surveillance with Heron Mark-I UAV along LAC in Arunachal sector to counter any Chinese misadventure मीसामारी (तेजपुर): भारत ने अरूणाचल प्रदेश सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास दिन और रात में निगरानी काफी बढ़ा दी है और चीन के किसी भी दुस्साहस से निपटने के लिए इसने विशिष्ट विमानों एवं अन्य युद्धक सामग्री की तैनाती की है. असम के मिसामारी सेक्टर में सीमा में एक विमानन स्क्वाड्रन में काम कर रहे भारतीय सेना के एक हेरॉन मार्क 1 मानव रहित हवाई वाहन (Heron Mark 1 Unmanned Aerial Vehicle) ड्रोन को चीन पर निगरानी के लिए तैनात किया गया है. यह जानकारी रविवार को सेना के अधिकारियों ने दी है.Also Read - भारत में ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने वाला पहला छोटे कद का शख्‍स, ऊंचाई सिर्फ 3 फीट

असम के भारतीय सेना के एविएशन बेस में मेजर कार्तिक गर्ग ने बताया हेरॉन मार्क-I मानवरहित हवाई वाहन (यूएवी) 30,000 फीट तक ऊंचाई तक उड़ सकता है और जमीन पर कमांडर को फीड देते रह सकता है. ताकि हम जमीनी बलों को तैनाती कर सकें. इसमें लगातार 24-30 घंटे तक उड़ान भरने की क्षमता है.  पिछले वर्ष गलवान घाटी में दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने के बाद भारत ने करीब 3400 किलोमीटर लंबी एलएसी के पास संपूर्ण तैनाती में बढ़ोतरी की है. इसके अलावा यह आधारभूत सुविधाओं का भी विकास कर रहा है. Also Read - दक्षिण अफ्रीका दौरे पर केवल टेस्ट और वनडे मैच खेलेगी टीम इंडिया, टी20 सीरीज को लेकर फैसला बाद में: जय शाह

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इजराइल निर्मित हेरोन मध्यम ऊंचाई वाले और लंबे समय तक उड़ान भर सकने वाले ड्रोन एलएसी के पास पहाड़ी क्षेत्रों में चौबीसों घंटे निगरानी कर रहे हैं और महत्वपूर्ण आंकड़े एवं चित्र कमान एवं नियंत्रण कक्षों को भेज रहे हैं. ड्रोन के साथ ही भारतीय सेना की विमानन शाखा ने क्षेत्र में उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर रूद्र की तैनाती की है, जिससे क्षेत्र में इसका मिशन और तीव्र हुआ है.

सेना ने इस वर्ष इस क्षेत्र में एक स्वतंत्र विमानन ब्रिगेड बनाई है ताकि संवेदनशील क्षेत्र में संपूर्ण संचालनात्मक तैयारियों को मजबूती दे सके.  हेरोन ड्रोन सबसे पहले क्षेत्र में करीब चार-पांच वर्ष पहले तैनात किए गए थे, और अब निगरानी को ‘सेंसर टू शूटर’ योजना के तहत और बढ़ाया गया है ताकि किसी भी संभावित अभियान के लिए सैन्य बल की त्वरित तैनाती की जा सके.

एएलएच हेलीकॉप्टर के डब्ल्यूएसआई संस्करण की तैनाती से सेना को ऊंचे इलाकों में विभिन्न मिशन के लिए और लाभ मिला है. एएलएच हेलीकॉप्टर पर तैनात हथियारों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने विस्तार से जानकारी देने से इंकार कर दिया, लेकिन कहा कि यह बेहतरीन है और विरोधी के खिलाफ काफी प्रभावी होगा.

घटनाक्रम से जुड़े एक अधिकारी ने बताया, ” पिछले वर्ष की तुलना में हमारे दिन एवं रात की निगरानी क्षमता में काफी बढ़ोतरी हुई है और क्षेत्र में किसी भी घटना से निपटने में हम काफी बेहतर स्थिति में हैं.” भारतीय सेना इजराइल से हेरोन टीपी ड्रोन का एक बेड़ा भी लीज पर ले रही है जो 35 हजार फुट तक की ऊंचाई पर करीब 45 घंटे तक उड़ान भर सकते हैं. हेरोन टीपी ड्रोन स्वचालिक टैक्सी टेक ऑफ एवं लैंडिंग और उपग्रह संचार प्रणाली से लैस है.

अरूणाचल सेक्टर में अतिरिक्त सड़क, पुल और रेलवे ढांचा बनाया जा रहा है ताकि क्षेत्र में उभरी सुरक्षा चुनौतियों के समय सामरिक जरूरतों को पूरा किया जा सके. सरकार तवांग को रेलवे नेटवर्क से भी जोड़ने पर विचार कर रही है. बता दें कि पिछले वर्ष 15 जून को गलवान घाटी में घातक संघर्ष होने के बाद एलएसी पर तनाव बढ़ गया है.