नई दिल्ली: पूर्व केंद्रीय वित्तमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम 26 तक सीबीआई हिरासत में भेजे गए. जांच एजेंसी ने आईएनएक्स मीडिया मामले में चिदंबरम से पूछताछ के लिए रिमांड की मांग की थी. चिदंबरम को सीबीआई मुख्यालय से भारी सुरक्षा के बीच राउज एवेन्यू कोर्ट लाया गया था. चिदंबरम आईएनएक्स मीडिया को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के लिए विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की मंजूरी देने के आरोपी हैं.

 


पूर्व केंद्रीय वित्तमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम को 26 तक सीबीआई हिरासत में भेजने का आदेश देते हुए अदालत ने कहा कि चिदंबरम के वकीलों और परिवार के सदस्यों को प्रत्येक दिन उनसे आधे घंटे की मुलाकात की इजाजत होगी. साथ ही अदालत ने चिदंबरम की मेडिकल जांच कानून के मुताबिक कराने को कहा. अदालत ने कहा कि सभी तथ्यों और परिस्थतियों पर विचार करते हुए मेरा मानना है कि चिदंबरम की पुलिस हिरासत उचित है. बता दें कि सीबीआई ने कांग्रेस नेता पी चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में बृहस्पतिवार को दिल्ली की एक अदालत में पेश किया और ‘बड़ी साजिश’ का खुलासा करने के लिए उनसे पूछताछ के वास्ते उनकी पांच दिन की हिरासत मांगी. पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम को जोरबाग स्थित उनके आवास से बुधवार रात गिरफ्तार किया गया था.


मामले में सीबीआई का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि इस घोटाले में चिदंबरम दूसरे लोगों के साथ आपराधिक साजिश रचने में शामिल थे. चिदंबरम के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किये जाने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया. मेहता ने अदालत से कहा कि वह (चिदंबरम) जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने जवाब में टाल-मटोल कर रहे हैं और गंभीर अपराध किया गया है. चिदंबरम के खिलाफ सुनवाई विशेष न्यायाधीश अजय कुमार कुहर के समक्ष हो रही. मेहता ने कहा कि यह धन शोधन (मनी लाउंड्रिंग) का एक गंभीर और बड़ा मामला है. उन्होंने कहा कि किसी चीज के एवज में फायदा पहुंचाए जाने को उजागर करने के लिए चिदंबरम को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत है. उनका दस्तावेजों से आमाना-सामना कराये जाने की जरूरत है.

मेहता ने दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले का भी जिक्र किया, जिसमें चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की गई है. उन्होंने इसमें की गई टिप्पणियों का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि इस मामले में अब तक आरोपपत्र दाखिल नहीं किया गया है और यह आरोपपत्र दाखिल करने से पहले का चरण है. उन्होंने कहा कि इसलिए, हमें सामग्री की जरूरत है जो चिदंबरम के पास है. उन्होंने दलील दी कि हिरासत में पूछताछ किये जाने पर प्रभावी जांच हो पाना संभव होगा.