नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बाद रेलवे ने राज्यों को पत्र लिखकर उनसे कहा है कि वे प्रवासी मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए 10 जून तक श्रमिक विशेष ट्रेनों के लिए ‘‘समग्र शेष’’ मांग उपलब्ध कराएं. शीर्ष अदालत ने केंद्र को निर्देश दिया है कि वह प्रवासी मजदूरों की घर वापसी की प्रक्रिया अगले 15 दिन में पूरी करे. रेलवे एक मई से लेकर अब तक 4,347 श्रमिक विशेष ट्रेनों के जरिए लगभग 60 लाख लोगों को उनके गंतव्य राज्यों में पहुंचा चुका है. Also Read - Coronavirus in India latest Update: नहीं लग रहा कोरोना संक्रमण पर ब्रेक, 24 घंटे में 22 हजार से ज्यादा नए मामले, 6.50 लाख के करीब लोग संक्रमित

रेल मंत्रालय ने कहा कि भारतीय रेलवे ने राज्य सरकारों को सूचित कर दिया है कि वह राज्यों से मांग प्राप्त होने के बाद 24 घंटे के भीतर श्रमिक स्पेशल ट्रेन प्रदान करती रहेगी. मंत्रालय ने कहा कि अब तक लगभग 60 लाख व्यक्तियों को उनके गंतव्य राज्यों तक पहुँचाने के लिए भारतीय रेलवे द्वारा 4347 से अधिक श्रमिक विशेष सेवाएँ संचालित की गई हैं. श्रमिक ट्रेनें 1 मई 2020 से चलाई जा रही हैं. Also Read - भारतीय रेलवे का एक और रिकॉर्ड, 2.8 Km लंबी ट्रेन 'शेषनाग' चलाकर रचा इतिहास

राज्यों के मुख्य सचिवों को लिखे पत्र में रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष वी के यादव ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने निर्देश दिया है कि राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा पहले ही की जा चुकी 171 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के अतिरिक्त, किसी अतिरिक्त मांग की स्थिति में रेलवे प्रवासी मजदूरों को उनके घर भेजने के लिए राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के आग्रह पर 24 घंटे के भीतर श्रमिक विशेष ट्रेन उपलब्ध कराएगा. Also Read - IRCTC Latest News : जानें, कब से शुरू होने जा रही हैं प्राइवेट ट्रेन, फ्लाइट से कम किराए पर कर सकेंगे यात्रा

उन्होंने मंगलवार को जारी पत्र में लिखा, ‘‘इस परिप्रेक्ष्य में, आप कृपया फंसे प्रवासी मजदूरों की घर वापसी के लिए अपने राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों से यात्रियों की संख्या, यात्रा प्रारंभ होने के स्टेशन, गंतव्य स्टेशन, कार्यक्रम और परिवहन के संपन्न होने की तारीखों सहित श्रमिक विशेष ट्रेनों के लिए समग्र शेष मांग की सलाह दे सकते हैं.’’ पत्र में उन्होंने लिखा है, ‘‘ब्योरा आधिकारिक पत्र के माध्यम से 10 जून तक भेजा जा सकता है.’’

इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को केन्द्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि लॉकडाउन की वजह से पलायन कर रहे सभी कामगारों को 15 दिन के भीतर उनके पैतृक स्थान पहुंचाया जाये और उनके पुनर्वास के लिये श्रमिकों के कौशल का आकलन करने के बाद रोजगार योजनायें तैयार की जायें.

न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने लॉकडाउन के दौरान पलायन कर रहे कामगारों की दयनीय स्थिति का स्वत: संज्ञान लिये गये मामले में वीडियो कांफ्रेन्सिंग के जरिये अपने फैसले में विस्तृत निर्देश दिये.