
Gaurav Barar
गौरव बरार (Gaurav Barar) एक अनुभवी पत्रकार और कंटेंट विशेषज्ञ हैं जिनके पास 10 साल से ज्यादा का अनुभव है. वर्तमान में, इंडिया.कॉम में बतौर चीफ सब एडिटर अपनी सेवाएं ... और पढ़ें
Indore Water Deaths Case: इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में एक भीषण स्वास्थ्य त्रासदी सामने आई, जहां नगर निगम की पेयजल आपूर्ति लाइन में सीवेज का गंदा पानी मिल जाने से हड़कंप मच गया. इस घातक संदूषण के कारण अब तक कम से कम 10 लोगों की मौत हो चुकी है और 1400 से अधिक लोग गंभीर रूप से बीमार हैं.
शहर के अस्पतालों में डायरिया, उल्टी और पेट दर्द के मरीजों की बाढ़ आ गई है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. भागीरथपुरा की यह त्रासदी एक बड़ी तकनीकी लापरवाही और बुनियादी ढांचे की विफलता का परिणाम है.
अधिकारियों के अनुसार, नर्मदा पेयजल परियोजना की एक मुख्य पाइपलाइन भागीरथपुरा पुलिस चौकी के पास से गुजरती है. जांच में पाया गया कि यह पेयजल पाइपलाइन एक शौचालय और सीवेज लाइन के ठीक नीचे या उसके बगल से निकल रही थी. पाइपलाइन में रिसाव होने के कारण मानव मल से लदा सीवेज का पानी शुद्ध पेयजल आपूर्ति में मिल गया.
घनी आबादी वाले इस इलाके के घरों में नलों से जहरीला पानी पहुंचने लगा. स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे कई दिनों से पानी में बदबू और रंग बदलने की शिकायत कर रहे थे, लेकिन अधिकारियों ने समय पर ध्यान नहीं दिया. देखते ही देखते जनवरी की शुरुआत में हजारों लोग उल्टी, दस्त, पेट में ऐंठन और तेज बुखार की चपेट में आ गए.
प्रारंभिक लैब परीक्षणों ने इस बीमारी की मुख्य वजह का खुलासा कर दिया है. पानी के नमूनों में ई. कोली (E. coli) और क्लेबसिएला (Klebsiella) जैसे फेकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाए गए हैं.
ये बैक्टीरिया सामान्यतः मानव आंतों में पाए जाते हैं और वहां नुकसानदेह नहीं होते. लेकिन जब ये पीने के पानी के जरिए शरीर में प्रवेश करते हैं, तो संक्रमण का कारण बनते हैं. पानी में इनकी उपस्थिति इस बात का पुख्ता संकेत है कि पेयजल में सीधे तौर पर सीवेज का मिश्रण हुआ है.
इन बैक्टीरिया के घातक स्ट्रेन से एक्यूट गैस्ट्रोएंटेराइटिस होता है. इससे शरीर में पानी की भारी कमी हो जाती है. बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति सबसे अधिक खतरनाक होती है, क्योंकि अत्यधिक तरल पदार्थ की कमी से महत्वपूर्ण अंग काम करना बंद कर देते हैं, जिससे व्यक्ति की मौत हो सकती है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह त्रासदी प्रशासन की धीमी प्रतिक्रिया और खराब शहरी नियोजन का नतीजा है. पाइपलाइन में रिसाव के कारण हजारों लोग एक साथ इस बैक्टीरिया के संपर्क में आए, जिससे संक्रमण की तीव्रता बहुत अधिक थी. भागीरथपुरा जैसे घने बसे इलाकों में संक्रमण तेजी से फैलता है.
शिकायतों पर समय पर कार्रवाई न होने और शुरुआती लक्षणों को सामान्य पेट दर्द समझने के कारण कई मरीज तब अस्पताल पहुंचे जब उनकी स्थिति काफी बिगड़ चुकी थी.
मौतों का आंकड़ा बढ़ने के बाद प्रशासन अब युद्धस्तर पर पाइपलाइनों की सफाई कर रहा है और पानी की आपूर्ति के वैकल्पिक स्रोतों का उपयोग किया जा रहा है. हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जब तक मल के नमूनों की विस्तृत रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक शिगेला, साल्मोनेला या विब्रियो कोलेरा (हैजा) जैसे अन्य सीवेज बैक्टीरिया की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
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