नई दिल्ली: भारतीय रेलवे ने बड़ी ऐलान करते हुए कहा कि अगले 10 दिन में, श्रमिक विशेष ट्रेनों से 36 लाख प्रवासी यात्रा करेंगे. शनिवार को अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में रेलवे बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि पिछले चार दिनों में औसतन 260 ‘श्रमिक विशेष ट्रेनें’ प्रतिदिन चलाई गई हैं. जिनसे रोजाना तीन लाख यात्रियों को गंतव्य स्थल पर पहुंचाया गया.Also Read - रेल यात्रियों के लिए खुशखबरी! घर से नहीं लाने होंगे अब ये सामान, अगले महीने तक सभी ट्रेनों में मिलने लगेगी यह सुविधा

उन्होंने कहा कि अगले 10 दिन में, श्रमिक विशेष ट्रेनों से 36 लाख प्रवासी यात्रा करेंगे. साथ ही रेलवे ने राज्यों को अपनी जरूरतें बताने को कहा है. रेलवे बोर्ड ने कहा कि रेलवे के 17 अस्पतालों को कोविड-19 मरीज देखभाल अस्पताल में तब्दील किया गया है. एक मई से 2,600 श्रमिक विशेष ट्रेनों ने अपनी यात्रा पूरी की है, 35 लाख से अधिक यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाया है. Also Read - भारत-बांग्लादेश के बीच ट्रेन सेवा 29 मई से फिर होगी बहाल, जानें रेल मंत्रालय से क्या आया अपडेट

रेलवे ने एक मई से अब तक 2,570 श्रमिक विशेष ट्रेनों से 32 लाख प्रवासी कामगारों को गृह राज्य पहुंचाया

रेलवे ने एक मई से अब तक 2,570 श्रमिक विशेष ट्रेनों से 32 लाख प्रवासी कामगारों को उनके घरों तक पहुंचाया है. आधिकारिक आंकडों में यह जानकारी दी गई. श्रमिक विशेष ट्रेनें मुख्यत: राज्यों के अनुरोध पर चलाई जा रही हैं जो लॉकडाउन के कारण फंसे प्रवासी कामगारों को उनके गृह राज्यों तक भेजना चाहते हैं. रेलवे इन ट्रेनों को चलाने के कुल व्यय का 85 फीसद व्यय खुद वहन कर रही है शेष राशि राज्य दे रहे हैं. Also Read - Indian Railways: आपके ट्रेन के टिकट पर छपे नंबर में छिपा है गहरा राज, क्या आप जानते हैं इन 5 नंबर्स का मतलब

कुल 2,570 ट्रेनों में से 505 रेलगाड़ियां अपने गंतव्य तक अभी नहीं पहुंची हैं शेष 2,065 रेलगाडियों ने अपनी यात्राएं पूरी कर ली हैं. रेलवे के आंकडों के अनुसार उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक 1246 श्रमिक विशेष रेलगाड़ियां पहुंची हैं, इसके बाद बिहार में 804 और झारंखड में 124 रेलगाड़ियां पहुंची हैं. वहीं गुजरात ने 759, महाराष्ट्र ने 483 और पंजाब ने 291 श्रमिक विशेष रेलगाड़ियों से प्रवासी कामगारों को रवाना किया है.

गौरतलब है कि कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लागू लॉकडाउन के चलते हजारों की संख्या में प्रवासी कामगार पैदल, साइकिलों से अथवा अन्य साधनों से अपने घरों के लिए रवाना होने लगे थे. विभिन्न सड़क दुर्घटनाओं में अनेक प्रवासी कामगारों की मौत भी हुई. इसके बाद रेलवे ने एक मई से कामगारों को उनके गृह राज्यों तक पहुंचाने के लिए श्रमिक विशेष रेलगाड़ियों का परिचालन शुरू किया.