नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में जमानत देने से इनकार कर दिया. न्यायमूर्ति सुरेश कैत ने कांग्रेस नेता को जमानत देने से इंकार करते हुए कहा कि साक्ष्यों से छेड़छाड़ होने की कोई गुंजाइश नहीं है लेकिन इस आशंका को खारिज नहीं किया जा सकता कि चिदंबरम गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं. Also Read - एसिड पिलाने का मामला: पुलिस की धीमी जांच से नाराज कोर्ट ने कहा-ऐसा लग रहा है कि आरोपी को बचाया जा रहा है

सीबीआई द्वारा 21 अगस्त को गिरफ्तार किये जाने के बाद से ही चिदंबरम हिरासत में हैं. उन्होंने निचली अदालत का रुख न करके सीधे उच्च न्यायालय में नियमित जमानत के लिये याचिका दायर की थी. चिदंबरम को यहां उनके जोर बाग स्थित घर से गिरफ्तार किया गया था और वह तीन अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल में हैं. Also Read - ट्यूशन फीस माफ करने को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर, जानिए क्या है पूरा मामला 

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सीबीआई ने 15 मई 2017 को एक प्राथमिकी दर्ज की थी और आरोप लगाया था कि चिदंबरम के वित्त मंत्री रहने के दौरान 2007 में आईएनएक्स मीडिया समूह को 305 करोड़ रुपये के विदेशी निवेश हासिल करने के लिये एफआईपीबी की मंजूरी देने में अनियमितता की गई. इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने भी इस संदर्भ में 2017 में धनशोधन का एक मामला दर्ज किया था.

गौरतलब है कि सीबीआई ने पिछले शुक्रवार को जमानत की अर्जी का यह कहते हुए विरोध किया था कि चिदंबरम देश छोड़कर भाग सकते हैं. सीबीआई ने कहा था कि चिदंबरम हमेशा के लिए किसी दूसरे देश में रह सकते हैं और ऐसे में केस की सुनवाई पूरी होने तक उन्हें जमानत पर रिहा नहीं किया जाना चाहिए.

(इनपुट भाषा)