Indian Railway Will Give Clean Fragrant Bedroll Charbagh Station Redevelopment Stop
यात्रीगण ध्यान दें... रेलवे ने इस पुरानी सुविधा को बंद करने का लिया फैसला, जानें क्या है प्लान
भारतीय रेलवे ने लंबी दूरी की ट्रेनों में साफ और खुशबूदार बेडरोल देने के लिए नई व्यवस्था लागू की है. वहीं, लखनऊ चारबाग स्टेशन को विश्वस्तरीय बनाने का प्रोजेक्ट बजट की कमी से धीमा चल रहा है.
लंबी दूरी की ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों के लिए रेलवे ने एक बड़ी व्यवस्था लागू की है. दरअसल, अब यात्रियों को साफ और खुशबूदार बेडरोल मिलेंगे. रेलवे ने तय किया है कि अब लिनेन सिर्फ ट्रेन के शुरुआती स्टेशन से ही लोड नहीं होगा, बल्कि आखिरी स्टेशन पर भी नया लिनेन चढ़ाया जाएगा. इससे वापसी यात्रा में पहले से इस्तेमाल किए गए बेडरोल दोबारा यात्रियों को नहीं दिए जाएंगे. यात्रियों की शिकायत थी कि ट्रेन में एक बार लोड किया गया बेडरोल पूरी यात्रा और फिर वापसी में भी इस्तेमाल होता था. अब नई व्यवस्था के लागू होने से यात्रियों को बेहतर और स्वच्छ सफर का अनुभव मिलेगा.
पहले चरण में 42 ट्रेनों में शुरू होगी नई सुविधा
रेलवे ने इस सुविधा को पहले चरण में 42 ट्रेनों में लागू किया है. खास बात यह है कि इनमें पूर्वोत्तर रेलवे से गुजरने वाली 10 ट्रेनें भी शामिल हैं आसनसोल-गोंडा, लखनऊ-चंडीगढ़ और जयनगर-नई दिल्ली जैसी ट्रेनें. रेलवे का मानना है कि इससे यात्रियों की लगातार आ रही शिकायतें खत्म होंगी और सफर के दौरान स्वच्छता का स्तर बढ़ेगा. रेलवे द्वारा शुरू की गई यह पहल यात्रियों के आराम और स्वास्थ्य के लिए भी काफी फायदेमंद साबित हो सकती है.
चारबाग स्टेशन का प्रोजेक्ट अभी सुस्त पड़ा
इसके अलावा, उत्तर रेलवे का चारबाग स्टेशन को विश्वस्तरीय बनाने का प्रोजेक्ट पर काम अटका पड़ा है. बजट की कमी और विभागीय सुस्ती के कारण, काम की गति काफी धीमी हो गई है. हालत यह है कि गोमतीनगर स्टेशन का काम चारबाग के बाद शुरू हुआ था, लेकिन वह काफी आगे निकल चुका है. चारबाग स्टेशन के पुनर्विकास के तहत, सेकंड एंट्री पर बहुमंजिला भवन बनकर तैयार हो गया है. लेकिन मुख्य स्टेशन पर यात्रियों की सुविधाओं से जुड़े कई जरूरी काम अब भी अधूरे हैं.
कॉन्कोर्स, लिफ्ट और एस्केलेटर का काम अधूरा
चारबाग स्टेशन पर प्लेटफॉर्मों के ऊपर बनने वाले कॉन्कोर्स का काम अभी अधूरा है. इसके लिए नींव की खुदाई तो हो चुकी है, लेकिन छत डालने का काम रुक गया है. यह कॉन्कोर्स चारबाग और लखनऊ जंक्शन को जोड़ेगा, जहां टिकटिंग, एसी लाउंज और वेटिंग रूम जैसी सुविधाएं होंगी. साथ ही कॉन्कोर्स को प्लेटफॉर्म से जोड़ने के लिए लिफ्ट और एस्केलेटर लगाने का काम भी पूरा नहीं हो पाया है. यात्रियों को इसका लाभ तभी मिलेगा जब ये सुविधाएं पूरी तरह तैयार होंगी.
फंडिंग बनी बड़ी रुकावट, कई काम बाकी
सूत्रों के अनुसार, प्रोजेक्ट के पहले चरण में 500 करोड़ रुपये जारी किए गए थे, लेकिन यह राशि अब कम पड़ गई है. अब 500 करोड़ रुपये की दूसरी किस्त जारी होने का इंतजार किया जा रहा है. दूसरी ओर कानपुर रूट पर गंगा पुल की एक लाइन की मरम्मत पूरी हो चुकी है, जबकि दूसरी लाइन का काम माघ मेला खत्म होने के बाद होगा क्योंकि इससे 50 से ज्यादा ट्रेनें प्रभावित होंगी. इसके अलावा चारबाग से दिलकुशा आउटर तक फोरलेन ट्रैक का काम भी अधूरा है. कटाई वाले पुल पर नया ब्रिज बन गया है, लेकिन उद्घाटन नहीं हुआ. बैरिकेडिंग और नई लाइनें बिछाने का काम भी बाकी है.
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