दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस ने PUCC यानी प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र को लेकर सख्ती और बढ़ा दी है. इसके बावजूद भी बड़ी संख्या में वाहन चालक नियमों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं. खासतौर पर दोपहिया वाहन चालकों में यह लापरवाही ज्यादा देखने को मिल रही है. आंकड़े बताते हैं कि PUCC न बनवाना, एक्सपायर सर्टिफिकेट के साथ वाहन चलाना और बार-बार नियम तोड़ना अब आदत बनता जा रहा है, जो काफी गंभीर हालात पैदा कर दिए हैं. ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान के तहत अक्टूबर से नवंबर के बीच रिकॉर्ड संख्या में चालान काटे गए हैं, जिससे यह साफ हो गया है कि नियम तोड़ने में कार नहीं, बल्कि बाइक और स्कूटर आगे हैं.
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 14 अक्टूबर से नवंबर के अंत तक दिल्ली में 1.05 लाख से ज्यादा PUCC चालान जारी किए गए. रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से करीब 78 प्रतिशत यानी 82,000 से ज्यादा चालान सिर्फ बाइक और स्कूटर चालकों के थे. इसका मतलब यह है कि हर पांच में से चार मामलों में PUCC नियम तोड़ते हुए दोपहिया वाहन पकड़े गए हैं. इन सबके बीच हैरानी की बात यह है कि PUCC उल्लंघन करने वाले टॉप 5 वाहनों की सूची में एक भी कार शामिल नहीं है. यह साफ संकेत देता है कि दोपहिया वाहन चालक नियमों को हल्के में ले रहे हैं. इतना ही नहीं, कई लोग न तो बीमा कराते हैं, न मलिकाना ट्रांसफर करते हैं और मानते हैं कि नियम सिर्फ कारों पर लागू होते हैं और इसी वजह से लोग सड़क नियमों को नजरअंदाज कर देते हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, 2016 मॉडल Passion Pro शामिल है, जिस पर 47 चालान काटे गए. वहीं 2018 मॉडल Passion Pro पर 38 चालान काटे गए. इसके अलावा 2022 मॉडल Splendor पर 38 चालान काटे गए. वहीं, 2021 मॉडल Yamaha Ray ZR Street Rally पर 35 चालान काटे गए. जिसमें मालिक ने कभी PUCC बनवाया ही नहीं.
PUCC उल्लंघन करने वाले टॉप वाहनों में कई बाइक और स्कूटर शामिल हैं, जिन पर दर्जनों बार चालान काटे जा चुके हैं. कुछ मामलों में वाहन मालिकों ने PUCC कभी बनवाया ही नहीं और फिर भी सालों तक सड़क पर वाहन चलाते रहे. ट्रैफिक पुलिस के अनुसार ऐसे मामलों को अब सामान्य गलती नहीं बल्कि गंभीर लापरवाही माना जा रहा है. ऐसे में जिन वाहनों पर 10 से ज्यादा लंबित चालान हैं, उन्हें आदतन अपराधी की श्रेणी में रखा जा रहा है और ऐसे केस सीधे कोर्ट तक भी पहुंच सकते हैं. इससे साफ है कि बार-बार नियम तोड़ने वालों पर आगे और कड़ी कार्रवाई हो सकती है.
मोटर व्हीकल एक्ट 1988 की धारा 190(2) के तहत सार्वजनिक सड़क पर चलने वाले हर वाहन के पास वैध PUCC होना जरूरी है. नया वाहन एक साल बाद PUCC बनवाता है, जबकि पुराने वाहनों को हर छह महीने में इसे रिन्यू कराना होता है. 2019 से पहले PUCC न होने पर जुर्माना 2,000 रुपये तक सीमित था, लेकिन कानून में बदलाव होने के बाद पहली बार में 10,000 रुपये तक जुर्माना, लाइसेंस जब्ती और जेल तक का प्रावधान है. इसी के साथ दोबारा उल्लंघन पर जुर्माना 20,000 रुपये तक पहुंच सकता है. दिल्ली में यह नियम ई-चालान के जरिए सख्ती से लागू किया जा रहा है, ताकि प्रदूषण पर जल्द से जल्द कंट्रोल किया जा सके.
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