नई दिल्ली: मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) तीनों सेनाओं द्वारा शान्ति के समय किया जा रहा सबसे जरूरी और बड़ा काम होता है, चाहे बाढ़ हो या किसी और तरीके की आपदा, देश आपदा राहत के लिए जल, थल और वायु सेना पर निर्भर है. जलवायु परिवर्तन को देखते हुए भारतीय वायुसेना ने तकनीकी सोच रखने वालों को बढ़ावा देने और उनके नवोन्मेषी क्षमता का लाभ उठाने के लिहाज से ड्रोन विकसित करने और डिजाइन करने के लिए प्रतियोगिता आयोजित करने वाली है. Also Read - फ्रांस से 3 और राफेल मिलने से भारत के पास अब 14 ऐसे फाइजर्स जेट, बढ़ी IAF की हमला करने की क्षमता

आपदा राहत के लिए ड्रोन उपयुक्त
वायुसेना की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार जिन परिस्थितियों में आपदा राहत का काम किया जाता है, उनमें ड्रोन बहुत सहायता दे सकते हैं. इस प्रतियोगिता का उद्देश्य ऐसे मानवरहित हवाई यान (UAV) विकसित करना है, जो वायुसेना को मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) के कार्यों में सहायता दे सकें. Also Read - Airforce की बढ़ेगी ताकत- 83 Tejas लड़ाकू विमानों की खरीद को सरकार की मंजूरी; 48,000 करोड़ की आएगी लागत

final3_1Also Read - AK vs AK में वर्दी पहने नज़र आए अनिल कपूर, वायुसेना ने की सीन हटाने की मांग

10 दिसम्बर तक हो जाएं तैयार
बुधवार को प्रेस वार्ता में वायुसेना प्रमुख बी. एस. धनोआ ने इस प्रतियोगिता की घोषणा की. संवाददाता सम्मेलन में वायुसेना प्रमुख ने कहा कि, भारतीय वायु सेना ड्रोन विकसित करने और डिजाइन करने के लिए प्रतियोगिता शुरू करने वाली है. यह प्रतियोगिता कई चरणों में आयोजित की जाएगी. पहले चरण की तारीख 10 दिसम्बर निर्धारित की गई है.

final2

बाबा मेहर सिंह ने रचा था इतिहास
इस प्रतियोगिता का नाम “बाबा मेहर सिंह प्रतियोगिता” होगा. एयर कमोडोर बाबा मेहर सिंह ने दूसरे विश्व युद्ध के समय विलक्षण साहस का परिचय देते हुए इतिहास रचा था. उनके अद्भुत सेवा भाव की वजह से ही उन्हें बाबा मेहर सिंह कहा जाता है. यह प्रतियोगिता भारतीय वायु सेना के महान योद्धा के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी.