नई दिल्ली। भारतीय सेना ड्रेग्नोव स्नाइपर राइफलों को अधिक उन्नत हथियारों से बदलना चाहती है. इस संबंध में रक्षा मंत्रालय ने देश-विदेश के हथियार निर्माताओं को सूचित किया है. सेना उच्च श्रेणी के स्नाइपर राइफलें चाहती है जिसकी रेंज कम से कम 1200 मीटर हो और रात में टार्गेट को देख पाने के लिए थर्मल इमेजिंग से लैस हो.Also Read - Indian Army ने चीन सीमा के पास पिनाक और समर्च रॉकेट लॉन्चर पहुंचाए; देखें जबरदस्त Video

सीनियर अफसरों के मुताबिक, सेना को कम से कम 5500 स्नाइपर राइफलों की जरूरत है. 7.62 मिलीमीटर कैलिबर की सेमी-ऑटोमैटिक ड्रेग्नोव राइफलें गैस से ऑपरेट होती है. इसमें शॉर्ट-स्ट्रोक गैस-पिस्टन सिस्टम होता है. भारतीय सेना इसका इस्तेमाल वर्ष 1990 से कर रही है. हालांकि रूस की सेना ने वर्ष 1960 में सबसे पहले इसका इस्तेमाल किया था. लेकिन अब ड्रेग्नोव राइफलों की मजबूती पर सवाल खड़े होने लगे हैं. साथ ही गोला-बारुद की कीमतों में भी कई गुना इजाफा हुआ है. Also Read - भारतीय सेना की तवांग में चीनी टैंकों को नेस्तनाबूद करने की ट्रेनिंग; देखें Video

ड्रेग्नोव राइफलों के जरिए रात में 300 मीटर के बाद के टार्गेट पर निशाना साधने में सेना के जवानों को दिक्कत होती है. इसके अलावा ड्रेग्नोव राइफलों को कंधे पर रखकर फायर किया जाता है जिससे पर्याप्त स्थिरता नहीं बन पाती और कई बार निशाना चूक जाता है. सेना 2012 से ही ड्रेग्नोव राइफलों को बदलने का सोच रही है. 

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दूसरी तरफ, पाकिस्तानी सेना आधुनिक ऑस्ट्रियन स्टेयर एसएसजी .22 स्नाइपर राइफलों का इस्तेमाल कर रही है. इस राइफल से पाकिस्तानी सेना को रात में टार्गेट पर निशाना साधने में कोई दिक्कत नहीं होती है.

भारतीय सेना द्वारा एलओसी के पास पाकिस्तान के आतंकी समूहों और उनके लॉन्च पैड पर किए गए सर्जिकल स्ट्राइक के बाद दोनों सेना दुश्मन जवानों को मार गिराने के लिए पूरी तरह से स्नाइपरों पर विश्वास करती हैं. एलओसी पर पोस्टेड पाकिस्तानी बटालियनों के साथ उनके स्नाइपर स्थायी रूप से अटैच कर दिए गए हैं.