भारत और अमेरिका के बीच साजो-सामान के विनिमय पर सिद्धांतत: मंगलवार को हुए समझौते के तहत दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के सामान, अड्डे का इस्तेमाल कर सकेंगी। इस मुद्दे को लेकर पिछली संप्रग सरकार के समय समझौता नहीं हो पाया था। अमेरिकी पक्ष ने लॉकहीड मार्टिन और बोइंग द्वारा लड़ाकू विमानों के संयुक्त उत्पादन पर भी जोर दिया है।Also Read - अगले लोकसभा चुनाव को लेकर बोले रामदास अठावले, '2024 में खेला नहीं सत्ता के लिए मोदी का मेला होगा'

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अमेरिकी रक्षा मंत्री एश्टन कार्टर ने यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान यह बात कही। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की और दक्षिण एशिया तथा एशिया प्रशांत क्षेत्र समेत क्षेत्रीय हालात पर विचारों का आदान-प्रदान किया। यह भी पढ़े-नई रक्षा खरीद नीति में पारदर्शिता पर जोर: पर्रिकर Also Read - दिलीप घोष बोले- ममता बनर्जी 'भीख' के लिए PM मोदी से मिलना चाहती हैं, TMC ने कहा- जाहिलों जैसी बात न करें

रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर और भारत के दौरे पर आए अमेरिका के रक्षा मंत्री एश्टन कार्टर ने स्पष्ट किया कि समझौते पर आगामी कुछ हफ्ते या महीने के अंदर दस्तखत हो जाएगा।

इस समझौते से जुड़ी 10 खास बातें।

1-भारत और अमेरिका दोनों ने नौवहन की स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कानून की जरूरत पर बल दिया है। दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती दखलअंदाजी को देखते हुए संभवत: ऐसा किया गया है।

2- कार्टर ने कहा, अगर इस तरह की कोई स्थिति बनती है इससे सहयोग मिलेगा। साजो सामान अभियान का बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह मामला दर मामला होगा। उन्होंने कहा कि समझौते से जुड़े सभी मुद्दों का समाधान हो गया है। यह भी पढ़े-पठानकोट हमला: रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर ने हमले पर दिया बयान

3- दोनों देशों ने स्पष्ट किया है कि दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के सामान और अड्डे का इस्तेमाल करेंगी, इसका मतलब भारत की धरती पर अमेरिकी सैनिकों की तैनाती नहीं है।

4- साउथ ब्लॉक में प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद दोनों देशों ने पनडुब्बी से संबंधित मुद्दों को कवर करने के लिए नौसेना स्तर की वार्ता को मजबूत करने का निर्णय किया। दोनों देश निकट भविष्य में व्हाईट शिपिंग समझौता कर समुद्री क्षेत्र में सहयोग को और बढ़ाएंगे।

5- भारत और अमेरिका रक्षा वाणिज्य एवं प्रौद्योगिकी पहल के तहत दो नयी परियोजनाओं पर सहमत हुए हैं। इसमें सामरिक जैविक अनुसंधान इकाई भी शामिल है।

6- प्रस्तावित समक्षौते के बारे में पर्रिकर ने कहा कि मानवीय सहायता जैसे नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप के समय अगर उन्हें ईंधन या अन्य सहयोग की जरूरत होती है तो उन्हें ये सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। यह भी पढ़े-मोदी की पाक को चेतावनी, कहा- पठानकोट के दोषियों पर होगी कार्रवाई

7- द्विपक्षीय रक्षा समझौते को मजबूती देते हुए दोनों पक्ष अपने-अपने रक्षा विभागों और विदेश मंत्रालयों के अधिकारियों के बीच मैरीटाइम सिक्योरिटी डायलॉग स्थापित करने को राजी हुए हैं।

8- अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि साजो सामान समझौते से दोनों देशों की सेनाओं को बेहतर तरीके से समन्वय करने में सहयोग मिलेगा, जिसमें अभ्यास भी शामिल है और दोनों एक दूसरे को आसानी से ईंधन बेच सकेंगे या भारत को कल पुर्जे मुहैया कराए जा सकेंगे।

9- दो अन्य समझौते हैं- संचार और सूचना सुरक्षा समझौता ज्ञापन तथा बेसिक एक्सचेंज एंड कोऑपरेशन एग्रीमेंट।

10- पहले भारत का मानना था कि साजो-सामान समझौते को अमेरिका के साथ सैन्य गठबंधन के तौर पर देखा जाएगा। बहरहाल एलएसए के साथ भारत हर मामले के आधार पर निर्णय करेगा। एलएसए तीन विवादास्पद समझौते का हिस्सा था, जो अमेरिका भारत के साथ लगभग एक दशक से हस्ताक्षर करने के लिए प्रयासरत था।

प्रधानमंत्री कार्यालय के एक बयान के अनुसार, ‘मंत्री कार्टर ने कहा कि अमेरिका भारत को करीबी रणनीतिक सहयोगी और स्थाई साझेदार के तौर पर देखता है और दोनों पक्ष खरीदार-विक्रेता संबंध से निर्माण साझेदारी की ओर बढ़ रहे हैं।’ इसमें कहा गया, ‘कार्टर ने कहा कि अमेरिका की ‘पुन:संतुलन’ की नीति तथा भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति एक दूसरे का सम्मान करती हैं।’