नई दिल्लीः विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य में शुक्रवार को लगी आग से ‘बहादुरी से’ लड़ते हुए नौसेना के 30 साल के एक अधिकारी की मौत हो गई. यह हादसा उस वक्त हुआ जब वह कर्नाटक के कारवार स्थित हार्बर में दाखिल हो रहा था. नौसेना ने कहा कि लेफ्टिनेंट कोमोडोर डी एस चौहान के ‘हिम्मती प्रयासों’ के कारण आग 44500 टन के पोत की लड़ाकू क्षमता को बड़ी क्षति नहीं पहुंचा सकी.

मध्यप्रदेश के रतलाम के रहने वाले चौहान की पिछले महीने ही शादी हुई थी. उनके परिवार में उनकी मां और पत्नी हैं. नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनीला लांबा ने अपने शोक संदेश में कहा, ‘हम उनके साहस और कर्तव्यनिष्ठा को सलाम करते हैं और यह सुनिश्चित करने का पूरा प्रयास करेंगे कि उनका बलिदान बेकार नहीं जाए. हम हमेशा और हर समय उनके परिवार के साथ खड़े रहेंगे.’

नौसेना ने एक बयान में कहा कि आईएनएस विक्रमादित्य में शुक्रवार की सुबह आग उस समय लगी जब पोत कारवार में हार्बर में प्रवेश कर रहा था. नौसेना ने एक बयान में कहा कि तेजी से कदम उठाते हुए पोत के चालक दल ने आग पर काबू पाया, जिससे इसकी लड़ाकू क्षमता को कोई गंभीर नुकसान नहीं पहुंचा.

घटना किन वजहों से और किन परिस्थितियों में हुई, इस बात की जांच के लिए एक ‘बोर्ड ऑफ एन्क्वायरी’ के आदेश दे दिए गए हैं. नौसेना ने कहा, ‘लेफ्टिनेंट कोमोडोर डी एस चौहान ने प्रभावित अपार्टमेंट में आग बुझाने के प्रयासों का बहादुरी से नेतृत्व किया. आग पर तो काबू पा लिया गया, आग की लपटों और धुएं के कारण अधिकारी बेहोश हो गए.’ उन्होंने कहा कि उन्हें तुरंत इलाज के लिए कारवार स्थित नौसैनिक अस्पताल ले जाया गया. हालांकि, उनकी जान नहीं बचाई जा सकी. आईएनएस विक्रमादित्य को नवंबर 2013 में रूस के सेवेरोदविंसक में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था.