
Shivani sharma
शिवानी शर्मा वर्तमान में India.com Hindi में Sub-Editor और Producer के रूप में काम कर रही हैं. यहां उनका काम समाचारों को लिखना, एडिट करना, और पाठकों तक सही रूप ... और पढ़ें
सितारों से आगे जहां और भी है… और उसी जहां को जानने, समझने, देखने और अहसास करने शुभांशु तारों की उस दुनिया में जाएंगे. तारों की दुनिया जिसे हम अंतरिक्ष कहते हैं. रात के अंधेरे में आसमान में चमचमाते तारों के बीच की दुनिया. शुभांशु शुक्ला अदब के शहर लखनऊ के रहने वाले हैं. वही शहर जहां के टुंडे कबाब से लेकर चिकन की कारीगरी मशहूर है. और इस शहर की मकबूलियत में एक नाम शुभांशु का भी जुड़ने जा रहा है.
11 जून 2025 का दिन भारत के लिए बेहद ही खास होने जा रहा है. क्योंकि भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ISS यानी International Space Station के सफर पर निकलेंगे.
बता दें कि नासा और इसरो के संयुक्त मिशन, एक्सिओम-4 (Ax-4) के तहत शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय होंगे. वहीं राकेश शर्मा के बाद वो भारत के दूसरे अंतरिक्ष यात्री होंगे, जो देश का नाम अंतरिक्ष की ऊंचाइयों में रोशन करेंगे. बता दें कि राकेश शर्मा साल 1984 में पहले अंतरिक्ष यात्री बने थे.
शुभांशु शुक्ला का लखनऊ की गलियों से निकलकर अंतरिक्ष की सैर तक का उनका सफर मेहनत, लगन और देशभक्ति का प्रतीक है. शुभांशु शुक्ला का जन्म 10 अक्टूबर 1985 को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुआ. बता दें कि शुभांशु शुक्ला एक साधारण परिवार से आते हैं, लेकिन उनकी कड़ी मेहनत और लगन ने उन्हें असाधारण बना दिया. बता दें कि शुभांशु शुक्ला ने अपनी शुरुआती पढ़ाई लखनऊ के सिटी Montessori मॉन्टेसरी स्कूल से हुई.
साल 1999 में जब कारगिल युद्ध हुआ तो शुभांशु भारतीय सेना में शामिल होने के प्रेरित हुए. जिसके बाद केवल 16 साल की उम्र में उनका सिलेक्शन नेशनल डिफेंस एकेडमी यानि की (NDA) में हो गया.
इसके बाद साल 2005 में NDA से कंप्यूटर साइंस में डिग्री हासिल करने के बाद, जून 2006 में शुभांशु को भारतीय वायुसेना में वो बतौर फाइटर पायलट के रूप में चुने गए.
मीडिया रिपोर्ट की मानें तो शुभांशु शुक्ला के पास करीब 2000 घंटे से ज्यादा उड़ान का अनुभव है, जिसमें Su-30 MKI, MiG-21, MiG-29, जगुआर जैसे कई विमानों को उड़ाने का रिकॉर्ड शामिल है. बता दें कि साल 2024 में शुभांशु शुक्ला को ग्रुप कैप्टन के पद पर प्रमोशन मिला.
वहीं, साल 2019 में ही इसरो ने उन्हें गगनयान मिशन के चार अंतरिक्ष यात्रियों में से एक के रूप में चुन लिया था. जिसके बाद से ही लगातार उनकी ट्रेनिंग रूस के ट्रेनिंग सेंटर में हो रही थी. ऐसे में अब वो एक्सिओम-4 मिशन बतौर पायलट के रूप में अंतरिक्ष में इतिहास रचने जा रहे हैं. शुभांशु शुक्ला के साथ तीन अन्य अंतरिक्ष यात्री भी इस मिशन पर जा रहे हैं जो कि अमेरिका, पौलेंड और हंगरी से हैं.
बता दें कि ये मिशन 14 दिन का होगा, जिसमें शुभांशु और उनकी टीम अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर रहकर 60 से ज्यादा वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे.
इन सब के बीच कई लोगों के मन में ये सवाल है कि शुभांशु शुक्ला को इस मिशन के लिए कितने पैसे मिलेंगे. तो चलिए बताते हैं इसका जवाब—आपको जानकर ये हैरानी होगी लेकिन शुभांशु शुक्ला को इस अंतरिक्ष यात्रा के लिए कोई पैसे नहीं मिलेंगे. यह मिशन भारत और नासा के बीच एक सहयोगी परियोजना है, और शुभांशु भारतीय वायुसेना के एक अधिकारी के रूप में इस मिशन का हिस्सा हैं.भारत सरकार ने इस मिशन के लिए 548 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, जिसमें शुभांशु और उनके बैकअप अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्णन नायर की ट्रेनिंग, यात्रा, और अन्य खर्च शामिल हैं। यह राशि मिशन के वैज्ञानिक और तकनीकी पहलुओं को पूरा करने के लिए है, न कि किसी व्यक्तिगत भुगतान के लिए।
हालांकि शुभांशु शुक्ला की यहे यात्रा भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक मील का पत्थर है. यह मिशन न केवल भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता को दुनिया के सामने लाएगा, बल्कि 2026 में होने वाले गगनयान मिशन की तैयारी में भी मदद करेगा. बता दें कि गगनयान भारत का पहला स्वदेशी मानव अंतरिक्ष मिशन होगा जिसमें शुभांशु शुक्ला का अनुभव इसे सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
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