नई दिल्ली: केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को कहा कि देश के स्वास्थ्य देखभाल संस्थानों को धार्मिक समूहों और सीएसआर कार्यक्रमों से अनुदान मिलता है, जबकि अन्य देशों में संस्थानों को भारी मात्रा में अनुदान मिलता है. जेटली ने यहां एम्स के एक कार्यक्रम में कहा, ‘ज्यादा अंतर्राष्ट्रीय अस्पतालों को भारी मात्रा में अनुदान प्राप्त होते हैं, जबकि भारत में सामाजिक क्षेत्र को सामुदायिक आधार पर अनुदान मिलता है, सिवाय इस नई शुरुआत के जब हमने पिछले चार सालों से कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) कार्यक्रम शुरू किया है.’

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कंपनी अधिनियम 2013 के तहत मुनाफे में चल कुछ विशेष श्रेणी की कंपनियों को अपने तीन साल औसत मुनाफे का कम से कम 2 फीसदी सीएसआर पहल में खर्च करना होता है. वित्त मंत्री ने यह भी ध्यान दिलाया कि भारत में दान अभी भी बड़े पैमाने पर सामाजिक बंदोबस्त पर ही निर्भर है, जबकि विकसित देशों में अस्पतालों को उत्तराधिकार कर जैसे कारकों से भी अनुदान प्राप्त होता है.

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उन्होंने कहा, ‘अधिकांश अंतरराष्ट्रीय अस्पतालों को भारी मात्रा में अनुदान मिलता है. अधिकांश विदेशी शैक्षणिक संस्थानों को भारी मात्रा में अनुदान मिलता है. इन शैक्षणिक संस्थानों को ये अनुदान उनके पूर्व छात्रों से मिलता है जो इन संस्थानों की वजह से अपने जीवन में लाभ हुआ होता है. जीवन में सफल होने के बाद वे अपने संस्थानों को दान देकर मदद करते रहते हैं. भारत में कुछ आईआईटीज ने इस तरह का प्रयोग शुरू किया है, लेकिन अब भी यह बड़े स्तर पर नहीं है.