नई दिल्ली: जम्मू कश्मीर के लोगों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कथित रूप से अस्वीकार किये जाने के विरोध में पद से त्यागपत्र देने वाले भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी के गोपीनाथन ने सोमवार को कहा कि वह दोबारा ड्यूटी शुरू नहीं करना चाहते हैं और राष्ट्र के समक्ष उत्पन्न खतरों के बारे में लोगों को जागरूक करते रहेंगे.

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गौरतलब है कि उनके इस्तीफे को लगभग तीन महीने हो चुके हैं और इसे स्वीकार किया जाना अभी बाकी है. एक इंटरव्यू में बातचीत करते हुए 33 साल के इस अधिकारी ने कहा, ‘‘भारतीय प्रशासनिक सेवा के पद से मैं पहले ही इस्तीफा दे चुका हूं, मैं दोबारा ड्यूटी पर नहीं जाना चाहता हूं. यह वास्तविक रूप से बेकार है. मुझे इसकी परवाह नहीं है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह आवश्यक नहीं है कि मैं प्रशासनिक सेवा का अधिकारी रहते हुए ही लोगों की सेवा करूंगा.’’

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वहीं इसी बीच, जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल जी सी मुर्मू ने सोमवार को कहा कि निवेशक शिखर सम्मेलन जल्द ही आयोजित किया जायेगा ताकि इस केन्द्र शासित प्रदेश के विकास और युवाओं के वास्ते रोजगार के अवसरों को पैदा करने के लिए यहां निवेश आकर्षित किया जा सके. अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को हटाये जाने के बाद पहले इस सम्मेलन को टाल दिया गया था. मुर्मू ने कहा कि जम्मू और कश्मीर के युवाओं के लिए लगभग 30,000 से 40,000 रोजगार के अवसर पैदा होंगे. उन्होंने निवेशक सम्मेलन को सफल बनाने के लिए लोगों का सहयोग मांगा.