भारत का 'बाहुबली' अंतरिक्ष में मचाने जा रहा है खलबली! जानिए क्या है BlueBird6 मिशन, जो बदलने जा रहा पृथ्वी का भविष्य

BlueBird6 Mission: 24 दिसंबर 2025 की सुबह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO अपना अब तक का सबसे ताकतवर हाई-प्रोफाइल कमर्शियल मिशन लॉन्च करने जा रहा है, यह मिशन दुनिया का नक्शा बदलने की क्षमता रखता है. आइए जानते हैं क्यों यह मिशन दुनिया के लिए जरूरी माना जा रहा है और भारत के लिए नए अवसरों के दरवाजे खोलने वाला है.

Published date india.com Published: December 21, 2025 9:16 PM IST
Indian Space Agency ISRO LVM3 Bahubali Rocket Launch
Indian Space Agency ISRO LVM3 Bahubali Rocket Launch

क्रिसमस से ठीक पहले भारत एक बड़ी अंतरिक्ष कामयाबी की ओर बढ़ने जा रहा है. 24 दिसंबर 2025 की सुबह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO अपना अब तक का सबसे ताकतवर हाई-प्रोफाइल कमर्शियल मिशन लॉन्च करने जा रहा है. इस मिशन में ISRO का हेवी-लिफ्ट रॉकेट LVM3, जिसे बाहुबली कहा जाता है, अमेरिकी कंपनी AST SpaceMobile के बेहद खास और भारी BlueBird-6 सैटेलाइट को अंतरिक्ष में स्थापित करेगा. रिपोर्ट के मुताबिक, यह लॉन्च श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से सुबह 8:54 बजे किया जाएगा. इस मिशन को ISRO के साल 2025 के सबसे अहम और हाई-प्रोफाइल लॉन्च में गिना जा रहा है.

क्यों खास है LVM3 ‘बाहुबली रॉकेट’

LVM3 रॉकेट को खासतौर पर भारी सैटेलाइट को लो अर्थ ऑर्बिट में पहुंचाने के लिए डिजाइन किया गया है. अब तक इस रॉकेट का रिकॉर्ड 100 प्रतिशत सफल रहा है, यही वजह है कि एक अमेरिकी निजी कंपनी ने अपने सबसे कीमती सैटेलाइट के लिए ISRO पर भरोसा जताया है. नासा और स्पेसएक्स जैसी दिग्गज एजेंसियों के बीच ISRO को चुना जाना भारत की बढ़ती अंतरिक्ष ताकत का साफ संकेत है. यह मिशन ISRO की कमर्शियल शाखा न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) के जरिए किया जा रहा है, जो भारत को वैश्विक स्पेस मार्केट में मजबूत पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभा रही है.

BlueBird-6 सैटेलाइट क्यों दुनिया के लिए जरूरी

BlueBird-6 कोई साधारण सैटेलाइट नहीं है. रिपोर्ट के अनुसार, यह दुनिया का पहला ऐसा कमर्शियल सैटेलाइट बनने जा रहा है, जो सीधे अंतरिक्ष से आम लोगों के स्मार्टफोन को नेटवर्क उपलब्ध कराएगा. यानी कि भविष्य में मोबाइल टावर के बिना भी फोन पर कॉल और इंटरनेट संभव हो सकेगा. सैटेलाइट के ऑर्बिट में पहुंचते ही इसमें लगा एक विशाल एंटीना खुलेगा, जो अब तक का सबसे बड़ा कमर्शियल फेज्ड एरे एंटीना होगा. इसका मकसद दुनिया का पहला स्पेस-बेस्ड सेल्युलर ब्रॉडबैंड नेटवर्क तैयार करना है, जिससे दूर-दराज और नेटवर्क से वंचित इलाकों में भी कनेक्टिविटी आसान होगी.

भारत के लिए क्यों मील का पत्थर माना जा रहा ये मिशन

रिपोर्ट्स बताते हैं कि, 6.5 टन वजनी सैटेलाइट को सुरक्षित तरीके से अंतरिक्ष में पहुंचाना अपने आप में एक बड़ी तकनीकी चुनौती है. इस मिशन की सफलता ISRO के लिए आने वाले कई अंतरराष्ट्रीय लॉन्च के दरवाजे खोल सकती है. इससे भारत की छवि एक भरोसेमंद और किफायती स्पेस लॉन्च पार्टनर के रूप में और मजबूत होगी. इसी के साथ यह मिशन न सिर्फ तकनीक, बल्कि आम लोगों की जिंदगी में भी बड़ा बदलाव लाने वाला साबित हो सकता है, क्योंकि मोबाइल कनेक्टिविटी का भविष्य अब सीधे अंतरिक्ष से जुड़ने जा रहा है.

BlueBird-6 सैटेलाइट और LVM3 रॉकेट की खासियतें के बारे में जानें:

  • BlueBird-6 सैटेलाइट का वजन करीब 6.5 टन है.
  • यह LVM3 द्वारा लॉन्च किया जाने वाला सबसे भारी कमर्शियल सैटेलाइट है.
  • सैटेलाइट में 2400 स्क्वायर फीट का विशाल फेज्ड एरे एंटीना लगा है.
  • यह एंटीना कंपनी के पुराने सैटेलाइट्स से 3.5 गुना बड़ा है.
  • डेटा कैपेसिटी पुराने मॉडल्स के मुकाबले 10 गुना ज्यादा बताई जा रही है.
  • यह सैटेलाइट सीधे आम स्मार्टफोन से कनेक्ट होगा.
  • इस लॉन्च के बाद बिना मोबाइल टावर के कॉल और इंटरनेट की सुविधा संभव होगी.
  • LVM3 रॉकेट की लंबाई करीब 43.5 मीटर है.
  • रिपोर्ट के मुताबिक, इस रॉकेट का कुल वजन लगभग 642 टन है.

माना जा रहा है कि यह मिशन ISRO के लिए कई नए इंटरनेशनल लॉन्च कॉन्ट्रैक्ट्स की राह खोल सकता है, जो देश के लिए एक अच्छा संकेत है.

Add India.com as a Preferred SourceAdd India.com as a Preferred Source

Also Read:

ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें India Hindi की और अन्य ताजा-तरीन खबरें

By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.