नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ (स्पेशल सेल) ने 61 वर्षीय भारतीय स्वतंत्र (फ्रीलांस) पत्रकार राजीव शर्मा को कथित तौर पर चीनी खुफिया एजेंसी को जानकारी देने के आरोप में गिरफ्तार किया है. नई दिल्ली के पीतमपुरा में शर्मा के घर की तलाशी के दौरान, एक लैपटॉप, भारतीय रक्षा से संबंधित कुछ गोपनीय दस्तावेज और कुछ अन्य गुप्त कागजात कथित तौर पर जब्त किए गए हैं. Also Read - 'बाबा का ढाबा' पर फिर पसरा सन्नाटा, चार दिनों की रौनक के बाद अब ऐसा है ढाबे और बाबा का हाल

स्पेशल सेल के डीसीपी संजीव यादव ने कहा, “उनके पुलिस रिमांड के दौरान एक चीनी महिला क्विंग शी और उनके नेपाली साथी शेर सिंह उर्फ राज बोहरा को भी गिरफ्तार किया गया है.” Also Read - पेट्रोल-डीजल के दाम में नहीं हुआ कोई बदलाव, यहां पर जानिए अपने शहर में तेल के दाम

पुलिस ने दावा किया कि वे चीनी खुफिया एजेंसी को संवेदनशील सूचना देने के एवज में पत्रकार राजीव शर्मा को बड़ी राशि का भुगतान कर रहे थे. Also Read - दिल्‍ली में प्रदूषण पर सख्‍त राज्‍य सरकार, 3 नवंबर से पटाखा विरोधी अभियान होगा शुरू

कुछ दिन पहले एक खुफिया एजेंसी से एक इनपुट मिला था कि नई दिल्ली के पीतमपुरा के सेंट जेवियर अपार्टमेंट के निवासी राजीव शर्मा के विदेशी खुफिया अधिकारी के साथ संबंध हैं और वह अवैध तरीके से और पश्चिमी माध्यम से अपने हैंडलर से धन प्राप्त कर रहे हैं.

इस संबंध में सरकारी गोपनीयता अधिनियम की धारा 3/4/5 के तहत 13 सितंबर को मामला दर्ज किया गया था. इसके बाद, राजीव शर्मा को 14 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था और दिल्ली पुलिस की ओर से उनके आवासीय परिसर की तलाशी के लिए एक वारंट प्राप्त किया गया था.

संजीव यादव ने बताया कि पूछताछ के बाद राजीव शर्मा ने गुप्त और संवेदनशील जानकारी की खरीद में अपनी भागीदारी का खुलासा किया है. शर्मा ने कुनमिंग, चीन में स्थित अपने चीनी हैंडलर्स माइकल और जॉर्ज से अलग-अलग डिजिटल चैनलों के माध्यम से हुई बातचीत से भी अवगत कराया. उन्होंने आगे खुलासा किया कि वह उनके संचालकों को गुप्त बरामद किर गए दस्तावेज भेजने वाले थे.

पुलिस ने कहा कि इससे पहले भी शर्मा ने अपने संचालकों को रिपोर्ट के रूप में कई दस्तावेज भेजे थे और इसकी एवज में उन्हें बड़ी राशि मिली थी. पुलिस के अनुसार, 2010-2014 के दौरान वह ‘ग्लोबल टाइम्स’ के लिए एक साप्ताहिक कॉलम लिखते थे, जिसे चीनी सरकार का मुखपत्र माना जाता है.

चीन से एक चीनी खुफिया एजेंट माइकल ने अपने लिंक्डइन अकाउंट के माध्यम से राजीव शर्मा से संपर्क किया और उन्हें चीनी मीडिया कंपनी के साथ साक्षात्कार के लिए कुनमिंग में आमंत्रित किया. इस यात्रा के खर्च का वहन माइकल द्वारा किया गया था. बैठक के दौरान, माइकल और उनके जूनियर शोऊ ने राजीव शर्मा को भारत-चीन संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी प्रदान करने के लिए कहा.

2016 और 2018 के बीच राजीव शर्मा माइकल और शोऊ के संपर्क में थे. उन्हें डोकलाम सहित भूटान-सिक्किम-चीन त्रिकोणीय जंक्शन पर भारतीय तैनाती, भारत-म्यांमार सैन्य सहयोग का पैटर्न, भारत-चीन सीमा मुद्दा आदि मुद्दों पर जानकारी देने का काम सौंपा गया था. इसके बाद, राजीव शर्मा ने एक बार लाओस और मालदीव में माइकल और शाऊ के साथ बैठक की और इन विषयों पर जानकारी दी. इन यात्राओं के अलावा शर्मा ई-मेल और सोशल मीडिया के माध्यम से माइकल और शोऊ के संपर्क में भी थे.

दिल्ली पुलिस के अनुसार, जनवरी, 2019 में राजीव शर्मा एक अन्य कुनमिंग आधारित चीनी व्यक्ति जॉर्ज के संपर्क में आए थे. वह काठमांडू के रास्ते कुनमिंग गए और जॉर्ज से मिले, जिन्हें एक चीनी मीडिया कंपनी के महाप्रबंधक के रूप में पेश किया गया था. बैठक के दौरान, जॉर्ज ने राजीव शर्मा से दलाई लामा से संबंधित मुद्दों के बारे में लिखने के लिए कहा.

इसके लिए राजीव शर्मा को प्रति लेख 500 अमेरिकी डॉलर की पेशकश की गई थी. जॉर्ज ने शर्मा से कहा कि वे उसे महिपालपुर, दिल्ली में स्थित कंपनी के माध्यम से पैसा भेजेंगे. शर्मा ने जनवरी 2019 से सितंबर 2020 तक लगभग 10 किस्तों में जॉर्ज से 30 लाख रुपए से अधिक प्राप्त किए. उन्होंने आगे मलेशिया में जॉर्ज के साथ और फिर कुनमिंग में बैठकें कीं.

जांच के दौरान, यह पता चला कि शर्मा को धन हस्तांतरित करने के लिए विदेशी खुफिया एजेंटों द्वारा शेल कंपनियों का संचालन किया जा रहा था. इस मामले में पूरे नेटवर्क और साजिश का पता लगाने के लिए जब्त मोबाइल फोन और लैपटॉप का फॉरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है. साजिश में शामिल अन्य विदेशी नागरिकों की पहचान और भूमिका का भी पता लगाया जा रहा है.