नई दिल्ली. दुनियाभर में जहां बाघ की संख्या कम हो रही है, वहीं भारत में जंगल के इस बड़े जानवर की तादाद में बढ़ोतरी देखी गई है. भारत में बाघों की गिनती की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश में इस जानवर की संख्या अब 3 हजार के पास पहुंच गई है. महज एक दशक पहले बाघों की संख्या में चिंताजनक गिरावट के बाद शुरू किए गए टाइगर प्रोजेक्ट के लिए यह आंकड़ा निश्चित रूप से बेहतरीन है कि भारत में अब 2977 बाघ हैं. 2006 में देश में सिर्फ 1411 बाघ ही बचे थे. इसके बाद केंद्र और राज्य सरकारों के प्रयास और वन्यप्राणियों के संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाली एजेंसियों के सहयोग से बाघों की संख्या यह वृद्धि हुई है.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को अखिल भारतीय बाघ अनुमान रिपोर्ट 2018 जारी किया. इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि देश आज दुनिया में बाघों के लिए सबसे सुरक्षित और सबड़े बड़े पर्यावास क्षेत्रों में से एक के रूप में उभर कर सामने आया है. रिपोर्ट के अनुसार, देश में बाघों की संख्या 2019 में 2977 हो गई है. मोदी ने कहा, ‘‘आज हम गर्व के साथ कह सकते हैं कि भारत करीब 3 हज़ार बाघों के साथ दुनिया के सबसे बड़े और सबसे सुरक्षित पर्यावास में से एक है.’’ उन्होंने कहा कि विकास या पर्यावरण की चर्चा पुरानी है. हमें सहअस्तित्व को भी स्वीकारना होगा और सहयात्रा के महत्व को भी समझना होगा.

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ मैं महसूस करता हूं कि विकास और पर्यावरण के बीच स्वस्थ संतुलन बनाना संभव है. हमारी नीति में, हमारे अर्थशास्त्र में, हमें संरक्षण के बारे में संवाद को बदलना होगा.’’ उन्होंने कहा कि बीते पांच वर्षों में जहां देश में अगली पीढ़ी के आधारभूत ढांचे के लिए तेजी से कार्य हुआ है, वहीं भारत में वन क्षेत्र का दायरा भी बढ़ रहा है. देश में संरक्षित क्षेत्रों की संख्या में भी वृद्धि हुई है. मोदी ने कहा कि 2014 में भारत में संरक्षित क्षेत्रों की संख्या 692 थी जो 2019 में बढ़कर अब 860 से ज्यादा हो गई है. साथ ही सामुदायिक संरक्षित क्षेत्रों की संख्या भी साल 2014 के 43 से बढ़कर अब सौ से ज्यादा हो गई है.

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ मैं इस क्षेत्र से जुड़े लोगों से यही कहूंगा कि जो कहानी ‘एक था टाइगर’ के साथ शुरू होकर ‘टाइगर जिंदा है’ तक पहुंची है, वो वहीं न रुके. केवल ‘‘टाइगर जिंदा है’’, से काम नहीं चलेगा. बाघ संरक्षण से जुड़े जो प्रयास हैं उनका और विस्तार होना चाहिए, उनकी गति और तेज की जानी चाहिए.’’ उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि भारत आर्थिक एवं पर्यावरण के दृष्टिकोण से समृद्ध होगा . भारत अधिक संख्या में सड़कें बनाएगा और देश में अधिक संख्या में स्वच्छ नदियां होंगी . भारत में अधिक रेल सम्पर्क होगा और अधिक संख्या में वृक्षों का दायरा बढ़ेगा.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, 2006 में देश में बाघों की गिनती में जबर्दस्त गिरावट देखी गई थी. इसके बाद इस जंगली जीव के संरक्षण के सकारात्मक प्रयास शुरू किए गए. इन प्रयासों का नतीजा था कि 2010 की बाघ गणना रिपोर्ट में देश में इस जीव की संख्या 1411 से बढ़कर 1706 हो गई. वर्ष 2014 में जब बाघों की फिर से गिनती की गई, तो इसमें और भी उत्साहवर्द्धक परिणाम सामने आए. उस साल देश में कुल 2226 बाघ पाए गए थे. इसके 4 साल बाद 2018 में (जिसकी रिपोर्ट सोमवार को आई) देश में कुल 2977 बाघ होने के प्रमाण है.

(इनपुट – एजेंसी)