नई दिल्ली. आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है. सोशल मीडिया के इस युग में अपनी रिश्तेदारों, सहेलियों और सहयोगी महिलाओं को शुभकामनाओं वाले संदेश भेजने के साथ ही कार्ड, चॉकलेट, फूल और अन्य उपहार देने की तैयारियां जोरों पर हैं. हालांकि इस बात से बहुत ज्यादा लोग वाकिफ नहीं हैं कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस आखिर क्यों और कब से मनाया जाता है. 2019 में मनाए जाने वाले महिला दिवस का थीम ‘बेहतर के लिए संतुलन’ यानी #BalanceforBetter रखा गया है. महज तीन शब्दों का यह समूह एक उम्मीद जगाता है कि हमारा समाज महिलाओं के दोयम दर्जे के जिस इतिहास के साथ जी रहा है, उसका वर्तमान वैसा न हो. हमारा भविष्य समानता का हो, संतुलन का हो.

दरअसल, साल 1908 में एक महिला मजदूर आंदोलन की वजह से महिला दिवस मनाने की परंपरा की शुरुआत हुई. इस दिन 15 हज़ार महिलाओं ने नौकरी के घंटे कम करने, बेहतर वेतन और कुछ अन्य अधिकारों की मांग को लेकर न्यूयॉर्क शहर में प्रदर्शन किया. एक साल बाद सोशलिस्ट पार्टी ऑफ़ अमेरिका ने इस दिन को पहला राष्ट्रीय महिला दिवस घोषित किया. 1910 में कोपेनहेगन में कामकाजी महिलाओं का एक अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन हुआ, जिसमें इस दिन को अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस के तौर पर मनाने का सुझाव दिया गया और धीरे-धीरे यह दिन दुनियाभर में अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में लोकप्रिय होने लगा.

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इस दिन को अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मान्यता 1975 में मिली, जब संयुक्त राष्ट्र ने इसे एक थीम के साथ मनाने की शुरुआत की. बहरहाल, हर साल 8 मार्च को जब महिलाओं के नाम पर यह दिवस मनाया जाता है, देश से लेकर विदेशों तक में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, तो महिलाओं के अधिकार और समाज में उनके समानता की बात उठती है. लेकिन ये सारी बातें महज बातें ही रह जाती हैं, क्योंकि इस एक दिन के बाद सालोंभर महिलाओं के साथ अत्याचार या भेदभाव की खबरों के आने का क्रम रुकता नहीं है. इन खबरों को रोकने की जरूरत है और ऐसी स्थितियां पनपे ही नहीं, इसको लेकर गंभीर होना जरूरी है.

(इनपुट – एजेंसी)