नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि भारत 2030 तक 2.1 करोड़ हेक्टेयर बंजर जमीन को उपजाऊ बनाने के अपने लक्ष्य को बढ़ाकर 2.6 करोड़ हेक्टेयर करेगा. पीएम मोदी ने सम्‍मेलन में मौजूद 196 देशों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि हम अपनी धरती को मां मानते हैं. पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन के नकारात्‍मक असर को झेल रही है. उन्‍होंने कहा कि भारत दुनिया को मरूस्‍थलीकरण से बचाने के लिए प्रतिबद्ध है. इसीलिए भारत ने दो साल तक इस सम्‍मेलन का होस्‍ट बनने फैसला लिया है.

ये बात पीएम मोदी ने मरूस्थलीकरण से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलन (यूएनसीसीडी) के पक्षों की सभा के 14वें सत्र (कॉप 14) को संबोधित करते हुए कहा कि 2015 और 2017 के बीच भारत में पेड़ और जंगल के दायरे में आठ लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है.

मोदी ने कहा कि जलवायु और पर्यावरण जैव विविधता और भूमि दोनों को प्रभावित करते हैं. यह व्यापक रूप से है स्वीकार जाता है कि दुनिया जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभाव का सामना कर रही है. जलवायु परिवर्तन विभिन्न प्रकार के भूमि क्षरण का कारण बन रहा है. समुद्र के स्तर में वृद्धि और लहरों का बढ़ना , अनिश्चित वर्षा और तूफान के कारण, और गर्म तापमान के कारण रेत के तूफान जलवायु परिवर्तन विभिन्न प्रकार के भूमि क्षरण का कारण बन रहा है.

प्रधानमंत्री ने कहा, ”मैं यह घोषणा करता चाहता हूं कि भारत अब से लेकर 2030 तक अपनी बंजर जमीन को उपजाऊ बनाने की महत्वाकांक्षा के तहत कुल रकबे को 2.1 करोड़ हेक्टेयर से बढ़ाकर 2.6 करोड़ हेक्टेयर करेगा.

मोदी ने यह भी कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता और भूमि क्षरण जैसे क्षेत्रों में व्यापक दक्षिण-दक्षिण सहयोग बढ़ाने के लिए उपायों का प्रस्ताव रख कर प्रसन्नता महसूस कर रहा है.

मोदी ने ग्रेटर नोएडा, यूपी में आयोजित UNCCD के COP14 में कहा, इससे आपको खुशी होगी कि भारत अपने ट्री कवर को बढ़ाने में सफल रहा है. 2015 से 2017 के बीच, भारत के वृक्ष और वन आवरण में 0.8 मिलियन हेक्टेयर की वृद्धि हुई है.

पीएम ने कहा कि मैं यूएनसीसीडी के नेतृत्व से वैश्विक जल कार्रवाई एजेंडा बनाने की मांग करता हूं जो भू क्षरण प्रक्रिया की रणनीति का आधार है जलापूर्ति बढ़ाना, जल पुनर्भरण और मृदा में नमी को बनाए रखना समग्र भूमि, जल रणनीति का हिस्सा है.