जयपुर| जयपुर के भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग के वैज्ञानिकों ने व्यापक तकनीकी अध्ययन के बाद जयपुर में भांकरोटा के पास मुकुन्दपुरा गाँव में गत 6 जून को उल्का पिण्ड गिरने की गुरुवार को पुष्टी की है. राजस्थान में उल्का पिण्ड गिरने की यह 14वीं घटना है. Also Read - जो चुनाव हारा उस पर मेहरबान हुए लोग, चंदा करके गिफ्ट किए 21 लाख रुपए

विभाग की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार दो किलोग्राम वजन का यह उल्का पिण्ड दोपहर 3.15 बजे एक रेतीले खेत में गिरा था. सुर्ख लाल-पीले रंग का यह उल्का पिण्ड गर्जन करता हुआ खेत मालिक के घर से 100 मीटर की दूरी पर गिरा था. इसके गिरने से वहाँ 43 सेंटीमीटर की गोलाई में 15 सेंटीमीटर गहरा खड्डा हो गया था. Also Read - जयपुर-दिल्ली के बीच डबल डेकर ट्रेन 10 अक्‍टूबर से चलेगी, ये है टाइमिंग

भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग ने 7 जून को इसे अपने कब्जे में लिया था. बाद में इस पदार्थ की प्रकृति का पता लगाने के लिए मेगास्कोपिक और पेट्रोग्राफिक अध्ययन किया गया. अध्ययन से पता चला कि काफी ऊंचाई से गिरने के कारण इस उल्का पिण्ड के अलग अलग आकार के टुकड़े हो गए थे जिनका कुल वजन दो किलो 23 ग्राम था. उल्फा पिण्ड का रंग गहरा काला था और इसमें सल्फर की गंध थी. फ्यूजन क्रस्ट की मोटाई 1.5 से 2 एम एम नापी गई. Also Read - Jaipur: युवक ने फाइनल ईयर की एग्‍जाम देने आई छात्रा को कॉलेज के पास गोली मारी, अस्‍पताल में सांसें थमीं

विज्ञप्ति के अनुसार उल्का पिण्ड के रासायनिक अध्ययन में इस बात का पता चला है कि इसके क्रस्ट और भीतरी भाग में कई रसायनों का मिश्रण था. प्रारम्भिक तौर पर इस उल्का पिण्ड को कार्बनेशियस कौनड्राइट पत्थर से मिलता-जुलता माना जा रहा है. अधिक गहन अध्ययन के लिए इस उल्का पिण्ड के नमूने को भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग, एनसीईजीआर के मीटीयोराइट एण्ड प्लानेट्री साइंस डिविजन को भेजा गया है.