नई दिल्ली: उत्तर और पश्चिम भारत के कई राज्यों में बारिश होने के कारण लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली. बारिश के कारण शनिवार को पारा सामान्य स्तर से नीचे रहा. उत्तर प्रदेश में बारिश से जुड़ी घटनाओं में 13 लोगों की मौत हो गई. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, वर्धा (विदर्भ) में देश का सबसे अधिक तापमान 42.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. Also Read - मुंबई: कोरोना महामारी के चलते इस साल स्थापित नहीं की जाएगी लाल बाग के राजा की मूर्ति

महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र के चंद्रपुरा में शुक्रवार को अधिकतम तापमान 45.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था. राष्ट्रीय राजधानी में आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहने से पारा नीचे रहा और रविवार को भी ऐसे ही हालात बने रहने के आसार हैं. सफदरजंग वेधशाला ने शनिवार को अधिकतम तापमान सामान्य से छह डिग्री कम 34.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया जबकि शुक्रवार को यह 37 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था. न्यूनतम तापमान सामान्य से पांच डिग्री कम 22.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. Also Read - Unlock 2: यूपी में स्कूल 31 जुलाई तक बंद, मेरठ मंडल में रात आठ से सुबह छह तक कर्फ्यू

मौसम विभाग के अनुसार आठ जून से पहले दिल्ली में लू जैसी स्थिति नहीं रहने संभावना है. मौसम विभाग ने कहा कि अगले कुछ दिनों में देश में अधिकतम तापमान में बहुत अधिक वृद्धि होने की उम्मीद नहीं है. Also Read - एक ग्रुप के लोगों ने की थी छेड़छाड़, तंग आकर 8वीं की छात्रा ने की सुसाइड

विभाग ने अपने दैनिक बुलेटिन में कहा, ‘‘पूरे देश में अलग-अलग स्थानों और बिहार में तापमान में गिरावट की प्रवृत्ति देखी जा रही है.’’ अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि उत्तर प्रदेश के उन्नाव और कन्नौज जिले में बारिश और आंधी/तूफान से संबंधित घटनाओं में कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई. उन्नाव में आठ लोगों की, जबकि कन्नौज में पांच लोगों की मौत हो गई.

ठठिया थाना के प्रभारी विजय बहादुर वर्मा ने बताया कि 10 से अधिक पेड़ उखड़ गए और कई घरों को नुकसान पहुंचा है. लखनऊ में अधिकतम तापमान सामान्य से चार डिग्री कम 35.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि 57.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. मौसम विभाग के अनुसार, कानपुर (54.6 मिमी), हरदोई, (4.2 मिमी), फुर्सतगंज (3.2 मिमी), शाहजहाँपुर (1.4 मिमी) और आगरा (1.0 मिमी) में बारिश दर्ज की गई.

मौसम में आए बदलाव से राजस्थान के कई इलाकों में आंधी आई और बारिश हुई है. इससे कई दिन से भीषण गर्मी से परेशान लोगों को कुछ राहत मिली है. मौसम विभाग के अनुसार पिछले 24 घंटों में राज्य के अनेक हिस्सों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश दर्ज हुई है. विभाग के अनुसार सर्वाधिक बारिश डीग भरतपुर में 64.0 मिमी दर्ज की गयी. इसके अलावा नोहर, हनुमानगढ़ में भी 64.0 मिमी दर्ज हुई है.

मौसम में आए बदलाव से राज्य में तापमान में भी 3-4 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज हुई है. शनिवार को अधिकतम तापमान कोटा में 42 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. वहीं वहीं चुरू में यह 36.05 डिग्री सेल्सियस रहा. बीकानेर में अधिकतम तापमान 37.0 डिग्री सेल्सियस, श्रीगंगानगर में 32.8 डिग्री, जैसलमेर में 40.6 डिग्री, बाड़मेर 40.8 डिग्री, जयपुर में 35.2 डिग्री, अजमेर में 35.0 डिग्री व जोधपुर में 38.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया.

मौसम विभाग के प्रवक्ता के अनुसार वायुमंडल के निचले स्तर में पूर्वी हवाओं के पश्चिमी विक्षोभ के साथ मिलने तथा अरब सागर से उच्च मात्रा में नमी प्रवाहित होने के कारण राजस्थान में आगामी तीन चार दिन तेज आंधी आने, बारिश होने व हवाएं चलने का अनुमान है.

पंजाब और हरियाणा के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश के साथ अधिकतम तापमान सामान्य सीमा से नीचे रहा. दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी चंडीगढ़ में अधिकतम तापमान सामान्य से छह डिग्री कम 32.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया.

हरियाणा के करनाल में अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि अंबाला में अधिकतम तापमान 33.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से छह डिग्री कम है.

हिसार (36 डिग्री सेल्सियस), नारनौल (35.8 डिग्री सेल्सियस) और भिवानी (35.7 डिग्री सेल्सियस) में सामान्य से कम अधिकतम तापमान दर्ज किया गया. पंजाब में लुधियाना, पटियाला और अमृतसर में अधिकतम तापमान सामान्य से कम क्रमश: 35.3 डिग्री सेल्सियस, 34.3 डिग्री सेल्सियस और 31.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया.

इस बीच, शनिवार को लखनऊ में जारी एक बयान में, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य में बिजली गिरने और आंधी से लोगों की मौत पर दुख व्यक्त किया. बयान में कहा गया है कि मृतकों में से प्रत्येक के परिजनों को 4-4 लाख रुपये और घायलों को पर्याप्त चिकित्सा मुहैया कराने के निर्देश दिए गए हैं.

मौसम पूर्वानुमान बताने वाली निजी एजेंसी ‘स्काइमेट वेदर’ ने शनिवार को अपने तय समय से पहले केरल में दक्षिण-पश्चिम मानसून के पहुंचने की घोषणा की लेकिन देश के आधिकारिक भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने कहा कि फिलहाल परिस्थितियां ऐसी घोषणा करने के अनुकूल नहीं हैं.

स्काइमेट के कार्यकारी अधिकारी जतिन सिंह ने कहा कि सभी परिस्थितियां जैसे वर्षा, ओएलआर वैल्यू और वायु की गति उस अनुकूल स्थिति में पहुंच चुकी हैं, जिससे केरल में दक्षिण-पश्चिम मानसून के पहुंचने की घोषणा की जा सके. ओएलआर मुख्य रूप से पृथ्वी की सतह, समुद्र और वायुमंडल द्वारा अंतरिक्ष में उत्सर्जित ऊर्जा की मात्रा का एक माप है.

निजी मौसम अनुमान एजेंसी ने ट्वीट किया, ‘ आखिरकार दक्षिण-पश्चिम मानसून भारत पहुंच गया. मानसून तय समय से पहले ही केरल पहुंच गया. सभी परिस्थितियां जैसे वर्षा, ओएलआर वैल्यू और वायु की गति मानसून के दस्तक देने के अनुकूल हैं. आखिरकार, भारतीयों के लिए चार महीने लंबा उत्सव शुरू हुआ.’

केरल में मानसून की दस्तक देश में चार महीने की बारिश के मौसम की शुरुआत होती है. देश में जून से सिंतबर के बीच 75 प्रतिशत वर्षा होती है. स्काइमेट ने अनुमान जताया था कि केरल में मानसून 28 मई को दस्तक देगा और साथ ही इसके पहुंचने में दो दिन पहले अथवा बाद का अनुमान जताया गया था.

जबकि, आईएमडी ने अनुमान जताया था कि केरल में मानसून अपने तय समय से चार दिन देरी से पांच जून को दस्तक देगा. हालांकि, इस सप्ताह की शुरुआत में इसने कहा था कि बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवात के कारण केरल में मानसून एक जून तक पहुंच सकता है जोकि आमतौर पर इसके पहुंचने का समय है. आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि फिलहाल परिस्थितियां केरल में मानसून पहुंचने की घोषणा करने के अनुकूल नहीं हैं.