अटारी. पाकिस्तान के करतारपुर शहर में स्थित गुरूद्वारा दरबार साहिब को पंजाब के गुरदासपुर शहर से जोड़ने वाला गलियारा बनाने के लिए तौरतरीकों को अंतिम रूप देने के उद्देश्य से भारत और पाकिस्तान के अधिकारियों की एक बैठक यहां बृहस्पतिवार को शुरू हुई. अधिकारियों ने यह जानकारी देते हुए बताया कि यह बातचीत अटारी वाघा सीमा के भारतीय हिस्से में हो रही है.

जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सुरक्षा बलों पर आतंकी हमला होने, इसके बाद आतंकी गुट जैश-ए-मोहम्मद के बालाकोट स्थित शिविरों पर भारत की ओर से हवाई हमला किए जाने और फिर पाकिस्तान की ओर से कार्रवाई करने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बहुत बढ़ गया है. इस तनाव के बीच करतारपुर गलियारा मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के अधिकारियों की यह पहली बैठक हो रही है.

इस मुद्दे पर होगी बात
समझा जाता है कि नयी दिल्ली भारतीय श्रद्धालुओं को बिना किसी रूकावट के जाने देने का मुद्दा उठाएगी. साथ ही वह इस्लमाबाद से कहेगी कि पाकिस्तान स्थित गुरद्वारा दरबार साहिब जाने वाले सिख श्रद्धालुओं को खालिस्तान समर्थक दुष्प्रचार से अलग रखा जाए. भारतीय पक्ष में केंद्रीय गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, बीएसएफ, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और पंजाब सरकार के प्रतिनिधि शामिल हैं.

पिछले साल हुए थे सहमत
पिछले साल नवंबर में भारत और पाकिस्तान ऐतिहासिक गुरद्वारा दरबार साहिब को गुरदासपुर स्थित डेरा बाबा नानक से जोड़ने के लिए करतारपुर गलियारे का निर्माण करने पर सहमत हुए थे. गुरद्वारा दरबार साहिब में सिख पंथ के संस्थापक गुरू नानकदेव ने अपना आखिरी समय व्यतीत किया था. करतारपुर साहिब पाकिस्तान में पंजाब के नरोवाल जिले में है। रावी नदी के दूसरी ओर स्थित करतारपुर साहिब की डेरा बाबा नानक गुरद्वारे से दूरी करीब चार किमी है.

वीजा के बिना कर सकेंगे यात्रा
गलियारे के निर्माण के बाद भारतीय सिख श्रद्धालु वीजा के बिना ही करतारपुर स्थित गुरद्वारा दरबार साहिब की यात्रा कर सकेंगे. पाकिस्तान ने इस साल नवंबर में गुरू नानक देव की 550वीं जयंती पर गलियारे को खोलने के लिए प्रतिबद्धता जताई है. भारत के उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू और पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने पिछले साल 26 नवंबर को गुरदासपुर जिले में करतारपुर गलियारे की आधारशिला रखी थी.