हुए कहा था कि इस मामले को यूएन के चार्टर, सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और द्विपक्षीय ढंग से भारत को हल करना चाहिए. इसके जवाब में भारत ने कड़ा विरोध जताया है.

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भारत ने कहा कि कश्मीर भारत का हिस्सा है इसलिए सरकार को इसके बारे में फैसला लेने का हक है इसलिए किसी दूसरे देश को भारत के आंतरिक मामले में दखल देने की आवश्यकता नहीं है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, ‘हम उम्मीद करते हैं कि सभी देश भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करेंगे और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में गैरकानूनी ढंग से चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के जरिए यथास्थिति को परिवर्तित करने के प्रयासों से बचेंगे.’ उन्होंने कहा चीन भारत के इस रुख से पूरी तरह परिचित है कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न अंग है तथा हाल के घटनाक्रम पूरी तरह से हमारा अंदरुनी मामला है.

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ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि चीन ने कश्मीर के मामले को उठाने का प्रयास किया है लेकिन हर बार भारत ने पूरे विश्व को यही जवाब दिया कि यह भारत का अंदरूनी मामला है. आपको बता दें कि अक्टूबर माह के दूसरे सप्ताह में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत के दौरे पर आ सकते हैं. ऐसी उम्मीद है कि चीन इस ममाले में जरूर पाकिस्तान की तरफ से बात करने की कोशिश करेगा.

इसस पहले शनिवार को भारत ने यूएन महासभा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमराखान के झठे भाषण का भी भारत ने करारा जवाब दिया. संयुक्त राष्ट्र में भारत की प्रथम सचिव विदिशा मैत्रा ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने दुनिया के सबसे बड़े मंच का दुरुपयोग किया है. विदिशा मैत्रा ने कहा आतंकवाद और घृणा फैलाने वाले भाषणों के साथ पाकिस्तान मानवाधिकारों के नए संस्थापक चैंपियन के रूप में वाइल्ड कार्ड खेलने की कोशिश कर रहा है.