नई दिल्ली। जी मीडिया के India ka DNA 2019 कार्यक्रम में बीजेपी नेता राम माधव ने कई सवालों पर बेबाक राय सामने रखी. जम्मू कश्मीर में पीडीपी से गठबंधन तोड़कर सरकार से अलग होने के पीछे का कारण भी उन्होंने बताया. राम माधव ने 2019 के चुनाव में पार्टी संभावनाओं पर कहा कि जनता एक बार फिर मोदी जी को चुनेगी. राम माधव ने आरएसएस, प्रणब मुखर्जी की संघ कार्यक्रम में शिरकत सहित कई और सवालों के भी बेबाक जवाब दिए. राम माधव ने कहा कि सरकार धारा 370, समान नागरिक संहिता और राम मंदिर के मुद्दे पर कायम है और रहेगी.

देशहित का दिया हवाला

इस सवाल के जवाब में कि सब जानना चाहते हैं कि जम्मू कश्मीर सरकार से हटने की वजह क्या थी? राम माधव ने कहा, हमारे बीच असहजता थी, धीरे धीरे बढ़ने लगी थी. पाकिस्तान से बात करना, सीजफायर का मुद्दा. हमें देशहित महत्वपूर्ण लगा इसलिए सरकार से बाहर आ गए. इसे लेकर पार्टी और सरकार में जितनी भी चर्चा चली, हमने चुनाव के धरातल पर बिल्कुल चर्चा नहीं की थी. केवल राष्ट्रहित और वहां की जनता के लिए ये फैसला लिया. पिछले तीन साल में कभी ऐसा कर सकते थे. तीन साल में कई बार दबाव का मौका आया, जैसे एक कर्नल पर एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी. लेकिन हमने तब ऐसा नहीं किया था.

भारत सरकार ने सीजफायर पर निर्णय लिया, लेकिन कमजोरी से नहीं लिया. कश्मीर की जनता जिनके लिए रमजान पवित्र महीना होता है, उनके लिए माहौल शांतिपूर्ण रहे इसलिए सीजफायर का फैसला लिया. हमने गुडविल संदेश दिया. लेकिन इसका जो नतीजा आया वह सही नहीं थी. वहां के अलगाववादी एक कदम आगे बढ़कर बातचीत करते. राजनीतिक सक्रियता बढ़ती, वो सब नहीं हुआ, फ्रीडम ऑफ स्पीच का खतरा पैदा हो गया. पत्रकार शुजात बुखारी को बीच शहर में आकर मार दिया गया. सब कुछ रूक गया था. इसलिए फैसला लेना पड़ा कि सरकार से अलग हो जाएं.

पीडीपी के साथ क्यों बनाई सरकार?

पीडीपी से साथ होकर इतना जोखिम कैसे उठाया? इस सवाल पर राम माधव ने कहा, भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा नहीं हुआ. पहले भी विपरीत ध्रुव के दल मिले हैं. अपवित्र कौन है, बीजेपी या पीडीपी. ये अपनेआप में गलत प्रश्न है. हमारे यहां रेनबो शेड्स होता है. अटलजी ने गठबंधन सरकार चलाई. हमने कुछ मुद्दों को फ्रीज में रखा. राम मंदिर का मुद्दा दूर रखा. ऐसा करना जरूरी था. यही लोकतंत्र की ब्यूटी है. जम्मू कश्मीर में जनादेश को देखते हुए सरकार बनाई. वीपी सिंह की सरकार हमने देखी है कि कैसे अलग विचारों वाले दल आपस में मिले. तो ये सवाल ही गलत है कि दो अलग विचार वाले दलों ने सरकार कैसे बनाई.

बीजेपी-पीडीपी के मंत्रियों में कोई झगड़ा नहीं था. एक कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के तहत सरकार आगे बढ़ रही थी. आतंकवाद सहित दूसरे मुद्दे पर हम साथ चल रहे थे. पर कुछ महीनों से हमारे साथी दूर हट रहे थे. तब देशहित में हमने फैसला लिया. गठबंधन को मैनेज करना मुश्किल होता है. हमने तीन साल सरकार चलाई. कुछ चीजें हुईं जो हम नहीं चाहते थे, पर हुई. कर्नल पर एफआईआर हुई, इसका हमने विरोध किया. आगे कार्रवाई नहीं हुई. बहुत सी चीजें हम नहीं कर पाए. सरकार ने करोड़ों का पैकेज दिया, इसका सिर्फ एक तिहाई खर्च हुआ. पॉलिटिकल एक्टीविटी नहीं हो रही थी. इससे आतंकवाद का रास्ता खुल गया. ऐसे मुद्दे पर हम अपने साथी से संतुष्ट नहीं थे
हमारे एजेंडा में प्राथमिकताएं हमेशा रहेगी-आखिरी आतंकवादी को खत्म करेंगे, -विभिन्न वर्गों से बातचीत की प्रक्रिया जारी रहेगी और विकास की प्रक्रिया तेजी से जारी रहेगी.

कांग्रेस पर ली चुटकी

कांग्रेस पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, कांग्रेस के आजाद साहब ने बयान दिया कि हम पीडीपी के साथ सरकार नहीं बनाएंगे. लेकिन याद कीजिए तीन साल पहले रोज पीडीपी को लव लेटर लिख रहे थे कि हम आपस में सरकार बनाएंगे एनसी को साथ लेकर. लेकिन आज अछूत कैसे हो गई पता नहींं.

धारा 370 और यूनिफॉर्म सिविल कोड
धारा 370 के सवाल राम माधव ने कहा- धारा 370 जैसे कुछ मुद्दे पर फैसला लेने का अधिकार संसद का है जिसमें दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है. लोकसभा में हमारा बहुमत है लेकिन राज्यसभा में ऐसा नहीं है. एक साथी आता है तो दूसरा भाग जाता है. हम इस स्थिति में नहीं है, लेकिन हमने ये मुद्दा नहीं छोड़ा है. अगर राज्य में हम सरकार बनाना चाहते हैं तो कुछ मुद्दों पर सहमत होना होगा. इसलिए हमने 370 के मुद्दे को नहीं छेड़ा, इसे संसद पर छोड़ दिया. यूनिफॉर्म सिविल कोड के सालों पुराने एजेंडे पर उन्होंने कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड की दिशा में हम तीन तलाक के मामले में आगे बढ़े थे. राम मंदिर का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में है. तीन जुलाई को इस पर सुनवाई होनी है. उस पर फैसला आए तो समाधान मिल जाएगा. धारा 370 के लिए हमें प्रतीक्षा करनी पड़ेगा.

2019 की संभावनाएं
बीजेपी सरकार दोबारा आए इसके लिए मोदी जी, अमित शाह मेहनत कर रहे हैं. राहुल गांधी भी मेहनत कर रहे हैं. मोदीजी के विकल्प में एक अपवित्र महागठबंधन सामने है. फ्रंट टेंट जो भी बने मोदी जी के विकल्प के रूप में कोई सामने नहीं है इसलिए हम मानते हैं कि जनता एक बार फिर हमें मौका देगी. 2014 में हम देश के सामने मोदी जी के नेृतृत्व और कर्तृत्व को सामने रखते हुए जनता के सामने गए थे. 2019 में फिर इसी के साथ जनता के सामने जाएंगे. पूरी उम्मीद है कि जनता का फिर आशीर्वाद मिलेगा. रणनीति की तो यहां चर्चा नहीं की जा सकती.

आरएसएस के कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी 

आरएसएस के कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के शिरकत करने के सवाल पर राम माधव ने कहा कि आरएसएस ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को बुलाया इसके राजनीतिक अर्थ नहीं तलाशने चाहिए. आरएसएस ने न्योता दिया और वह आए. इसी तरह वह राहुल गांधी की इफ्तार पार्टी में भी तो गए थे.आरएसएस का कोई शत्रु नहीं होता है. सबको मित्र बनाने का आरएसस का इरादा होता है.