नई दिल्ली. भारतीय सिक्युरिटी एजेंसियों ने इस्लामिक स्टेट के घेरे में घुसकर एक बड़ी आतंकी घटना होने से पहले उसका भंडाफोड़ किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, आईएस अफगान के सुसाइड बॉम्बर नई दिल्ली में बड़ी वारदात को अंजाम देने वाले थे. लेकिन भारतीय एजेंसियों ने एक प्लान बनाकर पूरे मामले का घुलासा कर दिया.

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय एजेंसियों ने 18 महीने तक अफगानिस्तान, दुबई और नई दिल्ली में सर्विलांस ऑपरेशन चलाया. इस दौरान जानकारी मिली कि 12 आईएस लड़ाकों का एक दस्ता इन जगहों पर ट्रेनिंग ले रहा है. इसमें एक अफगानी युवक को नई दिल्ली में वारदात को अंजाम देने के लिए भेजा गया है. बताया जा रहा है कि वह एक रईस कारोबारी का बेटा है.

इंजीनियरिंग कॉलेज में लिया था एडमिशन
रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानी युवक ने मिशन के लिए दिल्ली-फरीदाबाद हाइवे पर एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन लिया. इसके बाद उसने लाजपत नगर में एक ग्राउंड फ्लोर का अपार्टमेंट किराए पर ले लिया. भारत के 80 अधिकारियों ने करीब एक महीने उसकी निगरानी की. इस दौरान उसके हर पल की जानकारी जुटाई जा रही थी.

अफगानिस्तान से ही हुआ ट्रैक
रिसर्च एंड नालिसिस विंग (R&AW) ने दुबई से अफगानिस्तान में 50 हजार डॉलर के संदिग्ध ट्रांसफर को ट्रैक करना शुरू किया. इस दौरान जानकारी मिली कि आईएस ने धमाके के लिए नई दिल्ली को टारगेट किया है. इस दौरान एक प्लान के मुताबिक तय हुआ कि सिक्युरिटी एजेंसी आईएस सर्किट में घुसपैठ करेगी.

दोस्त बनकर किया खुलासा
रिपोर्ट के मुताबिक, सिक्युरिटी एजेंसी ने अफगान में ही प्लान के मुताबिक दोस्ती के लिए एक एजेंट भेज दिया था. रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय एजेंट ने ही उसे लाजपत नगर में सुरक्षित जगह दिलाई. इसके बाद भारतीय एजेंट को विस्फोटकों का इंतजाम करने को कहा गया. इस दौरान हमलावर को जो विस्फोटक दिए गए, उसके साथ कोई ट्रिगर नहीं था. रिपोर्ट के मुताबिक, पूछताछ में मालूम चला है कि 22 मई 2017 को मैनचेस्टर अरीना में हुए आत्मघाती हमले में इसी समूह का हाथ था. यह समूह नई दिल्ली में भी ऐसी ही वारदात को अंजाम देने की फिराक में था.