हॉर्मुज में चारों तरफ था खतरा… फिर भी डटी रही इंडियन नेवी, LPG जहाज बचाकर बढ़ाया देश का मान
भारत के LPG टैंकर ने हॉर्मुज स्ट्रेट सुरक्षित पार कर लिया है. भारतीय नौसेना एस्कॉर्ट के साथ जहाज ओमान की खाड़ी पहुंचे. भारतीय नौसेना की मौजूदगी ने इस पूरे मिशन को सुरक्षित और सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई.
भारतीय नौसेना की मौजूदगी ने इस पूरे मिशन को सुरक्षित और सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई. (Photo from PTI)
ये खबर सुनकर हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा. जंग के हालात में भी हमारे नौसेना ने हिम्मत और समझदारी का उदाहरण पेश किया है. दो भारतीय झंडा वाले जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं और अब गल्फ ऑफ ओमान में पहुंच गए हैं. जिस समय वहां युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं और खतरा हर पल मंडरा रहा है, उस समय भारतीय नौसेना का इन जहाजों को एस्कॉर्ट करना देश की ताकत और जिम्मेदारी को दिखाता है. ये सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि भारत की हिम्मत, रणनीति और अपने लोगों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता की कहानी है.
भारतीय नौसेना ने समझदारी से फैसला लिया
इन दोनों जहाजों ने ईरान के लारक और केशम द्वीपों के बीच से गुजरकर अपनी पहचान साफ तौर पर जाहिर की, ताकि किसी तरह का शक या टकराव न हो. यह कदम बहुत सोच-समझकर उठाया गया, क्योंकि उस इलाके में तनाव काफी ज्यादा है. जहाजों में कुल मिलाकर 92,612 टन एलपीजी भरी हुई है, जो भारत के लिए बेहद जरूरी है. इन जहाजों पर 60 से ज्यादा भारतीय नाविक भी सवार हैं, जिनकी सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता थी. भारतीय नौसेना की मौजूदगी ने इस पूरे मिशन को सुरक्षित और सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई.
युद्ध के कारण कई जहाज फंसे हुए हैं
पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज स्ट्रेट लगभग बंद जैसा हो गया था. ईरान की तरफ से हमलों और धमकियों के कारण कई जहाज वहां फंस गए थे. शुरुआत में 28 भारतीय जहाज इस इलाके में थे, जिनमें से कई अभी भी वहीं हैं. धीरे-धीरे कुछ जहाज़ सुरक्षित निकलने में सफल हो रहे हैं, लेकिन खतरा अभी भी पूरी तरह टला नहीं है. हाल ही में शिप ट्रैकिंग डेटा से पता चला कि लगभग 500 टैंकर अभी भी फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं, जो वैश्विक सप्लाई चेन के लिए भी चिंता की बात है.
पहले भी कुछ जहाज भारत वापस आ चुके
इससे पहले भी भारत के कुछ जहाज सुरक्षित वापस आ चुके हैं. शिप शिवालिक और नंदा देवी एलपीजी लेकर गुजरात के बंदरगाहों तक पहुंच चुके हैं. इसके अलावा, जग लाडकी और जग प्रकाश जैसे जहाज भी सुरक्षित अपने गंतव्य की ओर बढ़ चुके हैं. ये सभी दिखाता है कि भारत लगातार अपने जहाजों को सुरक्षित निकालने की कोशिश कर रहा है और इसमें सफलता भी मिल रही है. हर सफल मिशन से बाकी फंसे हुए जहाजों के लिए उम्मीद बढ़ती है.
भारत के लिए क्यों जरूरी है होर्मुज स्ट्रेट
आपको बता दें कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है. करीब 88% कच्चा तेल, 50% गैस और 60% LPG बाहर से आती है. इनमें से ज्यादातर सप्लाई इसी होर्मुज स्ट्रेट के जरिए होती है. इसलिए इस रास्ते का सुरक्षित रहना भारत के लिए बेहद जरूरी है. अगर यह रास्ता बंद हो जाता है, तो देश की ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है. ऐसे में भारतीय नौसेना और सरकार की सक्रियता यह सुनिश्चित करती है कि देश की जरूरतें पूरी होती रहें और किसी तरह की कमी न आए.
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