क्या है चीन का रोबोट विवाद? जिसे लेकर गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने करा ली अपनी इंटरनेशनल बेइज्जती
गलगोटिया यूनिवर्सिटी में AI इंजीनियरिंग कोर्स की पढ़ाई होती है. इस यूनिवर्सिटी ने इंडिया AI एक्सपो में हिस्सा लिया था. यूनिवर्सिटी ने AI पर 350 करोड़ रुपये से ज्यादा का दावा करते हुए एक्सपो में एक AI रोबोडॉग को दिखाया था. इस रोबो-डॉग को लेकर विवाद हो गया है.
यूनिट्री Go2 AI पावर्ड रोबोटिक डॉग है. इसे चीन की यूनिट्री रोबोटिक्स कंपनी ने डेवलप किया है. (AP)
दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे IndiaAI Expo को जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है. लेकिन, इस दौरान भारत की एक जानी-मानी यूनिवर्सिटी की इंटरनेशनल बेइज्जती हो गई है. असल में ग्रेटर नोएडा स्थित गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने चीनी रोबोट और ड्रोन को अपना प्रोजेक्ट बताकर AI एक्सपो में प्रोजेक्ट किया था. झूठ पकड़े जाने के बाद IndiaAI Expo से गलगोटिया यूनिवर्सिटी के स्टाफ और अधिकारियों को बाहर निकाल दिया गया है. आयोजकों ने यूनिवर्सिटी के पवेलियन की पहले बिजली काटी, फिर ताला लगाकर बेरीकेडिंग कर दी है.
आइए समझते हैं क्या है पूरा मामला? चीन के किस रोबोट पर को गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने अपना बताया था? यूनिवर्सिटी से गलती कहां हुई? इसके आगे जाकर क्या नतीजे हो सकते हैं:-
कहां स्थित है गलगोटिया यूनिवर्सिटी?
गलगोटिया यूनिवर्सिटी(Galgotias University) एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी है. ये दिल्ली-NCR में ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 17A में बनी है. इस यूनिवर्सिटी के सामने यमुना एक्सप्रेसवे और इंटरनेशनल बुद्धा सर्किट पड़ता है. ऑफिशियल वेबसाइट के मुताबिक, इसकी स्थापना साल 2011 में हुई थी. ये यूनिवर्सिटी 20 अलग-अलग स्कूलों के जरिए डिप्लोमा से लेकर PhD तक के 200 से ज्यादा कोर्स कराती है. सुनील गलगोटिया यूनिवर्सिटी के चांसलर हैं, जबकि उनके बेटे ध्रुव गलगोटिया यूनिवर्सिटी के CEO हैं. फिलहाल इस यूनिवर्सिटी में 17,480 स्टूडेंट इनरोल हैं.
क्या है विवाद?
गलगोटिया यूनिवर्सिटी में AI इंजीनियरिंग कोर्स की पढ़ाई होती है. इस यूनिवर्सिटी ने इंडिया AI एक्सपो में हिस्सा लिया था. गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने AI पर 350 करोड़ रुपये से ज्यादा का दावा करते हुए एक्सपो में एक AI रोबोडॉग को दिखाया था. वीडियो में यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह कह रही हैं कि इस रोबोटिक डॉग का नाम 'ओरियन' है. इसे गलगोटिया यूनिवर्सिटी के 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' ने तैयार किया है. लेडी प्रोफेसर ने ये भी कहा कि यूनिवर्सिटी AI सेक्टर में 350 करोड़ रुपये का इंवेस्टमेंट कर रही है. वहीं, सोशल मीडिया पर यूनिवर्सिटी की सारी पोल-पट्टी खुल गई.
वायरल वीडियो में क्या है?
ओरियन का वीडियो कई सोशल मीडिया पर कई टेक एक्सपर्ट ने शेयर किया. उन्होंने यूनिवर्सिटी के दावों को झूठा बताया. टेक एक्सपर्ट्स के मुताबिक, रोबोडॉग असल में चीन की प्रॉपर्टी है. चीनी कंपनी 'यूनिट्री' ने ये Go2 मॉडल बनाया था. ये मार्केट में 2-3 लाख रुपये में उपलब्ध है. चीन के रोबोट मैन्युफैक्चरिंग के कई और वीडियोज भी शेयर किए गए. एक दूसरे वीडियो में यूनिवर्सिटी जिस ड्रोन को कैंपस में 'शुरुआत से' तैयार करने का दावा कर रही हैं, उसे यूजर्स ने 40,000 रुपये वाला रेडीमेड 'स्ट्राइककर V3 ARF' मॉडल बताया है.
ये 'यूनिट्री' का Go2 मॉडल है क्या?
यूनिट्री Go2 AI पावर्ड रोबोटिक डॉग है. इसे चीन की यूनिट्री रोबोटिक्स कंपनी ने डेवलप किया है. ये रोबोटिक डॉग एडवांस सेंसर्स के लिए दुनियाभर में मशहूर है. चीन की कंपनी ने इसे डेवलप करने में 4D LiDAR टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया है. इसकी मदद से ये रोबो-डॉग सीढ़ियां चढ़ सकता है, ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर दौड़ सकता है और अपने रास्ते में आने वाली बाधाओं को पहचान सकता है.
इसकी कितनी कीमत?
मार्केट में इस रोबो-डॉग की कीम 2 से 3 लाख रुपये है. ये रोबोट डॉग वॉयस कमांड पर भी काम करता है.
फजीहत के बाद यूनिवर्सिटी का यू-टर्न
पूरे मामले में बेइज्जती होने के बाद आखिरकार गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने अपनी गलती मानी. गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने अपने बयान में कहा- "हमने लगातार कैंपस में बेहतरीन टेक्नोलॉजी लाने की कोशिश की है. क्योंकि जब युवा नई चीजें देखते हैं, तभी उनकी सोच डेवलप होती है. और यही सोच नए क्रिएटर्स को जन्म देती है. यूनिट्री से लिया गया रोबोटिक डॉग इसी सफर का एक हिस्सा है."
अपनी सफाई में यूनिवर्सिटी ने कहा, "हम यह साफ कर देना चाहते हैं कि गलगोटिया ने यह रोबोटिक डॉग नहीं बनाया है. न ही हमने कभी ऐसा दावा किया है. हम ऐसे दिमाग तैयार कर रहे हैं, जो जल्द ही भारत में ऐसी ही टेक्नोलॉजी को डिजाइन करेंगे. उनकी इंजीनियरिंग करेंगे और उन्हें यहीं बनाएंगे. ये सिर्फ दिखाने के लिए रखी गई कोई मशीन नहीं है, यह एक चलता-फिरता क्लासरूम है. हमारे छात्र इस पर प्रयोग कर रहे हैं, इसकी क्षमताओं को परख रहे हैं. इस प्रक्रिया में अपना ज्ञान बढ़ा रहे हैं."
यूनिवर्सिटी ने नहीं बनाया, तो प्रोफेसर ऐसा क्यों बोली?
इस बारे में गलगोटिया यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह का बयान भी सामने आया. उन्होंने कहा, "विवाद इसलिए बढ़ा, क्योंकि शायद सारी बातें साफ तौर पर नहीं रखी गईं. मैं इसकी जिम्मेदारी लेती हूं. सबकुछ जोश-जोश में हो गया."
गलगोटिया यूनिवर्सिटी से गलती कहां हुई?
AI और रोबोटिक्स जैसे सब्जेक्ट बहुत संवेदनशील होते हैं. इनपर किए गए झूठे दावे चुटकियों में पकड़ने में आ जाते हैं. खासतौर पर जब सबकुछ इंटरनेट पर एक क्लिक में मौजूद है. गलगोटिया यूनिविर्सिटी ने अपने प्रमोशन और मार्केटिंग के चक्कर में इन बातों को नजरअंदाज किया. बस गलती यहीं हो गई.
इसके क्या नतीजे हो सकते हैं?
ये कोई मामूली नहीं, बल्कि बहुत बड़ी गलती है. खासकर जब मामला राष्ट्रीय मंच या अंतरराष्ट्रीय एक्सपो से जुड़ा हो. वैसे अब तक इस मामले में कोई ऑफिशियल ऑर्डर नहीं आया है. लेकिन, यूनिवर्सिटी के इस विवाद ने एजुकेशन और ऐसी यूनिवर्सिटी की साख पर सवालिया निशान जरूर लगा दिए हैं.
ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें मनोरंजन की और अन्य ताजा-तरीन खबरें