दिल्ली विश्वविद्यालय में गुरमेहर कौर के बयानों पर मचे बवाल और 22 फरवरी की घटना को विस्तृत रुप से जानने के लिए इंडिया.कॉम ने एबीवीपी राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख श्रीरंग से विशेष बातचीत की।Also Read - DU Exam Update: कोरोना की वजह से परीक्षा से चूकने वाले छात्रों को एक और मौका, जानिये दिल्ली विश्वविद्यालय का ताजा फैसला

श्रीरंग ने बताया, दिल्ली विश्विद्यालय के रामजस कॉलेज में 21 फरवरी को दो दिन का एक प्रोग्राम था जिसमें जेनयू विद्यार्थी उमर खालिद को गेस्ट के तौर पर बुलाया गया था. 21 फरवरी को कोई विवाद नहीं हुआ। विषय खत्म हुआ। 22 फरवरी के दिन खालिद समेत काफी बाहर के छात्र- छात्राएं रामजस कैंपस में आए जिसमें जामिया , आईपी और अम्बेडकर यूनिवर्सिटी के कई छात्र और उनकी जैसी विचारधारा रखने वाले कुछ प्रोफेसर भी इकट्ठे हुए। और वहां उन्होंने देश विरोधी नारे लगाने शुरु किए। मुद्दा यही है, और मामला यहीं से शुरु हुआ. Also Read - Delhi University Merit List 2021: आज जारी होगी डीयू पीजी दाखिले की दूसरी मेरिट लिस्ट, ऐसे करें चेक

जेनयू जैसा नहीं बनने देंगे Also Read - DU Admission 2021: अंडर-ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय विशेष कट-ऑफ सूची जारी करेगा

रामजस कॉलेज के छात्रों ने ही सबसे पहले इसका विरोध किया। उन्होंने कहा, हम अपने कैंपस को जेनयू जैसा नहीं बनने देंगे। उनके कॉलेज में कश्मीर मांगे आजादी…और भी कई देशविरोधी नारे लगने लगे तो रामजस के छात्रों ने इसका विरोध किया। यही नहीं बाहरी छात्रों ने रैली भी निकालने की कोशिश की, उन्होंने कहा कि हम रैली के रुप में मौरिस नगर थाने तक जाएंगे। रामजस के छात्रों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। वहीं धक्का -मुक्की शुरु हुई। बवाल बढ़ता देख एबीवीपी से मदद मांगी गई। हमें भी लगा कि हमारी यूनिवर्सिटी के किसी भी स्टूडेंट को किसी तरह का कोई नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए.

आप खुद ही सोचिए अगर किसी एक भी छात्र या छात्रा पर किसी तरह का कोई केस है तो संस्थान उसे  डूसू चुनाव (दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ) का नॉमिनेशन तक भरने नहीं देते। और यहां एक ऐसा जेनयू स्टूडेंट जिस पर देशद्रोह का मुकदमा चल रहा है उससे आप यहां बुलाकर छात्र- छात्राओं को ज्ञान दिलवाओगे, उसे आदर्श बनाकर प्रस्तुत करोगे। उसे हीरो बनाओगे। ये रामजस के स्टूडेंट्स ग्रुप को अखरा। और इसी वजह से उन्होंने इसका विरोध किया, और हमें उनका ये तथ्य ठीक लगा इसलिए हमने उनका समर्थन किया। ये सब होने के बाद कॉलेज के प्रिंसिपल ने प्रोग्रम कैंसल कर दिया।

राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख श्रीरंग

मारपीट का आरोप बेबुनियाद

कुछ ने हम पर मारपीट पर आरोप भी लगाए। हमने कितनी बार कहा अगर हमारे छात्राओं ने मारपीट की है तो हमें उसका कोई सबूत तो दिखाओ।अखबारों के पहले पेज पर जो मारपीट करते हुए फोटो छापा था और उस पर एबीवीपी कार्यकर्ता लिखा था वो प्रशांत मुखर्जी निकला जो एसएफआई दिल्ली से संबंध रखता था। वो हाथ में रॉड लेकर मारपीट कर रहा था। उसकी फोटो हमें मिली है। उनकी छात्रा मार रही है उसकी फुटेज हमें मिली है। इसलिए मारपीट हुई सिर्फ कहने से नहीं होता है। न ही आरोप लगाने से कुछ होता है।

गुरमेहर कौर ने अपनी शिकायत दर्ज करवाने में इतनी देर क्यों लगाई

ऐसा ही आरोप लेडी श्रीराम कॉलेज की छात्रा गुरमेहर कौर भी लगा रही थी। हमने उसे बहुत बार कहा कि पुलिस के पास जाकर अपनी शिकायत दर्ज करवाए लेकिन वो नहीं गई। हम पुलिस के पास गए उसकी तरफ से। हमने गुरमेहर से कहा, अगर आपको कोई धमकी दे रहा है, कोई परेशान कर रहा है तो उसके खिलाफ शिकायत करें और अगर आप एबीवीपी पर किसी तरह का कोई बेबुनियाद आरोप लगा रहीं हैं तो उसका कोई सबूत लाइए। दूध का दूध पानी का पानी सामने आ जाएगा। हमने तो पुलिस के सामने ये तक कहा अगर एबीवीपी के किसी कार्यकर्ता ने ऐसी कोई हरकत की है तो उसको सामने लाया जाए। उसको कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।

गुरमेहर की सोची समझी रणनीति थी

हमें तो बाद में यह भी पता चला कि गुरमेहर ने सारे मैसेज डिलीट कर दिए। अगर किसी लड़की को छेड़छाड़ और धमकी भरे मैसेज आते हैं तो क्या वो पुलिस के पास नहीं जाएगी। जब उसने बात को बढ़ते देखा तब वो पुलिस के पास गई। दिल्ली के प्रतिष्ठित कॉलेज में पढ़ने वाली छात्रा क्या इतना वक्त लगाती है शिकायत दर्ज करवाने में,  क्योंकी वो जाना ही नहीं चाहती थी। गुरमेहर के बारे में कई रिपोर्टस मीडिया में आई उनके पिता कारगिल युद्ध में शहीद नहीं हुए थे। कोई कह रहा है उसके आम आदमी पार्टी के साथ कनेक्शन हैं। ऐसी अलग-अलग बातें सुनने में आ रही है। ये सब पहले से उनकी रणनीति है। षडयंत्र है। गुरमेहर ने इसे अच्छी तरह से भुनाया है।

गुरमेहर ने इस आंदोलन से अलग होकर अच्छा फैसला लिया है। क्योंकि अगर वो इस आंदोलन में ज्यादा दिन तक रह जाती तो एक्सपोज हो जाती। ये बात उसे पता थी। गुरमेहर को क्या पता नहीं था कि उसके पिता किस युद्ध में शहीद हुए थे। कारगिल युद्ध कब हुआ था। हालांकि जनता ने भी गुरमेहर का विरोध किया। वो समझ गई थी, अब इस तरह के दुष्प्रचार का काम ज्यादा दिन तक चल नहीं पाएगा। इसलिए उसने अलग होने का फैसला किया।गुरमेहर के साथ हमारी सहानूभूति है। उन्हें कभी भी कोई भी समस्या हो तो हम उनके साथ खड़े हैं। लेकिन बिना किसी सबूत के एबीवीपी को बदनाम करने की कोशिश मत करो।

एबीवीपी कार्यकर्ता प्रेरणा भारद्वाज के कपड़े फाड़े गए

इस झगड़े के दौरान हमारे कार्यकताओं को भी मारा गया। हमारी कार्यकर्ता प्रेरणा भारद्वाज की छाती में घूसे मारे गए। ऐसा सबके साथ हुआ है। जब भीड़ में मारपीट होती है तो उसका कोई चेहरा नहीं होता है। कुछ लोग जान बूझकर एबीवीपी को विलेन बनाने पर तुले हैं। हम चाहते हैं इस मामले में जल्द से जल्द चार्जशीट दायर होनी चाहिए। और जो भी अपराधी हैं उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। आप खुद ही बताइए ना, देशद्रोही नारे कौन सहन कर सकता है। और क्या ये अभिव्यक्ति की आजादी है? इसके नाम पर आप देश को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हो। शहीदों का अपमान कर रहे हो। इसके लिए विद्यार्थी परिषद लड़ रही है।