देश के सबसे साफ शहर में 'गंदे' पानी का कहर, दूषित पानी पीने से 7 की मौत- 40 से ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती

मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी पीने से 7 लोगों की मौत हो गई. रिपोर्ट के अनुसार, पानी के जहरीले होने की वजह सीवेज का पानी, ड्रिंकिंग वाटर की पाइपलाइन में मिलने के चलते यह भयावह हादसा हुआ. इस घटना पर राज्य सरकार ने सख्त एक्शन लेते हुए 3 अधिकारियों को बर्खास्त किया है.

Published date india.com Published: December 31, 2025 1:13 PM IST
इंदौर में दूषित पानी पीने से 7 लोगों की मौत
इंदौर में दूषित पानी पीने से 7 लोगों की मौत, कई अस्पताल में भर्ती

देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के भागीरथपुरा इलाके से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरे देश को झकझोर दिया है. स्वच्छता में नंबर-1 के पायदान पर रहने वाले शहर में पीने के पानी ने ‘जहर’ का काम किया, जिससे कई परिवारों में मातम पसर गया है. इस घटना के सामने आते ही मध्य प्रदेश सरकार ने त्वरित कार्रवाई कर दो अधिकारियों को बर्खास्त, वहीं एक सब- इंजीनियर को सरकार ने टर्मिनेट किया है.

इंदौर में ‘जहरीले’ पानी का कहर

इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से मातम का माहौल है. नलों से आने वाले दूषित पानी ने देखते ही देखते महामारी का रूप ले लिया. स्थिति इतनी भयावह हो गई कि सैकड़ों लोग उल्टी और दस्त की चपेट में आ गए. लोकल संजीवनी क्लीनिकों और अस्पतालों में मरीजों की लंबी कतारें लगी हुई हैं. वहीं, स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं ताकि बीमारों की पहचान की जा सके.

दूषित पानी पीने से 7 लोगों की मौत

इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव के अनुसार, इस जल त्रासदी में अब तक 7 लोगों की जान जा चुकी है. घटनाक्रम पर गौर करें तो 24 दिसंबर के बाद से अचानक उल्टी और दस्त के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी. अब तक 40 से ज्यादा लोग गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि 1000 से अधिक लोग अपनी जांच करा चुके हैं. मरने वालों में बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं, जिनका शरीर पानी की कमी और संक्रमण को झेल नहीं पाया.

लोगों के शिकायत की अनदेखी?

इस पूरी घटना के पीछे नगर निगम प्रशासन की अनदेखी बड़ी वजह रही. स्थानीय निवासियों के अनुसार, वे पिछले 6 महीनों से गंदे और बदबूदार पानी की शिकायत कर रहे थे, लेकिन अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जिस नई पाइपलाइन के लिए 2.5 करोड़ रुपये का टेंडर 4 महीने पहले पास हो चुका था, उस पर काम ही शुरू नहीं किया गया.

सरकार ने 3 अधिकारियों के खिलाफ लिया सख्त एक्शन

मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कड़ा रुख अपनाया है. उन्होंने नगर निगम के 3 अधिकारियों को बर्खास्त किया है. एक जोनल अधिकारी और एक सहायक इंजीनियर (Assistant Engineer) को निलंबित (Suspend) किया गया, जबकि एक सब- इंजीनियर (Sub-engineer) को सरकार ने सेवा से टर्मिनेट किया है. इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये के मुआवजे का ऐलान किया है और एक 3 सदस्यीय जांच कमेटी बनाई है जो इस लापरवाही की तह तक जाएगी.

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घटना के पीछे की वजह

प्रारंभिक जांच में जो सामने आया वह बेहद डरावना है. भागीरथपुरा में पीने के पानी की मुख्य पाइपलाइन एक सार्वजनिक शौचालय के नीचे से गुजरती है. मुख्य लाइन में लीकेज होने के कारण शौचालय का गंदा पानी (सीवेज) नर्मदा के पीने वाले पानी में मिल गया. टूटी हुई पाइपलाइनों के कारण मल-मूत्र मिला हुआ पानी सीधे लोगों के घरों के किचन तक पहुंच रहा था, जिससे यह जानलेवा संक्रमण फैला.

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