Train18: इंडियन रेलवे की 30 साल पुरानी शताब्दी एक्सप्रेस का स्थान लेने वाली ‘Train18’ आज पटरियों पर परीक्षण के लिए उतरेगी. यह देश की पहली ‘इंजनलेस’ ट्रेन है. इस ट्रेन में इंजन अलग नहीं है, बल्कि मेट्रो ट्रेनों की तरह इंजन भी यात्री बोगी के साथ है. यह ट्रेन ‘सेल्फ प्रपल्शन मॉड्यूल’ पर 160 किलोमीटर प्रति किलोमीटर की रफ्तार तक चल सकती है. इसकी तकनीकी विशिष्टताओं के चलते इसकी गति सामान्य ट्रेन से अधिक होगी.

कुल 16 कोच वाली यह ट्रेन सामान्य शताब्दी ट्रेन के मुकाबले कम वक्त लेगी. इस ट्रेन को चेन्नई स्थित इंटिग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) द्वारा 18 महीने में विकसित किया गया है. आईसीएफ के महाप्रबंधक सुधांशु मणि ने बताया था कि इसकी डिजाइन बनाने में 100 करोड़ रुपये की लागत आई और बाद में इसके उत्पादन की लागत कम हो जाएगी. आज के परीक्षण के बाद इसका तीन या चार दिनों तक फैक्ट्री के बाहर परीक्षण किया जाएगा और बाद में इसे रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड आर्गनाइजेशन (आरडीएसओ) को आगे के परीक्षण के लिए सौंप दिया जायेगा.

ट्रेन18 की सीटें काफी आरामदायक हैं.

ट्रेन18 की सीटें काफी आरामदायक हैं.

ये खासियतें:
ट्रेन के बीच में दो एक्जिक्यूटिव कंपार्टमेंट होंगे, जिसमें 52 सीटें होंगी, सामान्य कोच में 78 सीटें होंगी.
इसकी सीटें 360 डिग्री यानी चारों तरफ मुड़ सकेंगी.
शताब्दी की गति 130 किलोमीटर प्रति घंटे है जबकि यह 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक चल सकेगी.
Train18 की गति के मुताबिक पटरी बना ली जाए तो यह शताब्दी एक्सप्रेस के मुकाबले 15फीसदी कम समय लेगी.
Train18 में जीपीएस आधारित यात्री सूचना प्रणाली के अलावा अलहदा तरह की लाइट, ऑटोमेटिक दरवाजे और सीसीटीवी कैमरे लगे होंगे.
शताब्दी ट्रेन को 1988 में शुरू किया गया था और इस वक्त यह प्रमुख नगरों से जोड़ने वाले 20 से अधिक मार्गों पर संचालित है.