नई दिल्ली: दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना ‘आयुष्मान भारत’ की शुरुआत इस साल स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त को की जा सकती है. केंद्र सरकार ने एक फरवरी को पेश आम बजट 2018-19 में इस योजना की घोषणा की थी. योजना के तहत देश के करीब 10 परिवारों को पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा दिया जाएगा. इस योजना ने गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों के लिए 2008 में पेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा की जगह ली है, जिसमें 30,000 रुपये का सालाना बीमा कवर दिया गया था. अमेरिका में ओबामा केयर के तर्ज पर घोषित योजना को ‘मोदी केयर’ नाम दिया जा रहा है. इस योजना से देश के गरीब तबके के करीब 50 करोड़ लोगों को फायदा पहुंचने की उम्मीद है.

सरकार इस योजना को 15 अगस्त से लागू करने की तैयारी में है. इसे लेकर पिछले हफ्ते स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने एक बैठक की थी. इसमें प्रीमियम और पॉलिसी की शर्तों को लेकर चर्चा की गई. इस योजना को क्रियान्वित करने को लेकर विभिन्न बीमा कंपनियों से सुझाव भी मांगे गए हैं. इस बीमा में किन-किन बीमारियों को कवर किया जाएगा, इस पर भी विस्तार से चर्चा की गई.

गौरतलब है कि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस बार बजट भाषण में स्वास्थ्य बीमा योजना की घोषणा करके एक बहुत बड़ा चुनावी दांव खेला है. इस योजना के तहत देश के 50 करोड़ लोगों को इलाज के लिए 5 लाख रुपए तक की कैशलेस सुविधा का देने की घोषणा की है. अगर यह योजना अमल में आती है तो ये मोदी सरकार के लिए गए फैसलों में सबसे अहम फैसला होगा. 50 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ दिया जाना यानी देश में स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक नया इतिहास लिखा जा सकता है. चुनाव से पहले मोदी सरकार का ये दांव बहुत अहम हो सकता है.

ओबामा की तर्ज पर मोदी केयर
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी नीतियों और फैसलों को लेकर ओबामा से काफी प्रभावित रहे हैं. इस बार बजट में जिस तरह से 50 करोड़ लोगों के लिए 5 लाख तक कैशलेस सुविधा का एलान किया गया है वो भी कहीं ना कही उसी ओबामा केयर की तर्ज पर देशवासियों को लाभ पहुंचाने का फैसला लगता है. ओबामा की पहल पर अमेरिका की स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े बदलाव किए गए थे जिसे अमेरिका के हेल्थकेयर सिस्टम में अब तक का सबसे अहम बदलाव माना गया था. इसका अहम पहलू ये था कि स्वास्थ्य सेवाओं पर किए जाने वाले खर्च में कमी आए, कानूनी अधिकार के तहत स्वास्थय बीमा का दायरा बढ़े और कम कीमत पर बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध हो सके.

राष्ट्रपति बराक ओबामा ने मार्च 2013 में पेशेंट प्रोटेक्शन एंड अर्फोडेबल केयर एक्ट यानि पीपीएसीए पर हस्ताक्षर किए थे. ये एक्ट अर्फोडेबल केयर एक्ट के नाम से भी जाना जाता है. हालांकि इसे लेकर आलोचकों का मानना था कि ओबामा केयर से हेल्थ कंपनियों के साथ-साथ दूसरे सरकारी और निजी कंपनियां दोनों ही शामिल हैं, उनके लिए अमेरिका में व्यापार करने की लागत में बढ़ोतरी होगी. वहीं ओबामा के समर्थकों ने इसे स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय पहल माना था.

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योजना पर विपक्ष ने उठाए सवाल
आयुष्मान भारत को राज्य और केंद्र सरकार को मिलकर लागू करना है. योजना के तहत प्रीमियम की 40 फीसदी राशि राज्यों को जबकि 60 फीसदी राशि केंद्र सरकार को देनी है. सरकार ने इस बजट में इसके लिए दो हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. इसी को लेकर उसकी आलोचना हो रही है. जानकार कह रहे हैं कि इतनी कम राशि इतनी बड़ी बीमा योजना को कैसे शुरू किया जा सकता है, वहीं विपक्ष का कहना है कि सरकार ने यह योजना बीमा कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए शुरू की है. इससे स्वास्थ्य सेक्टर की स्थिति खराब होगी वहीं बीमा कंपनियां और निजी अस्पताल खूब कमाएंगे.