नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने मंगलवार को कहा कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा तैयार किए जाने वाले सैनिटरी नैपकिन पर 12 फीसदी जीएसटी लगाने के सरकार के फैसले से उन भारतीय निर्माता कंपनियों को फायदा होगा जिनका सालाना टर्नओवर 20 लाख से कम है. एक जुलाई 2017 से लागू माल एवं सेवा कर व्यवस्था में सैनिटरी नैपकिन को 12 फीसदी के कर स्लैब में रखा गया है. जबकि सिंदूर और चूड़ी सहित अन्य उत्पादों को कर मुक्त घोषित कर दिया गया. Also Read - GST on  Hand Sanitizer: कोरोन काल में जिस सैनिटाइजर से रख रहे हैं खुद को सेफ, केंद्र सरकार ने उस पर लगाया 18 % का जीएसटी

महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने पीएचडी चैम्बर ऑफ कॉमर्स के एक आयोजन में कहा ‘‘अगर हम सैनिटरी नैपकिन पर जीएसटी न लगाएं तो बहुराष्ट्रीय कंपनियों को अपने प्रसार का मौका मिल जाएगा और फिर स्वदेशी विकास बाधित होगा.’’ Also Read - CBSE ने सिलेबस से हटाए GST, राष्ट्रवाद, धर्मनिरपेक्षता के अध्याय, बच्चे फिलहाल नहीं पढ़ेंगे ये पाठ

उन्होंने कहा ‘‘बहुराष्ट्रीय कंपनियों के सैनिटरी नैपकिन पर 12 फीसदी जीएसटी लगाने और सालाना 20 लाख रूपये से कम के टर्नओवर वाली किसी कंपनी पर जीएसटी न लगाए जाने से कई गैर सरकारी संगठन और महिला समूह आगे आएंगे और उद्यमी बन कर इस काम में लगेंगे.’’ Also Read - राहुल गांधी ने PM मोदी का वीडियो शेयर कर कहा- हारवर्ड में ये तीन विफलताएं होंगी केस स्‍टडी

मेनका ने पिछले साल मार्च में वित्त मंत्री अरूण जेटली को पत्र लिख कर उसने पर्यावरण के अनुकूल और जैव अपघटीय सैनिटरी नैपकिन पर जीएसटी के तहत 100 फीसदी कर छूट देने का अनुरोध किया था.