नई दिल्लीः कोरोना वायरस के चलते देश में चल रहे लॉकडाउन के कारण लाखों की संख्या में मजदूर अपने गृह नगर से दूर दूसरे राज्यों में फंसे हैं. ऐसे में इन मजदूरों को उनके घर तक पहुंचाने के लिए स्पेशल श्रमिक ट्रेन चलाई जा रही हैं. इस बीच भारतीय रेलवे कुछ कारणों से विवादों में भी आ गया, जिसे लेकर अब भारतीय रेलवे ने सफाई दी है. Also Read - लद्दाख गतिरोध: रक्षा मंत्री के बाद पीएम मोदी ने की अजीत डोभाल, CDS जनरल रावत व तीनों सेना प्रमुखों से मुलाकात

भारतीय रेलवे के मुताबिक, वह प्रवासी मजदूरों को उनके राज्य पहुंचाने के लिए मजदूरों को टिकट नहीं बेच रहा, ना ही उनसे किराया वसूल कर रहा है. बल्कि, यह किराया राज्य सरकारों से वसूला जा रहा है. भारतीय रेलवे राज्य सरकारों से इन मजदूरों को उनके गृह नगर तक पहुंचाने के लिए कुल लागत का सिर्फ 15 प्रतिशत मानक किराया वसूल रहा है. Also Read - मोदी सरकार 2.0 की पहली वर्षगांठ, 6 साल पूरे होने पर भाजपा करेगी 'आभासी रैलियों' का आगाज, गिनाएगी उपलब्धियां

रेलवे मंत्रालय के सूत्रों ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया कि, भारतीय रेलवे श्रमिकों को उनके गृह नगर तक पहुंचाने के लिए स्पेशल ट्रेन चला रही है. जिसमें सोशल डिस्टेंसिंग का भी पूरा ख्याल रखा जाएगा. ट्रेन में किसी तरह की भीड़ ना हो, इसका भी ध्यान रखा जाएगा. श्रमिकों को उनके घर तक पहुंचाने के लिए रेलवे इन मजदूरों को टिकट नहीं बेच रहा. रेलवे इन मजदूरों को घर तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार से किराया वसूल करेगा.

रेलवे के मुताबिक, वापसी के दौरान इन ट्रेनों को पूरी तरह से बंद रखा जाएगा. वहीं ट्रेन में मजदूरों के लिए खाने और पानी की भी पूरी व्यवस्था की जाएगी, जो कि पूरी तरह फ्री होगी.