नई दिल्ली: सरकार बच्चों में बौनापन को मापने वाले मानदंडों की समीक्षा कर रही है और उसका भारतीयों के मानव विज्ञान के मुताबिक भारतीयकरण करने का तरीका खोज रही है. बता दें कि बौनापन से ग्रस्त सबसे ज्यादा 4.66 करोड़ बच्चे भारत में हैं. इसके बाद नाइजीरिया में 1.39 करोड़ और पाकिस्तान में 1.07 करोड़ बच्चे बौनापन का शिकार हैं.

बौनापन ऐसी समस्या, जिसमें पोषण की कमी, बार-बार संक्रमण होने आदि से बच्चों की लंबाई सामान्य से बहुत कम रह जाती है. फिलहाल इसे मापने के लिए बच्चों की लंबाई का सहारा लिया जाता है. ग्लोबल न्यूट्रिशियन रिपोर्ट, 2018 के अनुसार बौनापन से ग्रस्त सबसे ज्यादा 4.66 करोड़ बच्चे भारत में हैं. इसके बाद नाइजीरिया में 1.39 करोड़ और पाकिस्तान में 1.07 करोड़ बच्चे बौनापन का शिकार हैं.

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राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण -4 (एनएफएचएस-4) के अनुसार, पांच साल से कम उम्र के 38.4 प्रतिशत बच्चों में बौनापन है, यानि उनकी लंबाई उनकी उम्र के मुकाबले कम है. वहीं 21 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं, जिनका वजन उनकी लंबाई के अनुपात में कम है.

सर्वेक्षण के अनुसार बिहार में पांच साल से कम उम्र के 48.3 प्रतिशत बच्चे बौनापन के शिकार हैं.

आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि देश के विभिन्न हिस्सों में भारतीय बच्चों का मानव संरचना विज्ञान बदलता है और ऐसे में भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में बच्चों में बौनापन मापने का एक ही मानदंड नहीं हो सकता है.

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उन्होंने बताया कि सरकार हार्वर्ड टी एच चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ और विश्व स्वास्थ्य संगठन की मदद से यह जानने का प्रयास कर रही है कि बौनापन को मापने वाले अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का भारतीयकरण कैसे किया जाए.