क्या सच में पाकिस्तान बनेगा रेगिस्तान? पहाड़ों में दिन-रात काम कर रहे हैं भारत के बुलडोजर, ये चार प्रोजेक्ट पूरे हुए तो...

Written By: Shivendra Rai Updated by: Shivendra Rai
Updated Date:January 8, 2026 9:13 AM IST

Indus Water Treaty: भारत ने सिंधु जल संधि स्थगित होने के बाद पाकिस्तान के साथ सिंधु जल प्रणाली का डेटा साझा करना भी बंद कर दिया है. चिनाब और झेलम नदियों पर कई हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट के निर्माण में तेजी आई है और बांधों से गाद हटाने पर लगातार काम हो रहा है.

India's power projects in Jammu and Kashmir: पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने 1960 में पाकिस्तान के साथ की गई सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था. इसके बाद केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में कई नदी परियोजनाओं पर काम तेज कर दिया है. इसके तहत रियासी जिले में चिनाब नदी पर बने सलाल डैम से गाद हटाया जा रहा है तो रतले हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट पर भी काम शुरू हो गया है. सावलकोट हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के काम में तेजी आई है और चेनाब नदी पर 260 मेगावाट की दुलहस्ती जलविद्युत परियोजना के द्वितीय चरण को भी मंजूरी मिल गई है.

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भारत ने सिंधु जल संधि स्थगित होने के बाद पाकिस्तान के साथ सिंधु जल प्रणाली का डेटा साझा करना भी बंद कर दिया है. चिनाब और झेलम नदियों पर कई हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट के निर्माण में तेजी और बांधों से गाद हटाने पर लगातार हो रहे काम को देखते हुए पाकिस्तान बौखलाया हुआ है. पाकिस्तान को डर है कि भारत के इस कदम से पानी का संकट खड़ा हो सकता है और उसकी खेती बर्बाद हो सकती है. आइये जानते हैं भारत की चार अहम परियोजनाओं के बारे में.

दुलहस्ती हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट फेज-2

भारत ने जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में चेनाब नदी पर 260 मेगावाट की दुलहस्ती जलविद्युत परियोजना के द्वितीय चरण को मंजूरी दे दी है. इस परियोजना की लागत लगभग 3200 करोड़ रुपये है. यह एक रन-ऑफ-द-रिवर परियोजना है. इसमें नदी के प्रवाह में बिना बाधा डाले जल-विद्युत का उत्पादन किया जाएगा.

सलाल डैम परियोजना

भारत ने चिनाब नदी पर स्थित सलाल पावर स्टेशन के बांध से गाद निकालने का काम तेज कर दिया है. एक बार गाद पूरी तरह साफ हो गई तो बांध में ज्यादा पानी स्टोर किया जा सकेगा. सिंधु जल संधि लागू रहने पर ऐसे छोटे काम के लिए भी पाकिस्तान की सहमति लेनी पड़ती थी. सलाल जलाशय की बिजली उत्पादन क्षमता 690 मेगावाट है. यह NHPC द्वारा संचालित है.

रतले हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट

850 मेगावाट के रतले हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट इसके चालू होने की तारीख मई 2026 तय की गई है. यह हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट जम्मू और कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में चिनाब नदी पर बन रहा है. रतले जम्मू-कश्मीर सरकार और NHPC का एक संयुक्त उद्यम है. 2021 में इस प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली थी और इसकी लागत 5,281.94 करोड़ रुपये है. परियोजना में एक 133 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी बांध बनाना भी शामिल है.

सावलकोट हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट

जम्मू और कश्मीर के रामबन और उधमपुर जिलों में चिनाब नदी पर NHPC द्वारा प्रस्तावित एक बड़ी जलविद्युत परियोजना है सावलकोट हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट. इसकी क्षमता 1856 मेगावाट है. इस प्रोजेक्ट को हाल ही में केंद्र सरकार से पर्यावरण संबंधी मंजूरी मिली है. परियोजना दो चरणों में पूरी की जाएगी. सावलकोट परियोजना जम्मू-कश्मीर में बिजली की कमी की समस्या को खत्म कर देगी.

समय पर पूरे होंगे सभी काम

केंद्रीय बिजली और आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने हाल ही में जम्मू-कश्मीर पहुंच कर सभी परियोजनाओं के विकास का जायजा लिया था. उन्होंने कहा कि सभी पावर प्रोजेक्ट समय पर पूरे होंगे क्योंकि सभी व्यवधान हटा दिए गए हैं. सभी चार प्रोजेक्ट एक-एक करके पूरे होंगे और उनसे बिजली उत्पादन समय पर शुरू होगा. केंद्रीय बिजली मंत्री ने ये भी कहा कि सिंधु जल संधि को रोक दिया गया है और पाकिस्तान की किसी भी तरह की मदद नहीं की जाएगी.

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