नई दिल्ली. भारत के जयनगर और नेपाल के जनकपुर के बीच अगले 6 महीनों में ब्रॉडगेज यानी बड़ी लाइन की ट्रेनों का संचालन शुरू हो जाएगा. इस रूट पर पिछले 5 वर्षों से आमान-परिवर्तन यानी नैरो गेज रेलवे लाइन को ब्रॉड गेज में बदलने का काम किया जा रहा है. नेपाल के रेलवे विभाग के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार नेपाल की पहली ब्रॉड गेज रेल सेवा दिसंबर से शुरू करने की योजना है. इस रूट पर भारत की तरफ से बिहार के जयनगर और नेपाल के जनकपुर तक शुरुआती चरण में रेल सेवा शुरू की जाएगी. चीन की समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक यह खंड जयनगर से नेपाल के दक्षिण पूर्व क्षेत्र तक 69 किमी का नेपाल-भारत सीमा पार रेलवे का एक भाग है. दोनों पड़ोसी देशों के बीच कई अन्य स्थानों पर भी रेलवे लाइन बिछाने की योजना पर काम चल रहा है. अपने देश में ब्रॉडगेज सर्विस शुरू करने के लिए नेपाल, भारत से ट्रेन और चालक दल किराए पर लेगा.

नेपाल में जरूरी मानव संसाधन की कमी
जनकपुर-जयनगर लाइन पर वर्षों तक नैरो गेज रेलवे का परिचालन किया जाता रहा है. लेकिन इस रूट को बड़ी लाइन में बदलने व अन्य नवीनकरण कार्यो के लिए पांच साल पहले बंद कर दिया गया था. रूट परिवर्तन के कारण अभी भारत-नेपाल के बीच रेल सेवा बंद है. समाचार एजेंसी सिन्हुआ से नेपाल के रेलवे विभाग (डीओआर) के वरिष्ठ प्रभागीय इंजीनियर प्रकाश भक्त उपाध्याय ने मंगलवार को कहा कि उन्होंने जल्द संचालन शुरू करने के लिए भारत से पट्टे पर रेल गाड़ियां लेकर चलाने की योजना बनाई है. डीओआर के अनुसार, नेपाल सेवा के संचालन के लिए भारतीय चालक दल के सदस्यों को किराए पर लेगा क्योंकि हिमालयी देश में ब्रॉड गेज रेल सेवा को संचालित करने के लिए आवश्यक मानव संसाधन नहीं है.

भारत के जयनगर से नेपाल के बीच चलती थी नैरो गेज की ट्रेन.

भारत के जयनगर से नेपाल के बीच चलती थी नैरो गेज की ट्रेन.

 

दो रेल संपर्क परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा
इधर, भारत और नेपाल के अधिकारियों ने आज दो सीमापार रेल संपर्क परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की. दोनों देशों के संयुक्त कार्यसमूह की आज यहां संपन्न तीसरी बैठक में इन परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई. भारतीय दूतावास ने बयान में कहा है कि बैठक में जयनगर-बिजालपुर-बर्दीबास और जोगबनी-बिराटनगर रेल संपर्क परियोजना पर हुई प्रगति की सराहना की गई. भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई रेल मंत्रालय में कार्यकारी निदेशक मनोज कुमार श्रीवास्तव ने की. नेपाली पक्ष की अगुवाई बुनियादी ढांचा एवं परिवहन मंत्रालय में संयुक्त सचिव केशब कुमार शर्मा ने की.

रक्सौल-काठमांडु रेल मार्ग को लेकर बनी सहमति
भारत और नेपाल, दोनों देशों के बीच रेल मार्गां के विस्तार को लेकर सहमत हो गए हैं. इसके तहत बिहार के रक्सौल से नेपाल की राजधानी काठमांडू तक रेल लाइन बिछाने को लेकर दोनों देशों में सहमति बनी है. इस योजना पर भारत-नेपाल की सहमति ऐसे समय में बनी है, जब चीन और नेपाल के बीच तिब्बत के रास्ते रेल लाइन को काठमांडू तक पहुंचाने को मंजूरी कुछ ही सप्ताह पहले दी गई है. भारत और नेपाल के वरिष्ठ अधिकारियों ने बीते सोमवार को रक्सौल-काठमांडू रेल लाइन को लेकर बनी सहमति (मेमोरंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) पर हस्ताक्षर किेए. भारत ने इस योजना से संबंधित विवरण नेपाल को भेज भी दिए हैं. भारतीय दल ने इस योजना से संबंधित पहले चरण का सर्वेक्षण का कार्य भी पूरा कर लिया है. बता दें कि इसी साल मई में पीएम नरेंद्र मोदी के नेपाल दौरे के समय रक्सौल-काठमांडू रेल लाइन प्रोजेक्ट को लेकर सहमति बनी थी.

सफर के साथीः तीर्थ यात्रा कराने वाली नेपाल की वह छुटकी ट्रेन

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चीन इस दिशा में पहले ही बढ़ा चुका है कदम
भारत सरकार के ऊपर नेपाल में अपनी परियोजनाओं को लेकर पिछले कुछ वर्षों में ढीला-ढाला रवैया अपनाने का आरोप लगा है. वहीं इसके मुकाबले नेपाल के दूसरे पड़ोसी देश चीन ने हिमालय की गोद में बसे इस देश में अपने पांव पसारने में तेजी दिखाई है. चीन सरकार तिब्बत के रास्ते बीजिंग को काठमांडू से जोड़ने की योजना पर पहले से ही काम कर रही है. नेपाल में चीन का यह प्रोजेक्ट साल 2022 तक पूरा होने की उम्मीद है. वहीं, चीन अपने ‘बेल्ट एंड रोड’ परियोजना के तहत भी नेपाल में विकास के कई काम करा रहा है. चीन के जवाब में भारत की रक्सौल से काठमांडू को रेल नेटवर्क से जोड़ने की योजना, दोनों देशों के संबंध सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा.

(इनपुट – एजेंसी)