जिंदा मिसाइल के साथ ऑयल टैंकर ने तय कर लिया 2000km का सफर, भारतीय नौसेना ने कैसे टाला समुद्र में महाविस्फोट?

Written By: Anjali Karmakar Updated by: Anjali Karmakar
Updated Date:June 13, 2026 7:52 PM IST

रक्षा मंत्रालय की तरफ से 11 जून को जारी बयान के मुताबिक, टैंकर UAE के फुजैराह से कोच्चि आ रहा था. टैंकर में कोई भारतीय नागरिक सवार नहीं था.

अरब सागर में एक ऐसा खतरा तैर रहा था, जो किसी भी वक्त बड़े समुद्री हादसे में बदल सकता था. लेकिन, भारतीय नौसेना ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के फुजैराह से कोच्चि आए एक ऑयल टैंकर से जिंदा मिसाइल को सुरक्षित निकालकर बड़ा समुद्री हादसा टाल दिया है, रक्षा मंत्रालय ने बताया कि 26 मई को ओमान तट के पास MT ओलम्पिक ऑयल टैंकर पर हमला हुआ था. बेहद खतरनाक हालात में भारतीय नौसेना ने एक हाई-रिस्क ऑपरेशन चलाकर न सिर्फफ उस वारहेड को बाहर निकाला, बल्कि उसे सुरक्षित तरीके से डी-एक्टिवेट भी कर दिया है.

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क्या था पूरा मामला?

ये मामला 26 मई का बताया जा रहा है. प्रेस इंफोर्मेशन ब्यूरो यानी PIB ने रक्षा मंत्रालय के हवाले से इस टैंकर की डिटेल और फोटो शुक्रवार (12 जून 2026) को जारी की गई है. PIB की रिपोर्ट के मुताबिक, मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला क्रूड ऑयल टैंकर MT Olympic Life संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह पोर्ट से कोच्चि की ओर आ रहा था. लेकिन, 26 मई 2026 को ओमान के तट के पास जहाज के ढांचे में विस्फोट जैसी घटना हुई. जांच में पता चला कि किसी मिसाइल या प्रोजेक्टाइल का वॉरहेड जहाज के बाहरी हिस्से को भेदते हुए अंदर तक पहुंच गया. गनीमत रही कि इससे कोई धमाका नहीं हुआ.

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फ्यूल स्टोरेज एरिया में जा फंसा था वॉरहेड

जांच में पता चला कि मिसाइल का वॉरहेड जहाज की कई परतों को पार करते हुए सीधे फ्यूल स्टोरेज एरिया में जा फंसा था. यह वही जगह थी, जहां बड़ी मात्रा में ज्वलनशील पदार्थ मौजूद था. अगर वॉरहेड जरा भी एक्टिव हो जाता, तो पूरे टैंकर में भयंकर विस्फोट हो सकता था. इससे न सिर्फ क्रू मेंबर की जान जाती, बल्कि समंदर में भारी पर्यावरणीय आपदा भी हो सकती थी.

जिंदा मिसाइल के साथ तय किया 2000km का सफर

रिपोर्ट के मुताबिक, विस्फोटक वॉरहेड को ऐसे स्थिति से सुरक्षित निकालना बहुत हाई रिस्क वाला मामला था. एक छोटी सी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती थी. इसलिए ये मजबूरन शिप को जिंदा मिसाइल के साथ 2000km का सफर तय करना पड़ा.

नौसेना ने कैसे चलाया ऑपरेशन?

सूचना मिलने के बाद Information Fusion Centre – Indian Ocean Region (IFC-IOR) के जरिए भारतीय नौसेना को अलर्ट भेजा गया. इसके बाद कोच्चि स्थित सदर्न नेवल कमांड (Southern Naval Command) ने अपने एक्सपर्ट एक्सप्लोसिव ऑर्डिनेंस डिस्पोजन (EOD) टीम को तैनात किया.

नेवी के एक्सपर्ट्स ने पहले जहाज की डिटेल मॉनिटरिंग की. फिर एक-एक फेज में वॉरहेड की स्थिति का जांचा गया. कई दिनों तक चली प्रक्रिया के बाद वॉरहेड को सुरक्षित रूप से निकाला गया. इसके बाद उसे सुरक्षित तरीके से डी-एक्टिवेट किया गया.

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एक हफ्ते तक चला मिशन

PIB की रिपोर्ट के मुताबिक, नेवी का ये मिशन एक-दो घंटे नहीं, बल्कि कई दिनों तक चला. नेवी की एक्सपर्ट्स टीम को यह सुनिश्चित करना था कि वॉरहेड हटाने के दौरान जहाज, क्रू मेंबर और आसपास के समुद्री क्षेत्र को कोई नुकसान न पहुंचे. इस ऑपरेशन की सफलता ने दिखाया कि नेवी सिर्फ युद्ध लड़ने में ही नहीं, बल्कि समुद्री आपदाओं और जटिल सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में भी बेहद सक्षम है.

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