अब आई अक्ल ठिकाने! चिनाब नदी के बहाव में 'अचानक बदलाव' से बेचैन हुआ पाकिस्तान, भारत से गिड़गिड़िया, की ये अपील

पाकिस्तान ने गुरुवार, 18 दिसंबर को चिनाब नदी (Chenab River) के बहाव में बदलाव पर चिंता जताई है. इस मामले पर स्पष्टीकरण मांगने के लिए भारत को एक पत्र भी भेजा है.

Published date india.com Published: December 19, 2025 6:24 AM IST
(प्रतीकात्मक तस्वीर)
(प्रतीकात्मक तस्वीर)

Indus Water Treaty: पहलगाम के बर्बर आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था. भारत ने पाकिस्तान का पानी नहीं रोका है लेकिन फिर भी पाकिस्तान पर इस फैसले का असर दिखने लगा है. सिंधु जल संधि के सस्पेंड होने के बाद से ही पाकिस्तान इसे फिर से बहाल करने के लिए भारत से बार-बार अपील कर चुका है. लेकिन, अब कुछ ऐसा हुआ है कि आतंक को पालने वाला पाकिस्तान गिड़गिड़ाने लगा है.

पाकिस्तान की ज्यादातर खेती सिंधु नदी प्रणाली (Indus River system) पर निर्भर करती है. भारत द्वारा संधि को सस्पेंड करने से पाकिस्तान असमान पानी के बहाव से परेशान है. पाकिस्तान को डर है उसकी गेंहू की फसल पानी के असमान बहाव के कारण चौपट हो सकती है.

पाकिस्तान ने गुरुवार, 18 दिसंबर को चिनाब नदी (Chenab River) के बहाव में बदलाव पर चिंता जताई है. इस मामले पर स्पष्टीकरण मांगने के लिए भारत को एक पत्र भी भेजा है. पाकिस्तान विदेश कार्यालय (FO) के प्रवक्ता ताहिर हुसैन अंद्राबी ने चिनाब नदी के बहाव में “अचानक बदलाव” पर चिंता जाहिर की है.

ताहिर हुसैन अंद्राबी ने कहा कि हमारे सिंधु जल आयुक्त ने अपने भारतीय समकक्ष को सिंधु जल संधि में बताए गए प्रक्रियाओं के अनुसार मामलों पर स्पष्टीकरण मांगने के लिए एक पत्र लिखा है. भारत द्वारा नदी के बहाव में कोई भी हेरफेर, खासकर हमारे कृषि चक्र के महत्वपूर्ण समय में, सीधे तौर पर हमारे नागरिकों के जीवन और आजीविका के साथ-साथ भोजन और आर्थिक सुरक्षा को खतरा है. हम भारत से पाकिस्तानी सिंधु जल आयुक्त द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देने, नदी के बहाव में किसी भी एकतरफा हेरफेर से बचने और सिंधु जल संधि के प्रावधानों के तहत अपने दायित्वों को पूरी तरह से पूरा करने का आग्रह करते हैं.

बता दें कि 1960 की सिंधु जल संधि के तहत, पाकिस्तान को सिंधु, चिनाब और झेलम नदियों के पानी पर अधिकार दिया गया था. ये नदियां बिना रोक-टोक के पाकिस्तान में बहती हैं. लकिन भारत के पास इन नदियों के पानी का इस्तेमाल बिजली बनाने जैसी गैर-खपत वाली गतिविधियों के लिए करने का अधिकार है. भारत ने नदी सिस्टम का बेहतर इस्तेमाल करने का फैसला किया है.

इसी साल अक्टूबर में, पर्यावरण मंत्रालय के एक एक्सपर्ट पैनल ने जम्मू और कश्मीर के रामबन जिले में चिनाब नदी पर प्रस्तावित सावलकोट हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट (Sawalkot hydroelectric project ) को एनवायरनमेंटल क्लीयरेंस दे दी. 1,856 मेगावाट की कैपेसिटी वाला सावलकोट प्रोजेक्ट, सिंधु और झेलम के साथ-साथ पश्चिमी नदियों में से एक, चिनाब नदी पर एक महत्वपूर्ण हाइड्रोपावर डेवलपमेंट है.

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1960 की सिंधु जल संधि अब स्थगित है और इसके बहाल होने के आसार भी नहीं दिखते. भारत ने यह साफ कर दिया है कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं हो सकते. भारत अगर अपने अधिकार वाले पानी के हिस्से को अपनी तरफ मोड़ेगा तो जम्मू और कश्मीर में खेती को बढ़ावा मिलेगा.

सावलकोट जैसे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को तेज करके और पश्चिमी नदियों के पानी के अपने कानूनी तौर पर मंजूर हिस्से का बेहतर इस्तेमाल करके भारत ने पाकिस्तान को कड़ा संदेश दे दिया है. मैसेज साफ है कि पाकिस्तान को भारत के खिलाफ साजिशें बंद करनी होगी अन्यथा चोट बेहद गहरी मिलेगी. गेंज अब पाकिस्तान के पाले में है.

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