नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने आज आईएनएक्स मीडिया घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार और धनशोधन मामलों में वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी. इसके बाद सीबीआई पी. चिदंबरम के घर पहुंच गई, लेकिन वह घर पर नहीं मिले. इसके बाद सीबीआई वापस लौट आई. जमानत याचिका होने के बाद चिदंबरम पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है. जमानत याचिका खारिज होने के बाद सीबीआई ने जो रुख दिखाया है, उससे लग रहा है कि चिदंबरम को किसी भी समय गिरफ्तार किया जा सकता है.

बता दें कि आज दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुनील गौड़ ने चिदंबरम को राहत देने से इनकार कर दिया. सीबीआई ने 15 मई 2017 को एक प्राथमिकी दर्ज करते हुए आरोप लगाया था कि वित्त मंत्री के रूप में चिदंबरम के कार्यकाल के दौरान 2007 में 305 करोड़ रुपए का विदेशी धन प्राप्त करने के लिए मीडिया समूह को दी गई एफआईपीबी मंजूरी में अनियमितताएं हुई थीं. ईडी ने 2018 में इस संबंध में धनशोधन का मामला दर्ज किया था.

न्यायमूर्ति सुनील गौर ने 25 जनवरी को इस मामले में अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था. जिरह के दौरान सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय दोनों ने ही चिदंबरम की अर्जी का इस आधार पर विरोध किया था कि उनसे हिरासत में पूछताछ जरूरी है क्योंकि वह सवालों से बच रहे हैं. दोनों जांच एजेंसियों ने दलील दी थी कि चिदंबरम के वित्तमंत्री के तौर पर कार्यकाल के दौरान मीडिया समूह को 2007 में विदेश से 305 करोड़ रुपए की धनराशि प्राप्त करने के लिए एफआईपीबी मंजूरी प्रदान की गई थी.

प्रवर्तन निदेशालय ने दलील दी कि जिन कंपनियों में धनराशि हस्तांतरित की गई वे सभी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर चिदंबरम के पुत्र कार्ति द्वारा नियंत्रित हैं और उनके पास यह मानने का एक कारण है कि आईएनक्स मीडिया को विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) मंजूरी उनके पुत्र के हस्तक्षेप पर प्रदान की गई. बता दें कि हाईकोर्ट ने 25 जुलाई 2018 को चिदंबरम को दोनों ही मामलों में गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया था, जिसे समय समय पर बढ़ाया गया.