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INX Media Case: चिदंबरम को जमानत तो मिल गई लेकिन जेल से अभी छूट नहीं पाएंगे, मामला बेहद पेचीदा है
शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि उसके आदेश का किसी भी अन्य कार्यवाही पर कोई असर नहीं होगा. और यहीं मामला फस गया.
नई दिल्ली: पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में दो महीने हिरासत में बिताने के बाद उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया लेकिन वह अभी रिहा नहीं हो सकेंगे क्योंकि इससे संबंधित धन शोधन के मामले में वह प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत में हैं. कांग्रेस के 74 वर्षीय वरिष्ठ नेता चिदंबरम को केन्द्रीय जांच ब्यूरो ने 21 अगस्त को उनके जोर बाग स्थित आवास से गिरफ्तार किया था. सीबीआई की पूछताछ के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया. इस बीच, विशेष अदालत ने 18 अक्टूबर को धन शोधन के मामले में चिदंबरम को 24 अक्टूबर तक के लिये प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत में दे दिया.
न्यायमूर्ति आर भानुमति, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने मंगलवार को पूर्व मंत्री पी चिदंबरम की याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय के 30 सितंबर का फैसला निरस्त करते हुये उन्हें जमानत देने का निर्णय सुनाया. पीठ ने कहा कि वह न तो ‘भागने के जोखिम’ वाले हैं और न ही मुकदमे की सुनवाई से उनके भागने की आशंका है. बहरहाल, शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि उसके आदेश का किसी भी अन्य कार्यवाही पर कोई असर नहीं होगा. पीठ ने चिदंबरम को कुछ शर्तो के साथ जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है. इनमें उन्हें एक लाख रूपए का मुचलका और इतनी ही राशि के दो जमानती देने के साथ ही अपना पासपोर्ट विशेष अदालत में जमा करना होगा. पीठ ने कहा कि विशेष अदालत की अनुमति के बगैर वह देश से बाहर नहीं जायेंगे. इसके अलावा वह उन आदेशों के दायरे में भी होंगे जो विशेष अदालत समय समय पर देगी.
न्यायालय ने सीबीआई के इस दावे को दरकिनार कर दिया कि 74 वर्षीय चिदंबरम ने इस मामले में दो प्रमुख गवाहों को प्रभावित करने का प्रयास किया था. न्यायालय ने कहा कि ऐसा कोई विवरण उपलब्ध नहीं है कि ‘कब, कहां और कैसे इन गवाहों से संपर्क किया गया.’’ चिदंबरम द्वारा गवाहों को प्रभावित करने संबंधी सीबीआई के दावों के संबंध में पीठ ने कहा, ‘‘इन दो गवाहों से एसएमएस, ईमेल, पत्र या टेलीफोन काल के माध्यम से संपर्क करने के तरीके और इन गवाहों से संपर्क करने वाले व्यक्तियों का कोई विवरण नहीं है.’’
पीठ ने कहा कि जांच ब्यूरो के अनुसार चिदंबरम ने गवाहों को प्रभावित किया और आगे भी प्रभावित किये जाने की आशंका पूर्व वित्त मंत्री को जमानत से इंकार करने का आधार नहीं हो सकती जबकि निचली अदालत में उनकी हिरासत के लिये दाखिल छह आवेदनों में कहीं भी इस तरह की कोई सुगबुगाहट तक नहीं है. पीठ ने अपने फैसले में कहा, ‘‘अपीलकर्ता (चिदंबरम) द्वारा गवाहों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करने के बारे में अपीलकर्ता के खिलाफ कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है.’’
केन्द्रीय जांच ब्यूरो ने भ्रष्टाचार के मामले में चिदंबरम को 21 अगस्त को गिरफ्तार किया था. जांच ब्यूरो ने यह मामला 15 मई, 2017 को दर्ज किया था. यह मामला 2007 मे वित्त मंत्री के रूप में पी चिदंबरम के कार्यकाल में विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड द्वारा आईएनएक्स मीडिया को 305 का विदेशी निवेश प्राप्त करने की मंजूरी में हुयी कथित अनियमितताओं से संबंधित है. पीठ ने अपने फैसले में कहा, ‘‘ ‘‘इस समय हमारे लिये यह संकेत देना जरूरी है कि हम सालिसीटर जनरल की इस दलील को स्वीकार करने में असमर्थ हैं कि आर्थिक अपराधियों के ‘‘भागने के जोखिम’’ को एक राष्ट्रीय चलन के रूप में देखा जाना चाहिए और उनके साथ उसी तरह पेश आना चाहिए क्योंकि अन्य चुनिन्दा अपराधी देश से भाग गये हैं.’’
पीठ ने कहा कि किसी आरोपी के भागने के जोखिम का आकलन असंबद्ध मामलों से प्रभावित हुये बगैर ही मामले विशेष के आधार पर करना होगा. पीठ ने कहा कि उसकी राय में दूसरे अपराधियों के आचरण की वजह से हमारे समक्ष आये मामले में जमानत देने से इंकार करने का यह आधार नहीं हो सकता, यदि पेश मामले में मेरिट के आधार पर व्यक्ति जमानत का हकदार है. न्यायालय ने कहा कि अत: हमारी राय में ‘भागने के जोखिम’ सहित अन्य बिन्दुओं से किसी दूसरे मामलों से प्रभावित हुये बगैर ही विचार करना चाहिए और वह भी ऐसी स्थिति में जब यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सवाल हो. इस बीच, सोमवार को विशेष अदालत ने इस मामले में सीबीआई द्वारा दाखिल आरोप पत्र का संज्ञान लिया है. इस आरोप पत्र में चिदंबरम, उनके पुत्र कार्ति और 12 अन्य आरोपी है. इन सभी पर आरोप है कि इन्होंने भ्रष्टाचार निवारण कानून और भारतीय दंड संहिता के तहत अपराध मानी गई गतिविधियों को अंजाम दे कर सरकारी कोष को नुकसान पहुंचाया.
(इनपुट भाषा)
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