पाकिस्तान की तरफ बहने वाली चिनाब नदी के पानी को मोड़ने की तैयारी शुरू, भारत ने बनाया ये खास प्लान

Chenab river: भारतीय विशेषज्ञों की टीम ने जम्मू, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में मौजूदा नहर संरचनाओं का आकलन करना भी शुरू कर दिया है.

Published date india.com Updated: June 7, 2025 12:41 PM IST
(AI से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर)
(AI से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर)

Indus Water Treaty: भारत ने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए जघन्य आतंकवादी हमले के बाद सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) को निलंबित कर दिया था. अब भारत एक ऐसा कदम उठाने जा रहा है जिससे पाकिस्तान को होश उड़ जाएंगे. भारत ने चिनाब-रावी-ब्यास-सतलज लिंक नहर परियोजना के निर्माण के लिए अध्ययन शुरू कर दिया है. भारत ने अब पाकिस्तान में बहने वाले चिनाब के पानी को मोड़ने का मन बना लिया है.

चिनाब-रावी-ब्यास-सतलज लिंक नहर परियोजना में चिनाब से 15-20 मिलियन एकड़ फीट (एमएएफ) पानी को भारतीय राज्यों पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में पहुंचाने का प्रस्ताव है. भारतीय विशेषज्ञों की टीम ने जम्मू, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में मौजूदा नहर संरचनाओं का आकलन करना भी शुरू कर दिया है.

चिनाब-रावी-ब्यास-सतलज लिंक नहर परियोजना के अलावा भारत ने इन पहलों का समर्थन करने के लिए कई नई भंडारण और नदी-प्रवाह परियोजनाओं पर भी तेजी से काम करना शुरू कर दिया है. बता दें कि सिंधु जल संधि के तहत भारत को गैर-उपभोग उद्देश्यों के लिए 20% तक पानी का उपयोग करने की अनुमति थी.

सिंधु जल संधि पर 1960 में हस्ताक्षर किए गए थे. यह संधि भारत-पाकिस्तान के बीच छह नदियों, सिंधु, झेलम, चिनाब, रावी, व्यास और सतलुज, के पानी के बंटवारे को नियंत्रित करती है. भारत द्वारा इसे निलंबित करने के फैसले के बाद से ही पाकिस्तान बौखलाया हुआ है और भारत से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह कर रहा है.

पाकिस्तान बर्बाद हो जाएगा अगर…

पाकिस्तान के पानी का तीन-चौथाई हिस्सा देश के बाहर से आता है. एक बड़ी आबादी जीवन के लिए सिंधु जल बेसिन पर निर्भर है. पाकिस्तान की 90 प्रतिशत फसलें इसी पानी पर निर्भर हैं. पाकिस्तान की सभी बिजली परियोजनाएं और बांध सिंधु नदी पर ही बने हैं. पाकिस्तान को अब भारत के सख्त रुख की अहमियत समझ आने लगी है. यही कारण है कि पाकिस्तान ने भावी संकट को देखते हुए भारत से मदद की गुहार लगाई है. पाकिस्तान के जल संसाधन मंत्रालय ने भारत के जल शक्ति मंत्रालय को इस संबंध में एक पत्र भी लिखा है. इसमें कहा गया है कि इस फैसले से पाकिस्तान में संकट खड़ा हो जाएगा.

दूसरी तरफ भारत ने पहले ही साफ कर दिया है कि खून और पानी साथ नहीं बह सकते हैं. भारत अब सिंधु, चिनाब और झेलम नदियों के पानी का अपने लिए इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है. इस पर तुरंत काम शुरू कर दिया गया है. इसके अलावा, मध्यकालिक और दीर्घकालिक योजनाओं को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है.

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