जयपुर: जयपुर साहित्य महोत्सव में बोलते हुए मशहूर लेखक यान मार्टेल ने अपने विचार साझा करते हुए बताया कि दो किताबें लिखने के बाद उन्हें कोई नया विचार सूझ ही नहीं रहा था और फिर मुंबई प्रवास के दौरान अचानक से उन्हें ‘‘लाइफ ऑफ पाई’’ का खयाल आया. ‘मैन बुकर’ से सम्मानित लेखक ने जयपुर साहित्य महोत्सव में ‘‘लाइफ ऑफ पाई’’ के लिए भारत को प्रेरणा का बड़ा स्रोत बताया. उन्होंने कहा कि मुंबई के पास एक हिल स्टेशन में एक चट्टान पर खड़े रहने के दौरान उनके मन में किताब का बुनियादी विचार आया था. यान मार्टेल का कहना है उन्हें भारत से हमेशा एक नई सोच मिलती है.

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एक झटके में विचार कौंधा
उन्होंने कहा मैं मुंबई के पास हिल स्टेशन में चट्टान पर खड़े होकर देख रहा था. मैंने खुद से कहा मैं तीस साल से ज्यादा का हो चुका हूं. दो किताबें लिख चुका हूं और उनसे कुछ हासिल नहीं हुआ मैं थक गया हूं. लेखक ने कहा मैं चट्टान पर था तभी एक धांसू विचार मेरे दिमाग में आया. इससे मेरा ध्यान एक उपन्यास पर गया जिसे मैं पूरी तरह भूल चुका था. मैंने सोचा कि उसपर कुछ कर सकता हूं और फिर एक झटके में मुझे ‘लाइफ ऑफ पाई’ का विचार कौंधा. मार्टेल ने जिस उपन्यास का जिक्र किया, वह था ब्राजील के लेखक मोआसिर स्केलेयर का उपन्यास ‘‘मैक्स एंड कैट्स’’.

लेखक ने कहा कि एक समय जब उन्हें कुछ नहीं सूझ रहा था, कुछ नया विचार आ नहीं रहा था, उस वक्त उन्हें भारत से प्रेरणा मिली. भारत के लिए 55 वर्षीय लेखक का प्यार कोई नया नहीं है. उनका कहना है कि उन्हें यहां से हमेशा एक नयी सोच मिलती है. कई बार भारत आ चुके लेखक ने कहा कि भारत में जितनी विविधता है ऐसी उन्होंने कहीं नहीं देखी. मशहूर उपन्यास ‘लाइफ ऑफ पाई’ में 16 साल के एक लड़के की कहानी है, जो नौका पर एक बाघ के साथ समुद्र में फंस जाता है. इस पर 2012 में एक फिल्म भी बनी जिसने चार श्रेणियों में ऑस्कर पुरस्कार जीता था. (भाषा इनपुट)

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