By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.
- Hindi
- India Hindi
- Indias Lunar Missions Difference Among Chandrayaan1 Chandrayaan 2 And Chandrayaan 3
ISRO Chandrayaan Missions: चंद्रयान-1, चंद्रयान-2 और चंद्रयान-3 में क्या अंतर है, जानें- क्या हैं भविष्य की संभावनाएं?
ISRO Chandrayaan Mission: भारत के चंद्रयान मिशन ने लूनर इन्वेस्टिगेशन और टेक्निकल इन्नोवेशन के प्रति देश के कमिटमेंट को प्रदर्शित किया है.
ISRO Chandrayaan Missions: भारत की पहचान इसके महत्वाकांक्षी स्पेस प्रोग्राम से है. इसने पृथ्वी के खगोलीय पड़ोसी चंद्रमा के बारे में अपनी समझ बढ़ाने के लिए कई चंद्र मिशन शुरू किए हैं. चंद्रयान-1, चंद्रयान-2 और आगामी चंद्रयान-3 मिशन स्पेस रिसर्च में भारत की टेक्निकल प्रोग्रेस और वैज्ञानिक खोज को प्रदर्शित करते हैं. चंद्रयान-3, 14 जुलाई को दोपहर 2:35 बजे उड़ान भरने के लिए तैयार है. सितंबर 2019 में सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी के कारण चंद्रयान-2 लैंडिंग के वक्त क्रैश हो गया था. भारत का यह तीसरा चंद्रयान मिशन है.
आइए, यहां पर जानते हैं कि इन तीन मिशनों में क्या अंतर है और उनका मकसद, उपलब्धियां और भविष्य की संभावनाएं क्या हैं?
चंद्रयान-1 के जरिए रखा गया फाउंडेशन
चंद्रयान-1 को 22 अक्टूबर 2008 में लॉन्च किया गया था. भारत का पहला सफल चंद्र मिशन था. इसमें एक ऑर्बिटर और एक मून इम्पैक्ट प्रोब (MIP) लगा था, जो चंद्रमा के साउथ पोल के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया. चंद्रयान-1 का प्राइमरी टार्गेट चंद्रमा की सरफेस का एक हाई- रिजोल्यूशन 3डी मैप बनाना था. इसका मकसद मिनरल स्ट्रक्चर की एनालिसिस करना और पानी की बर्फ के संकेतों की खोज करना था. मिशन की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि चंद्रमा की सरफेस पर पानी के मॉलीक्यूल्स की खोज थी, जो चंद्र इन्वेस्टीगेशन में एक मील का पत्थर साबित होता. संपर्क टूटने से पहले चंद्रयान-1 दस महीने तक ऑपरेट हुआ.
चंद्रयान-2: लूनर इन्वेस्टिगेशन को आगे बढ़ाना
चंद्रयान -2 को जुलाई 2019 में लॉन्च किया गया था. इसका मकसद ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर को शामिल करके चंद्रयान की सफलता को आगे बढ़ाना था. ऑर्बिटर को चंद्रमा की सरफेस का मैपिंग करने और उसके एक्सोस्फेयर की स्टडी करने के लिए डिजाइन किया गया था, जबकि लैंडर (Vikram) साइंटिस्ट टेस्ट के लिए रोवर (Pragyan) को सरफेस पर ले गया था. लैंडिंग स्टेप के दौरान कम्यूनिकेशन विफलता का सामना करने के बावजूद, चंद्रयान -2 का ऑर्बिटर सक्रिय है और वैल्यूएबल डेटा प्रदान करना जारी रखा है. मिशन ने सॉफ्ट लैंडिंग टेक्निक में भारत की कैपेसिटी को प्रदर्शित किया, और भविष्य के मिशन इससे सीखे गए सबक से बेनिफिट ले सकते हैं.
चंद्रयान-3: लूनर रिसर्च के लिए रास्ता बनाना
चंद्रयान-3, भारत का आगामी चंद्र मिशन, 14 जुलाई 2023 को दोपहर 2.35 बजे लॉन्च किया जाएगा. यह चंद्रमा की सरफेस पर एक रोवर को सफलतापूर्वक उतारने का नया प्रयास है. मिशन का टार्गेट उन टेक्निक्स में सुधार करना है, जिसके कारण चंद्रयान-2 की लैंडिंग 100 फीसदी सफल नहीं हो पाई थी. चंद्रयान-3 में बेहतर सिस्टम और बेहतर रिलायबिलिटी के साथ एक ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर शामिल किया गया है. मिशन के उद्देश्यों में चंद्रमा की सरफेस का डीटेल्ड इन्वेस्टिगेशन करना, इसके मिनरल साइंस का एनालिसिस करना और चंद्रमा के इंटरनल स्ट्रक्चर का पता लगाना है.
गौरतलब है कि भारत के चंद्रयान मिशन ने लूनर इन्वेस्टिगेशन और टेक्निकल इन्नोवेशन के प्रति देश के कमिटमेंट को प्रदर्शित किया है. चंद्रयान-1 ने चंद्रमा पर पानी के मॉलीक्यूल्स की मौजूदगी के बारे में पता लगाया, जबकि चंद्रयान-2 ने मनचाहा लैंडिंग रिजल्ट्स हासिल नहीं होने के बावजूद सॉफ्ट लैंडिंग टेक्निक में भारत की ताकत का प्रदर्शन किया. चंद्रयान-3 के साथ, भारत का टार्गेट पिछली चुनौतियों को सुधारना और लूनर रिसर्च में प्रोग्रेस करना है. जैसे-जैसे कार्यक्रम डेवलप हुआ, ये मिशन सामूहिक रूप से चंद्रमा की हमारी समझ में योगदान बढ़ाए हैं और भविष्य के स्पेस इन्वेस्टीगेशन के लिए किए जाने वालों प्रयासों के लिए एक रास्ता तैयार किए हैं.
Also Read:
-
अंतरिक्ष से दुश्मनों पर रहेगी पैनी नजर! लॉन्च के लिए तैयार भारत की सबसे ताकतवर 'जासूसी आंख', जानें इसकी खूबियां
-
अंतरिक्ष से दुश्मनों पर रहेगी पैनी नजर! लॉन्च के लिए तैयार भारत की सबसे ताकतवर 'जासूसी आंख', जानें इसकी खूबियां
-
क्यों ISRO दक्षिण भारत से ही करता है रॉकेट लॉन्च! ये रहस्य जानकर चकरा जाएगा आपका सिर
ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें India Hindi की और अन्य ताजा-तरीन खबरें