पोखरण के रेगिस्तान में इसके सफल परीक्षणों ने इसकी विश्वसनीयता साबित की है. (Photo from Google)
भारतीय सेना ने अपनी मारक क्षमता को और मजबूत बनाने के लिए एक फैसला लिया है. खबर है कि सेना करीब 300 स्वदेशी ‘धनुष’ होवित्जर तोपों का नया ऑर्डर दे सकती है. इस प्रस्ताव पर रक्षा मंत्रालयकी उच्चस्तरीय बैठक में अंतिम फैसला लिया जा सकता है. अगर यह मंजूरी मिलती है, तो सेना की आर्टिलरी ताकत में जबरदस्त इजाफा होगा. खास बात यह है कि इन तोपों के जरिए करीब 15 नई रेजिमेंट तैयार की जाएंगी, जो सीमाओं पर किसी भी चुनौती का तुरंत और सटीक जवाब देने में सक्षम होंगी. यह कदम ऐसे समय पर उठाया जा रहा है जब सीमाओं पर हालात को देखते हुए सेना लगातार आधुनिकीकरण पर जोर दे रही है.
बोफोर्स से आगे निकली धनुष तोप
धनुष तोप को 1980 के दशक की चर्चित बोफोर्स तोप की तकनीक के आधार पर विकसित किया गया है, लेकिन इसमें कई आधुनिक सुधार जोड़े गए हैं. इसे पूरी तरह से भारतीय तकनीक और जरूरतों के हिसाब से अपग्रेड किया गया है. जहां बोफोर्स ने अपने समय में सेना को नई पहचान दी थी, वहीं धनुष को उससे ज्यादा ताकतवर और सटीक माना जा रहा है. रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह तोप लंबी दूरी तक दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाने में सक्षम है और आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है.
जानें धनुष तोप की खासियत
धनुष की सबसे बड़ी खासियत इसकी आधुनिक तकनीक है. इसमें इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम, ऑटो-लेइंग सुविधा और ऑनबोर्ड बैलिस्टिक कंप्यूटेशन जैसी तकनीकें लगी हैं, जो इसे बेहद सटीक बनाती हैं. इसका ‘डे एंड नाइट’ डायरेक्ट फायरिंग सिस्टम इसे दिन हो या रात, हर समय प्रभावी बनाता है. 155 मिमी/45-कैलिबर की यह तोप बाई-मॉड्यूलर चार्ज सिस्टम के साथ लंबी दूरी तक गोले दाग सकती है. इसके अलावा, इसमें लगा सेल्फ-प्रोपल्शन यूनिट इसे पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में भी आसानी से तैनात होने और मूव करने की क्षमता देता है. पोखरण के रेगिस्तान में इसके सफल परीक्षणों ने इसकी विश्वसनीयता साबित की है.
सीमाओं पर बनेगा गेमचेंजर
धनुष तोप की तैनाती से खासकर ऊंचाई वाले और चुनौतीपूर्ण इलाकों में सेना को बड़ी बढ़त मिलेगी. पहाड़ी क्षेत्रों में तेजी से मूव करने की क्षमता इसे बेहद उपयोगी बनाती है. सीमा पर किसी भी उकसावे या हमले की स्थिति में यह तोप तुरंत जवाब देने में सक्षम होगी. आधुनिक युद्ध में आर्टिलरी की भूमिका बेहद अहम होती है और धनुष इस भूमिका को और प्रभावी बना सकता है. इससे सेना की जवाबी कार्रवाई की रफ्तार और सटीकता दोनों बढ़ेंगी.
आर्टिलरी का नया पावर हाउस
भारतीय सेना में पहले से के-9 वज्र और एम-777 अल्ट्रा-लाइट होवित्जर जैसी तोपें मौजूद हैं. अब धनुष इनके साथ तीसरा मजबूत स्तंभ बनने जा रहा है. सेना पहले ही 114 धनुष तोपों का ऑर्डर दे चुकी है, जिनमें से कई रेजिमेंट सक्रिय रूप से काम कर रही हैं. तीन दशकों के लंबे इंतजार के बाद यह स्वदेशी तोप भारतीय तोपखाने के आधुनिकीकरण की पहचान बनकर उभरी है. नया ऑर्डर मिलने के बाद सेना की मारक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में यह एक और बड़ा कदम माना जाएगा.
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