सिलेंडर से लेकर फ्लाइट तक... जानें इजरायल-ईरान जंग में भारत में क्या-क्या हो गया महंगा, आपकी जेब पर कितना बढ़ेगा बोझ

Written By: Gargi Santosh Updated by: Gargi Santosh
Updated Date:March 13, 2026 8:28 PM IST

Israel-Iran War India Effect: ईरान-इजरायल युद्ध का असर भारत पर भी दिखने लगा है. सोना-चांदी, कुकिंग ऑयल, ड्राई फ्रूट्स, दाल और फ्लाइट टिकट समेत कई चीजें महंगी हो रही हैं.

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब केवल उस क्षेत्र तक सीमित नहीं है. इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल पैदा कर दी है. भारत भी ईरान-इजरायल जंग से अछूता नहीं रहा है. ऊर्जा, व्यापार और शिपिंग से जुड़ी गतिविधियों पर इसका सीधा असर पड़ा है. खासकर तेल की कीमतों में तेजी और सप्लाई चेन में रुकावट के कारण कई जरूरी चीजें महंगी होने लगी हैं, जिसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ने लगा है. एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. पहले एयर इंडिया और अब इंडिगो ने टिकट के दाम बढ़ा दिए हैं.

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ईंधन की कीमत बढ़ने से हवाई सफर हो गया महंगा

एयरलाइंस कंपनियों ने बढ़ती ईंधन कीमतों के कारण टिकटों पर अतिरिक्त फ्यूल चार्ज जोड़ना शुरू कर दिया है. एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) किसी भी एयरलाइन की लागत का बड़ा हिस्सा होता है, इसलिए जब इसकी कीमत बढ़ती है तो हवाई किराए पर भी असर पड़ता है. इसी वजह से यात्रियों को अब फ्लाइट टिकट बुक करते समय पहले से ज्यादा भुगतान करना पड़ सकता है.

कब से लागू होंगे नए रेट?

Indigo की नई घोषणा के अनुसार, 14 मार्च 2026 से एयरलाइन की सभी नई टिकट बुकिंग पर अतिरिक्त फ्यूल चार्ज जोड़ा जाएगा. यह शुल्क उड़ान के सेक्टर के हिसाब से अलग-अलग होगा. घरेलू भारत और भारतीय उपमहाद्वीप के लिए प्रति सेक्टर लगभग 425 रुपये का अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा. वहीं मिडिल ईस्ट की उड़ानों पर करीब 900 रुपये, साउथ ईस्ट एशिया और चीन के लिए लगभग 1800 रुपये और यूरोप के लिए करीब 2300 रुपये तक का फ्यूल चार्ज लगाया जाएगा. एयरलाइंस का कहना है कि यह शुल्क हर सेक्टर के हिसाब से जोड़ा जाएगा, जिससे टिकट की कुल कीमत थोड़ी बढ़ सकती है.

तीन चरणों में बढ़ेगा हवाई किराया

कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि नया ईंधन शुल्क एक ही बार में नहीं बल्कि तीन चरणों में लागू किया जाएगा. पहले चरण में घरेलू उड़ानों और SAARC देशों के लिए टिकटों पर प्रति यात्री लगभग 399 रुपये का अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा. दूसरे चरण में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर यह शुल्क बढ़ेगा, जिसमें वेस्ट एशिया के लिए करीब 10 डॉलर, साउथ ईस्ट एशिया के लिए 20 डॉलर और अफ्रीका के लिए 30 डॉलर तक का चार्ज शामिल होगा. तीसरे चरण में दूर-पूर्व के देशों जैसे हांगकांग, जापान और दक्षिण कोरिया के लिए भी शुल्क बढ़ाया जाएगा, जिसकी घोषणा बाद में की जाएगी.

सोना-चांदी की कीमती में उछाल

चलिए आपको बताते हैं ईरान-इजरायल जंग से भारत में क्या-क्या महंगा हो गया? सोना और चांदी की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली है. हाल के दिनों में घरेलू बाजार में सोने की कीमत रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी और चांदी के दामों में भी बड़ा उछाल दर्ज किया गया. हालांकि, कुछ दिनों से कीमतों में थोड़ी नरमी आई है. लेकिन फिर भी ये पहले के मुकाबले काफी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक तनाव बना रहेगा, तब तक कीमती धातुओं के दामों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है.

उद्योग और व्यापार पर भी असर

युद्ध का असर केवल वित्तीय बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि कई उद्योगों पर भी इसका असर पड़ रहा है. खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण गैस सप्लाई में रुकावट आ रही है, जबकि सिरेमिक उद्योग में उत्पादन के लिए बड़ी मात्रा में गैस की जरूरत होती है. भट्टियों को जलाने और मिट्टी को सुखाने जैसे काम गैस के बिना संभव नहीं हैं. इसी कारण कई फैक्ट्रियों के बंद होने का खतरा भी पैदा हो गया है. अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो इससे उद्योग और रोजगार दोनों पर असर पड़ सकता है.

खाने-पीने की चीजें भी हो गईं महंगी

युद्ध और सप्लाई चेन में आई रुकावट का असर खाने-पीने की चीजों पर भी देखने को मिल रहा है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलाव का असर यहां भी दिखाई देता है. अभी जिन चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, उनमें शामिल हैं -

  • कुकिंग ऑयल (पाम ऑयल, सोयाबीन ऑयल, सूरजमुखी तेल)
  • ड्राई फ्रूट्स जैसे पिस्ता, केसर, अंजीर और खुबानी
  • दालें जैसे अरहर, उड़द और मसूर
  • प्याज की कीमतें
  • समुद्री शिपिंग और लॉजिस्टिक्स लागत

विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध के कारण शिपिंग मार्गों पर जोखिम बढ़ गया है. कई बीमा कंपनियों ने इस क्षेत्र के लिए वॉर रिस्क कवरेज भी सीमित कर दिया है. ऐसे में व्यापार महंगा और धीमा दोनों हो गया है, जिससे कई जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ने की आशंका बनी हुई है.

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