नई दिल्ली. देश की अब तक की सबसे तेज इंजनलेस ट्रेन-18 ने 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने का परीक्षण पूरा कर लिया है. अब आधिकारिक रूप से यह ट्रेन भारतीय रेलवे के लिए अपनी सेवाएं देने में सक्षम होगी. रेल मंत्री पीयूष गोयल ने आज अपने टि्वटर हैंडल के जरिए इस ट्रेन का एक वीडियो शेयर किया, जिसमें स्पीडोमीटर पर साफ दिख रहा है कि इस ट्रेन ने रफ्तार का सबसे उच्चतम पैमाने को छू लिया है. इस हिसाब से यह ट्रेन अब शताब्दी और राजधानी एक्सप्रेस के अलावा गतिमान एक्सप्रेस से भी ज्यादा तेज चलने वाली ट्रेन बन गई है. लेकिन रेलवे सुरक्षा मानकों के अनुसार इस इंजनलेस ट्रेन-18 को अभी सिर्फ 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ही चलाया जा सकेगा. क्योंकि रेलवे सुरक्षा और संरक्षा विभाग ने कहा है कि 130 से लेकर 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से इस ट्रेन को चलाने के लिए ट्रैक के दोनों तरफ फेंसिंग यानी बाड़ लगाने पड़ेंगे. यही वजह है कि ट्रेन-18 रफ्तार के मामले में भले ही सबसे तेज चलने वाली ट्रेन बन गई हो, लेकिन रेलवे की मौजूदा व्यवस्था के तहत इसे अभी 130 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से ही दौड़ना पड़ेगा.

पीएम मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी से ट्रेन18 को 29 दिसंबर को दिखाएंगे हरी झंडी

हमारी सहयोगी वेबसाइट जीन्यूज के अनुसार, भारतीय रेलवे ने अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस ट्रेन-18 को सबसे पहले दिल्ली-वाराणसी रूट पर दौड़ाने का फैसला किया है. इस रूट पर ट्रेन-18 का संचालन शुरू होने से दिल्ली से वाराणसी तक का सफर महज 8 घंटे में ही पूरा किया जा सकेगा. इस दूरी को तय करने में अभी मेल/एक्सप्रेस या सुपरफास्ट ट्रेनों को 12 घंटे से ज्यादा का समय लगता है. कई ट्रेनें तो इतनी दूरी का सफर 15 से 17 घंटे में पूरा करती हैं. लेकिन ट्रेन-18 एक ही दिन में दिल्ली से वाराणसी तक आ-जा सकेगी. आपको बता दें कि वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है. इस वजह से भी ट्रेन-18 को दिल्ली-वाराणसी रूट पर चलाए जाने की बात हो रही है.

जहां तक ट्रेन-18 की रफ्तार कम करने की बात है, तो CCRS की एक चिट्ठी की वजह से ट्रेन-18 की रफ्तार शुरुआत में कम रह सकती है. दरअसल CCRS ने रेलवे बोर्ड को चिट्ठी लिखकर आगाह किया है कि ट्रेन-18 को 130 से लेकर 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से मौजूदा रेलवे ट्रैक पर दौड़ाने के लिए ट्रैक के दोनों ओर फेंसिंग कराना पड़ेगा. आपको बता दें कि तेज रफ्तार ट्रेनों, जैसे कि बुलेट ट्रेन के लिए भी ट्रैक के दोनों तरफ बाड़ लगाए जाते हैं. ट्रेन-18 हालांकि सेमीस्पीड कैटेगरी की ट्रेन है, बावजूद इसके 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने की इसकी क्षमता के कारण ट्रैक के दोनों ओर फेंसिंग करानी पड़ेगी. इसलिए CCRS ने मशविरा दिया है कि इस ट्रेन को अभी 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ही दौड़ाया जाए.

देश की पहली बिना इंजन वाली ट्रेन-18, वर्तमान में चल रही तेज रफ्तार शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेनों की जगह लेगी. ट्रेन 18 का निर्माण आईसीएफ चेन्नई ने 100 करोड़ रुपए की लागत से किया है जो हाल में भारत की सबसे तेज ट्रेन बन गई. दिल्ली-राजधानी मार्ग के एक खंड पर प्रायोगिक परीक्षण के दौरान इसकी रफ्तार 180 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक रही. ट्रेन-18 को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है. इस ट्रेन में ऐसी तमाम खूबियां हैं जो अभी तक विदेशों में चलने वाली लग्जरी ट्रेनों में दिखती रही हैं. यह रेलगाड़ी देश की पहली ट्रेन सेट है, जिसमें इंजन लगाने की जरूरत नहीं पड़ती. पहले कोच में ड्राइवर के लिए केबिन बना है. प्लेटफॉर्म से गाड़ी में चढ़ने के लिए भी ट्रेन में एक ऐसा प्लेटफॉर्म दिया गया है जो अपने आप एडजस्ट हो जाता है. इस रेलगाड़ी का ऐरोडायनामिक डिजाइन इसे तेज रफ्तार ट्रेन में बदल देता है. गाड़ी में कुल 16 कोच होंगे, जिनमें 2 एक्जीक्यूटिव कोच हैं. इस ट्रेन के लॉन्च के साथ ही भारतीय रेलवे तकनीक के नए युग में प्रवेश कर लिया है.